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रेल माल ढुलाई में नया रिकॉर्ड, 2025-26 में 1,670 मिलियन टन पहुंचा आंकड़ा l

भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए वर्ष 2025-26 में 1,670 मिलियन टन (MT) माल परिवहन किया है, जो 2014-15 के 1,098 मिलियन टन की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। रेलवे ने गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT), डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC), निजी निवेश, आधुनिक माल टर्मिनलों, वैगन निवेश योजनाओं और बेहतर फर्स्ट-लास्ट माइल कनेक्टिविटी के जरिए अपनी माल ढुलाई क्षमता को लगातार मजबूत किया है। रेलवे का दावा है कि इस उपलब्धि के साथ भारतीय रेलवे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माल परिवहन नेटवर्क बन गया है।

Kashish Rai07 अग. 2026, 05:32 PM IST
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रेल माल ढुलाई में नया रिकॉर्ड, 2025-26 में 1,670 मिलियन टन पहुंचा आंकड़ा l

भारतीय रेलवे ने देश में माल परिवहन को अधिक तेज, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर सुधार किए हैं। इन प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025-26 में रेलवे की कुल माल ढुलाई 1,670 मिलियन टन तक पहुंच गई, जबकि वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा 1,098 मिलियन टन था। लगातार बढ़ती माल ढुलाई के साथ रेलवे ने न केवल अपने राजस्व में वृद्धि की है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत करते हुए दुनिया के दूसरे सबसे बड़े माल परिवहन रेलवे नेटवर्क का दर्जा हासिल किया है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है। इसमें आधुनिक माल टर्मिनलों का विकास, निजी निवेश को प्रोत्साहन, विशेष वैगन योजनाएं, डोर-टू-डोर कार्गो सेवाएं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का विस्तार और रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य उद्योगों को तेज, किफायती और भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स सुविधा उपलब्ध कराना है।


रेलवे ने गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT) नीति के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया है। अब तक देशभर में 142 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल शुरू किए जा चुके हैं, जिनकी कुल माल संभालने की क्षमता 224 मिलियन टन प्रति वर्ष है। इन टर्मिनलों के विकास में लगभग ₹10,000 करोड़ का निजी निवेश आकर्षित हुआ है। वर्ष 2025-26 के दौरान इन टर्मिनलों के माध्यम से 146 मिलियन टन माल का परिवहन किया गया। रेलवे का मानना है कि इससे उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाएं मिलने के साथ माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में कमी आई है।


रेलवे ने निजी क्षेत्र को विशेष प्रकार के वैगनों में निवेश के लिए भी प्रोत्साहित किया है। इसके तहत सीमेंट, स्टील, तेल, फ्लाई ऐश, कोयला और लौह अयस्क जैसे विभिन्न उत्पादों के परिवहन के लिए विशेष वैगनों का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 275 विशेष उद्देश्य वाले रैक, 397 सामान्य माल रैक तथा ऑटोमोबाइल परिवहन के लिए 54 निजी रैक संचालित किए जा रहे हैं। इससे विभिन्न उद्योगों की परिवहन आवश्यकताओं को अधिक कुशलता से पूरा किया जा रहा है।


रेलवे ने छोटे और मध्यम उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जॉइंट पार्सल प्रोडक्ट-रैपिड कार्गो सर्विस (JPP-RCS) योजना भी शुरू की है। इसके तहत ग्राहकों को डोर-टू-डोर पार्सल सेवा, ऑनलाइन बुकिंग और वर्चुअल एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, रेलवे के सार्वजनिक उपक्रम कॉनकॉर (CONCOR) द्वारा दिल्ली-कोलकाता और मुंबई-कोलकाता मार्गों पर भी डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सेवाएं संचालित की जा रही हैं।


रेलवे नेटवर्क के विस्तार पर भी लगातार निवेश किया जा रहा है। पिछले 12 वर्षों में रेलवे ने 36,429 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई हैं, जबकि 2009-14 के दौरान यह आंकड़ा 7,599 किलोमीटर था। नई लाइनों के निर्माण की औसत गति बढ़कर 8.32 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है, जो पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है। वर्तमान में देशभर में 514 रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनकी कुल लंबाई 40,000 किलोमीटर और अनुमानित लागत ₹8.31 लाख करोड़ है।


भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) का पूर्ण संचालन भी शामिल है। दोनों फ्रेट कॉरिडोर पूरी तरह चालू हो चुके हैं और इन पर प्रतिदिन औसतन 443 मालगाड़ियां संचालित की जा रही हैं। इन कॉरिडोरों के शुरू होने से मालगाड़ियों की गति बढ़ी है, ट्रेनों के टर्नअराउंड समय में कमी आई है और पारंपरिक रेल नेटवर्क पर भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हुई है। इसके परिणामस्वरूप रेलवे अधिक मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें संचालित करने में सक्षम हुआ है।


रेलवे ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बजट 2026 में डंकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा भी की है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। रेलवे का मानना है कि नया कॉरिडोर पूर्वी और पश्चिमी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल परिवहन को और अधिक तेज एवं किफायती बनाएगा।


रेल मंत्रालय का कहना है कि माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए किए गए इन व्यापक सुधारों से उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक्स, कम परिवहन लागत, तेज डिलीवरी और अधिक विश्वसनीय सेवाएं मिल रही हैं। साथ ही रेलवे के राजस्व में भी लगातार वृद्धि हो रही है। राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे भविष्य में भी आधुनिक तकनीक, निजी भागीदारी और बड़े बुनियादी ढांचा निवेश के माध्यम से देश के फ्रेट इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।