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बच्चों के सवालों को मिलेगा मंच; गांव से लेकर शहर के वार्ड तक चलेगा ‘बाल-स्नेही’ अभियान!

बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए महाराष्ट्र में ‘बाल-स्नेही ग्राम पंचायत’ और ‘बाल-स्नेही वार्ड’ की अवधारणा लागू की जा रही है। बालसभा और बाल पंचायतों के माध्यम से बच्चों को अपनी समस्याएं, जरूरतें और अपेक्षाएं सामने रखने का अवसर दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय विकास की निर्णय प्रक्रिया में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

Priyanka Gaikwad08 अग. 2026, 02:05 PM IST
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बच्चों के सवालों को मिलेगा मंच; गांव से लेकर शहर के वार्ड तक चलेगा ‘बाल-स्नेही’ अभियान!
ठाणे  (Thane ): बच्चों के अधिकारों की रक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुरक्षा को स्थानीय विकास के केंद्र में लाने के लिए महाराष्ट्र में ‘बाल-स्नेही ग्राम पंचायत’ और ‘बाल-स्नेही वार्ड’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है। गांवों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।

गांव के विकास में बच्चों की आवाज : अब तक गांवों के विकास की योजना बनाते समय पानी, सड़क, स्वच्छता, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाता रहा है। लेकिन ‘बाल-स्नेही ग्राम पंचायत’ की अवधारणा में बच्चों की जरूरतों और उनके अधिकारों को भी विकास की योजना में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा। बच्चे अपनी समस्याएं सीधे सामने रख सकें और स्थानीय प्रशासन उन समस्याओं के समाधान के लिए कदम उठा सके, इसके लिए बालसभा और बाल पंचायतों को महत्व दिया जाएगा।

बालसभा और बाल पंचायत की भूमिका :  बालसभा बच्चों के लिए अपनी समस्याएं रखने का महत्वपूर्ण मंच बनेगी। स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य, स्वच्छता, खेल मैदान, सुरक्षित सड़कें और पीने के पानी जैसी विभिन्न सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर बच्चे अपनी राय रख सकेंगे। बाल पंचायत के माध्यम से बच्चों में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष जोर :  बच्चों में कुपोषण को कम करना इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। बच्चों को पौष्टिक आहार मिल रहा है या नहीं, उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हो रहा है या नहीं और उनका टीकाकरण पूरा हुआ है या नहीं, इन मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। इसके अलावा स्वच्छ पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर :  हर बच्चे को प्राथमिक शिक्षा का समान अवसर मिले, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाया जा सके और विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण मिले, इसके लिए ग्राम पंचायत और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। शिक्षा के साथ बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देने पर भी जोर रहेगा।

बाल संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास : बाल विवाह, बाल मजदूरी, बच्चों के साथ होने वाले अत्याचार और अन्य खतरों से बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता होगी। बाल-स्नेही ग्राम पंचायतों के माध्यम से इन मुद्दों पर जागरूकता, रोकथाम के उपाय और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।

बेटियों की सुरक्षा पर भी ध्यान :  बाल-स्नेही वातावरण तैयार करते समय बेटियों की सुरक्षा को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। स्कूल आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्ते, पर्याप्त और स्वच्छ शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा अपनी समस्याएं सामने रखने के लिए सुरक्षित मंच उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

खेल और मानसिक विकास भी जरूरी :  बच्चों का विकास केवल शिक्षा और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक गतिविधियां और सामाजिक भागीदारी भी बाल विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए गांवों में बच्चों के लिए सुरक्षित खेल मैदान, खुली जगह और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा। ‘मिशन बाल-स्नेही महाराष्ट्र’ के प्रायोगिक चरण में राज्य के 34 जिलों की प्रत्येक तीन ग्राम पंचायतों यानी कुल 102 ग्राम पंचायतों को शामिल किए जाने की जानकारी पहले सामने आ चुकी है। इन ग्राम पंचायतों में बालसभा और सक्रिय बाल पंचायतों के माध्यम से बच्चों की स्थानीय निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी बढ़ेगी :  बाल-स्नेही ग्राम पंचायत केवल नाम तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव आए, इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रभावी योजना और क्रियान्वयन जरूरी होगा। गांव में बच्चों की संख्या, स्कूल से बाहर बच्चों की स्थिति, स्वास्थ्य एवं पोषण, सुरक्षा, शिक्षा और उपलब्ध सुविधाओं का आकलन कर उसके आधार पर विकास योजना तैयार करने पर जोर दिया जा सकता है। इस अवधारणा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बच्चों को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी न मानकर उनके विकास से जुड़े फैसलों में सहभागी बनाना है। बच्चों की समस्याएं सीधे बच्चों से जानने पर स्थानीय प्रशासन को उनकी वास्तविक जरूरतों को समझने में मदद मिल सकती है। इसलिए बालसभा और बाल पंचायत को केवल औपचारिक गतिविधि न रखते हुए वहां उठाए गए मुद्दों पर वास्तविक कार्रवाई करना महत्वपूर्ण होगा।

गांव से शहर के वार्ड तक ‘बाल-स्नेही’ पहल :  ‘बाल-स्नेही’ की अवधारणा केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहरी क्षेत्रों के वार्डों में भी इसे लागू करने पर जोर है। शहरों में बच्चों के लिए सुरक्षित खेल मैदान, यातायात से सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल तक सुरक्षित पहुंच और बच्चों के अनुकूल सार्वजनिक स्थान जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे।

बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा
हर बच्चे को जीवन, विकास, शिक्षा, सुरक्षा और अपनी बात रखने का अधिकार है। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के माध्यम से इन अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चों से जुड़े मुद्दों को केवल महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी न मानते हुए ग्राम पंचायत, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, ‘बाल-स्नेही ग्राम पंचायत’ और ‘बाल-स्नेही वार्ड’ की अवधारणा प्रभावी ढंग से लागू होती है तो गांवों और शहरों के विकास की योजना को अधिक बाल-केंद्रित बनाया जा सकता है। बच्चों की बात सुनना, उनकी जरूरतों के अनुसार निर्णय लेना, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करना तथा उनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना ही इस पहल की वास्तविक सफलता की कसौटी होगी।