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रेलवे का सख्त एक्शन: खराब खाने पर ₹5.13 करोड़ का जुर्माना, 6 ठेके रद्द l

भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के लिए पिछले तीन वर्षों में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वाले कैटरिंग ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार इस अवधि में भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों के आधार पर ₹5.13 करोड़ का जुर्माना लगाया गया, 54 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 6 कैटरिंग अनुबंध रद्द किए गए तथा कई लाइसेंसधारकों को भविष्य के लिए डिबार (काली सूची) कर दिया गया। रेलवे का कहना है कि हर वर्ष लगभग 58 करोड़ भोजन यात्रियों को परोसे जाते हैं और इनमें भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों का औसत केवल 0.0008 प्रतिशत है। यात्रियों को बेहतर सेवा देने के लिए रेलवे ने आधुनिक बेस किचन, भोजन पैकेटों पर क्यूआर कोड, सीसीटीवी निगरानी, एफएसएसएआई मानकों का पालन, नियमित निरीक्षण, थर्ड पार्टी ऑडिट और कर्मचारियों के प्रशिक्षण जैसी कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। सरकार का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना है।

Kashish Rai07 अग. 2026, 05:32 PM IST
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रेलवे का सख्त एक्शन: खराब खाने पर ₹5.13 करोड़ का जुर्माना, 6 ठेके रद्द l

भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क होने के साथ-साथ दुनिया की सबसे बड़ी कैटरिंग सेवाओं में भी शामिल है। प्रतिदिन लाखों यात्री लंबी दूरी की यात्रा के दौरान रेलवे की खानपान सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा बनाए रखना रेलवे के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी दिशा में रेलवे मंत्रालय ने पिछले तीन वर्षों के दौरान भोजन की गुणवत्ता और हाइजीन संबंधी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई करते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले कैटरिंग लाइसेंसधारकों के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं।


रेल मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में प्राप्त शिकायतों की जांच के बाद आईआरसीटीसी (IRCTC) ने दोषी पाए गए कैटरिंग संचालकों पर ₹5.13 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा 54 कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notices) जारी किए गए, 6 कैटरिंग अनुबंध रद्द किए गए तथा गंभीर अनियमितताओं के मामलों में कई लाइसेंसधारकों को डिबार कर दिया गया। रेलवे ने स्पष्ट किया कि डिबार किए गए लाइसेंसधारकों की सूची आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई गई है ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।


रेलवे मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि भारतीय रेलवे हर वर्ष औसतन 58 करोड़ भोजन यात्रियों को उपलब्ध कराता है। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों का औसत केवल 0.0008 प्रतिशत है। हालांकि रेलवे का कहना है कि शिकायतों की संख्या कम होने के बावजूद हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और जांच के बाद दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। मंत्रालय का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा और विश्वास बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।


यात्रियों तक स्वच्छ और सुरक्षित भोजन पहुंचाने के लिए रेलवे ने कैटरिंग व्यवस्था में कई आधुनिक बदलाव किए हैं। अब अधिकांश भोजन निर्धारित बेस किचन में तैयार किया जाता है, जहां साफ-सफाई और गुणवत्ता के लिए निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है। देश के विभिन्न स्थानों पर आधुनिक बेस किचन विकसित किए गए हैं, जिनमें भोजन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इससे भोजन बनाने से लेकर पैकिंग तक हर गतिविधि पर रियल टाइम निगरानी संभव हो गई है।


रेलवे ने खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल लोकप्रिय और प्रमाणित ब्रांडों के कच्चे माल के उपयोग को प्राथमिकता दी है। प्रत्येक बेस किचन में फूड सेफ्टी सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं, जो भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन पर लगातार नजर रखते हैं। इसके साथ ही ट्रेनों में आईआरसीटीसी के ऑनबोर्ड सुपरवाइजर भी तैनात किए जाते हैं, जो भोजन वितरण, सेवा की गुणवत्ता और यात्रियों की शिकायतों की निगरानी करते हैं।


यात्रियों को अधिक पारदर्शिता और भरोसा देने के लिए रेलवे ने भोजन के पैकेटों पर क्यूआर कोड की व्यवस्था भी लागू की है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करके यात्री भोजन पैक होने की तारीख, लाइसेंसधारी का नाम और एफएसएसएआई (Food Safety and Standards Authority of India) लाइसेंस नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे यात्रियों को भोजन के स्रोत और गुणवत्ता की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है तथा जवाबदेही भी बढ़ी है। रेलवे ने बेस किचन और पैंट्री कारों की नियमित डीप क्लीनिंग, समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल, भोजन के नियमित सैंपल परीक्षण तथा एफएसएसएआई प्रमाणन को भी अनिवार्य बनाया है। इसके अतिरिक्त थर्ड पार्टी एजेंसियों द्वारा समय-समय पर पैंट्री कारों और बेस किचन का ऑडिट कराया जाता है ताकि स्वच्छता और गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन हो सके। यात्रियों से फीडबैक लेने के लिए नियमित कस्टमर सैटिस्फैक्शन सर्वे भी आयोजित किए जाते हैं।


रेलवे मंत्रालय ने यह भी बताया कि कैटरिंग कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण में ग्राहकों से विनम्र व्यवहार, सेवा की गुणवत्ता, व्यक्तिगत स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा नियमों और पेशेवर कार्यशैली पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य केवल भोजन की गुणवत्ता सुधारना ही नहीं, बल्कि यात्रियों को बेहतर सेवा अनुभव प्रदान करना भी है। रेल मंत्रालय का कहना है कि नियमित और आकस्मिक निरीक्षण की बहु-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें रेलवे अधिकारियों, आईआरसीटीसी अधिकारियों और फूड सेफ्टी अधिकारियों की संयुक्त टीम भोजन तैयार करने, भंडारण, परिवहन और वितरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करती है। इस प्रणाली के माध्यम से किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।


राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे का लक्ष्य यात्रियों को विश्वस्तरीय, सुरक्षित और स्वच्छ खानपान सेवाएं उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, कड़ी निगरानी, पारदर्शी व्यवस्था और सख्त दंडात्मक कार्रवाई के माध्यम से रेलवे लगातार अपनी कैटरिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने की दिशा में काम कर रहा है।