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कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को बड़ी राहत, अब एक लाइसेंस से पूरे देश में संचालन l

भारतीय रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (CTOs) के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था को सरल और एकीकृत बनाने का बड़ा फैसला लिया है। अब ऑपरेटरों को पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेनें चलाने के लिए अलग-अलग रूट लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। एकल ऑल इंडिया लाइसेंस के तहत सभी मार्गों पर संचालन की अनुमति मिलेगी। साथ ही ₹25 करोड़ का एक समान पंजीकरण शुल्क, लाइसेंस विस्तार पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं और निजी निवेश को बढ़ावा देने जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। रेलवे का मानना है कि इन सुधारों से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, एमएसएमई को लाभ मिलेगा, सड़कों पर दबाव कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

Kashish Rai07 अग. 2026, 05:32 PM IST
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कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को बड़ी राहत, अब एक लाइसेंस से पूरे देश में संचालन l

भारतीय रेलवे ने देश में माल परिवहन को अधिक सरल, प्रतिस्पर्धी और उद्योग-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार लागू किया है। रेलवे मंत्रालय ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (Container Train Operators-CTOs) के लिए लागू मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट (MCA) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इन बदलावों का उद्देश्य लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान बनाना, निजी निवेश को प्रोत्साहित करना और रेलवे के माध्यम से कंटेनर परिवहन को बढ़ावा देना है।


नई व्यवस्था के तहत अब कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को अलग-अलग रूट श्रेणियों के लिए अलग लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। रेलवे की मंजूरी के बाद उन्हें एकल ऑल इंडिया लाइसेंस प्रदान किया जाएगा, जिसके जरिए वे पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर किसी भी मार्ग पर कंटेनर ट्रेनें संचालित कर सकेंगे। इससे पहले विभिन्न रूट श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग अनुमति और शुल्क की व्यवस्था थी, जिससे प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली थी। रेलवे का मानना है कि एकल लाइसेंस व्यवस्था से कारोबार करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होगा।


रेलवे ने पंजीकरण शुल्क की व्यवस्था भी पूरी तरह बदल दी है। पहले विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब सभी नए आवेदकों के लिए ₹25 करोड़ का एक समान, गैर-वापसी योग्य पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। यह शुल्क जमा करने के बाद ऑपरेटर पूरे देश में किसी भी रेलवे मार्ग पर कंटेनर ट्रेनें चला सकेंगे। इससे लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और सभी ऑपरेटरों के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।


नई नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद उसे 20 वर्ष के लिए आगे बढ़ाने (Extension) पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि किसी ऑपरेटर का प्रदर्शन संतोषजनक पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी उसके आवेदन पर लाइसेंस का नवीनीकरण या विस्तार बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कर सकेगा। भविष्य में भी लाइसेंस विस्तार के लिए अलग से कोई फीस नहीं देनी होगी। इससे लंबे समय तक निवेश करने वाली कंपनियों को वित्तीय राहत मिलेगी।


रेलवे ने वर्तमान लाइसेंसधारकों के हितों का भी ध्यान रखा है। कैटेगरी-I के ऑपरेटर अपने मौजूदा लाइसेंस की अवधि पूरी होने तक उसी व्यवस्था के तहत काम करते रहेंगे और नए लाइसेंस में नवीनीकरण के समय उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं कैटेगरी-II, III और IV के ऑपरेटरों को नए लाइसेंस में आने के लिए ₹15 करोड़ का अतिरिक्त शुल्क देना होगा, क्योंकि वे पहले ही ₹10 करोड़ का पंजीकरण शुल्क जमा कर चुके हैं। यदि ये ऑपरेटर अपनी मौजूदा 20 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले नई व्यवस्था अपनाना चाहते हैं, तब भी उन्हें यही ₹15 करोड़ जमा करने होंगे।


रेलवे मंत्रालय का कहना है कि इन सुधारों से कंटेनर ट्रेन संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और देश में रेल आधारित माल परिवहन को नई गति मिलेगी। सरल लाइसेंसिंग व्यवस्था से उद्योगों को तेजी से सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को कम लागत में माल परिवहन की सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी उत्पादन लागत और परिवहन खर्च में कमी आएगी।


रेलवे का मानना है कि यदि अधिक कंटेनर माल सड़क के बजाय रेल मार्ग से परिवहन होगा, तो राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा। इससे ट्रैफिक जाम, ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। रेल आधारित माल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है, इसलिए यह कदम देश के सतत विकास (Sustainable Development) लक्ष्यों को भी मजबूत करेगा।


रेलवे मंत्रालय के अनुसार, नई लाइसेंसिंग व्यवस्था 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अनुमोदन प्रक्रिया सरल होगी, नियामकीय बाधाएं कम होंगी और कंटेनर ट्रेन संचालन के लिए पूरे देश में एक समान नियम लागू होंगे। सरकार का विश्वास है कि इन सुधारों से रेलवे का माल परिवहन नेटवर्क अधिक मजबूत होगा, उद्योगों को सस्ती और तेज लॉजिस्टिक्स सुविधा मिलेगी तथा भारत की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।