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नीति आयोग के मूल्यांकन में मिशन पोषण 2.0 को प्रभावी पहल बताया गया, पोषण ट्रैकर से लाभार्थियों तक सेवाओं की निगरानी और पारदर्शिता मजबूत
केंद्र सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत कुपोषण से लड़ने और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल और तकनीक आधारित व्यवस्था को मजबूत किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, पोषण ट्रैकर के जरिए आंगनवाड़ी सेवाओं, बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है। सरकार दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में विकसित कर रही है और फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम व आधार आधारित ट्रैकिंग के माध्यम से लाभार्थियों तक योजनाओं का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित कर रही है। नीति आयोग और विश्व बैंक के मूल्यांकन में भी पोषण अभियान और मिशन पोषण 2.0 को कुपोषण के खिलाफ प्रभावी पहल बताया गया है, जिससे पोषण संबंधी जागरूकता, स्तनपान को बढ़ावा और आंगनवाड़ी सेवाओं के उपयोग में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

देश में कुपोषण की चुनौती से निपटने और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 को एक मजबूत और समेकित कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया है। सरकार का कहना है कि यह मिशन पहले से चल रहे पोषण कार्यक्रमों को और मजबूत करते हुए स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास सेवाओं को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, मिशन पोषण 2.0 का उद्देश्य केवल बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि पोषण संबंधी व्यवहार में बदलाव लाना, आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करना और तकनीक के माध्यम से लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करना भी है।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में मिशन पोषण 2.0, पोषण अभियान और इसके प्रभावों से जुड़ी जानकारी साझा की।
नीति आयोग के मूल्यांकन में पोषण अभियान को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में नीति आयोग ने पोषण अभियान का तीसरे पक्ष से मूल्यांकन और प्रभाव आकलन कराया था। इस अध्ययन में पाया गया कि देश में कुपोषण से निपटने के लिए पोषण अभियान की प्रासंगिकता संतोषजनक रही है। मूल्यांकन में यह सामने आया कि अभियान ने पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने और लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नीति आयोग के अध्ययन में यह भी देखा गया कि पोषण अभियान के तहत स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी सेवाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ा है।
विश्व बैंक के सर्वे में दिखा पोषण व्यवहार में सुधार
वर्ष 2021 में विश्व बैंक ने पोषण अभियान के तहत 11 राज्यों में एक सर्वे किया था। इसमें आंध्र प्रदेश सहित उन राज्यों को शामिल किया गया था, जहां बच्चों में लंबाई कम बढ़ने यानी स्टंटिंग और महिलाओं में एनीमिया की समस्या अधिक पाई जाती थी। सर्वे के निष्कर्षों में सामने आया कि पोषण अभियान के तहत दी जा रही सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों से लोगों के पोषण व्यवहार में सुधार हुआ है। सर्वे के अनुसार-
पोषण संबंधी संदेश 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं तक पहुंचे।
लगभग 81 प्रतिशत महिलाओं ने बच्चों को जन्म के बाद पहले छह महीने तक केवल स्तनपान कराने की आदत अपनाई।
यह बदलाव पोषण अभियान के तहत चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों और सामुदायिक भागीदारी का परिणाम माना गया।
2025 में नीति आयोग के DMEO मूल्यांकन में मिशन पोषण 2.0 प्रभावी पाया गया
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का वर्ष 2025 में एक और मूल्यांकन नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (Development Monitoring and Evaluation Office-DMEO) द्वारा किया गया। यह अध्ययन 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में किया गया, जिसमें आंध्र प्रदेश भी शामिल था। मूल्यांकन में सामने आया कि मिशन पोषण 2.0 सरकार का कुपोषण से निपटने और बच्चों के विकास को बढ़ावा देने का एक व्यापक प्रयास है। रिपोर्ट में कहा गया कि मिशन पोषण 2.0 ने पहले के कार्यक्रमों को जोड़ते हुए एक मजबूत और समन्वित व्यवस्था तैयार की है। अध्ययन में आंगनवाड़ी सेवाओं के अधिक उपयोग को सकारात्मक संकेत बताया गया। विशेष रूप से- पूरक पोषण आहार वितरण, बच्चों की वृद्धि की निगरानी, पोषण परामर्श और लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुंच जैसी गतिविधियों में बेहतर भागीदारी देखी गई।
पोषण ट्रैकर से हो रही योजनाओं की डिजिटल निगरानी
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन पोषण 2.0 के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लीकेशन शुरू किया है। यह एक आईसीटी आधारित डिजिटल गवर्नेंस टूल है, जिसके माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों में उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा की जाती है। पोषण ट्रैकर के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें कई महत्वपूर्ण मानकों पर योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति देख सकती हैं। इसमें शामिल हैं- महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति की निगरानी, लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुंच का आकलन, योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी की पहचान, और जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाना। इस डिजिटल व्यवस्था से सरकार को वास्तविक समय में योजनाओं की स्थिति समझने में मदद मिल रही है।
टेक्नोलॉजी से रुकेगी फर्जी लाभार्थियों की पहचान, मजबूत होगी पारदर्शिता
मिशन पोषण 2.0 के तहत पोषण ट्रैकर में फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम (Facial Recognition System-FRS) भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य टेक-होम राशन (Take Home Ration-THR) वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है। फेसियल रिकॉग्निशन और आधार आधारित ट्रैकिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजना का लाभ केवल उसी लाभार्थी को मिले, जिसका नाम पोषण ट्रैकर में पंजीकृत है। इस व्यवस्था से- लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित हो रही है। फर्जी नामों और डुप्लीकेट रिकॉर्ड को रोकने में मदद मिल रही है। योजनाओं में होने वाली संभावित गड़बड़ियों और लीकेज को कम किया जा रहा है। अंतिम स्तर यानी लाभार्थी तक सेवा पहुंचाने की प्रक्रिया मजबूत हो रही है।
आंगनवाड़ी सेवाओं को तकनीक और पोषण सहायता से बनाया जा रहा प्रभावी
मिशन पोषण 2.0 के तहत आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। सरकार ने दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। इन केंद्रों में बेहतर आधारभूत सुविधाओं के साथ बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे लाभार्थियों की निगरानी और सेवाओं की रिपोर्टिंग आसान हो रही है। बच्चों के विकास की निगरानी के लिए ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस उपलब्ध कराए जा रहे हैं और पोषण वाटिका के माध्यम से स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पोषण को जन आंदोलन बनाने पर सरकार का जोर
सरकार का मानना है कि कुपोषण को खत्म करने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि लोगों के व्यवहार में बदलाव जरूरी है। इसी उद्देश्य से पोषण माह और पोषण पखवाड़ा जैसे जन जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से लोगों को संतुलित आहार, बच्चों की देखभाल, स्तनपान, महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आदतों के बारे में जागरूक किया जाता है।
कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में मिशन पोषण 2.0
मिशन पोषण 2.0 सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें कुपोषण को केवल भोजन की कमी नहीं बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक व्यवहार से जुड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल पोषण ट्रैकर, फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम, सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र, पोषण वाटिका और जन भागीदारी जैसे प्रयासों के माध्यम से सरकार बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने का प्रयास कर रही है। नीति आयोग और विश्व बैंक के मूल्यांकनों में सामने आए सकारात्मक परिणाम यह संकेत देते हैं कि पोषण अभियान और मिशन पोषण 2.0 ने देश में पोषण जागरूकता और सेवा वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
