government

PM मोदी की 77 विदेश यात्राओं पर ₹557.51 करोड़ खर्च, राज्यसभा में सरकार ने रखा पूरा ब्योरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में खर्च का विवरण साझा किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री की 77 विदेश यात्राओं पर कुल ₹557.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सरकार ने कहा कि इन यात्राओं के जरिए भारत ने कई देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत किया है और विभिन्न क्षेत्रों में नए समझौते किए गए हैं।

Priyanka Gaikwad07 अग. 2026, 05:31 PM IST
खबर शेयर करें:
PM मोदी की 77 विदेश यात्राओं पर ₹557.51 करोड़ खर्च, राज्यसभा में सरकार ने रखा पूरा ब्योरा
नई दिल्ली (New Delhi) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं और उन पर हुए खर्च को लेकर संसद में सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने राज्यसभा में बताया कि प्रधानमंत्री की अब तक 77 विदेश यात्राओं पर सरकारी खजाने से ₹557.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का मुख्य उद्देश्य भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करना, वैश्विक मंचों पर देश की भूमिका को प्रभावी बनाना और विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाना रहा है। सरकार के अनुसार, इन दौरों के दौरान कई देशों के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिला।

सरकार ने संसद में बताया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoUs) और द्विपक्षीय समझौते हुए। इन समझौतों के जरिए भारत ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने, नई तकनीकों तक पहुंच बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भागीदारी मजबूत करने की दिशा में काम किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री स्तर की विदेश यात्राएं किसी भी देश की कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। इन यात्राओं में दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों, सरकार प्रमुखों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेताओं के साथ बैठकें होती हैं, जिनमें आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं से भारत की वैश्विक पहचान और प्रभाव बढ़ा है। भारत ने इन दौरों के माध्यम से क्वाड, जी-20, ब्रिक्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भागीदारी को मजबूत किया है। विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च में आधिकारिक विमान संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, प्रतिनिधिमंडल की यात्रा, लॉजिस्टिक व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक खर्च शामिल होते हैं। सरकार के अनुसार, यह खर्च देश के कूटनीतिक और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। विपक्ष की प्रतिक्रिया: प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर खर्च को लेकर विपक्ष समय-समय पर सरकार से सवाल करता रहा है।

विपक्ष का कहना है कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता जरूरी है और हर खर्च का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार का तर्क है कि विदेश यात्राएं भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं। विशेषज्ञों की राय: विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि आज के वैश्विक दौर में शीर्ष नेतृत्व की व्यक्तिगत कूटनीति देशों के बीच भरोसा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। उनके अनुसार, विदेश यात्राओं की सफलता का आकलन केवल खर्च से नहीं, बल्कि उनसे हासिल हुए निवेश, समझौतों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आधार पर किया जाना चाहिए। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के बाद प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा तेज हो गई है। केंद्र सरकार इन यात्राओं को भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है।