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Lay’s चिप्स वाले आलू पर PepsiCo की जीत, सुप्रीम कोर्ट ने बचाया रजिस्ट्रेशन; किसानों के अधिकार भी रखे सुरक्षित
Lay’s चिप्स में इस्तेमाल होने वाले खास आलू FL 2027 को लेकर PepsiCo और किसानों की वर्षों पुरानी कानूनी लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। 5 अगस्त 2026 को Justice J.B. Pardiwala और Justice K. Vinod Chandran की पीठ ने PepsiCo के plant variety registration को बरकरार रखा, लेकिन साथ ही किसानों के लिए भी कानूनी सुरक्षा का रास्ता साफ कर दिया। कोर्ट ने कहा कि PepsiCo अगर किसी किसान के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो संबंधित किसान PPVFR Act की Section 39(1)(iv) के तहत अपने अधिकारों का दावा कर सकता है।

नई दिल्ली: PepsiCo India और किसानों के बीच लंबे समय से चले आ रहे FL 2027 यानी FC-5 आलू की वैरायटी से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। यह वही processing-grade आलू की वैरायटी है जिसका इस्तेमाल PepsiCo के Lay’s potato chips के निर्माण में किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त 2026 को अपने फैसले में PepsiCo के plant variety registration को बरकरार रखा और साफ किया कि कंपनी को अपने कानूनन संरक्षित अधिकारों के कथित उल्लंघन के खिलाफ कानूनी उपाय अपनाने से रोका नहीं जा सकता। हालांकि, यदि PepsiCo किसी किसान के खिलाफ कार्यवाही शुरू करती है, तो संबंधित किसान Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Act, 2001 यानी PPVFR Act की Section 39(1)(iv) के तहत उपलब्ध वैधानिक सुरक्षा का दावा कर सकता है। किसान को संबंधित कार्यवाही में यह साबित करना होगा कि वह इस प्रावधान के दायरे में आता है।
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के Justice J.B. Pardiwala और Justice K. Vinod Chandran की पीठ ने की। मामला Kavitha Kuruganti बनाम PepsiCo India Holdings Pvt. Ltd. से जुड़ा है और Special Leave Petition (Civil) Nos. 10320-10321/2024 के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। फैसले को 2026 INSC 811 के रूप में रिपोर्ट किया गया है।
क्या है FL 2027 आलू और क्यों है यह इतना खास?
FL 2027 कोई सामान्य table potato नहीं है। इसे खास तौर पर potato chips बनाने के लिए विकसित किया गया था। इस वैरायटी में dry matter अधिक और sugar content कम होता है, जिससे chips manufacturing के दौरान processing बेहतर होती है और frying के समय आलू के काले पड़ने की समस्या कम होती है।
रिपोर्टों के अनुसार FL 2027 को 1996 में Robert W. Hoopes ने विकसित किया था। Hoopes Frito-Lay Agricultural Research से जुड़े plant breeder थे। Frito-Lay, PepsiCo समूह की कंपनी है। यह वैरायटी भारत में contract cultivation के जरिए भी उगाई जाती रही है और रिपोर्टों में हजारों किसानों के इसके उत्पादन से जुड़े होने की बात सामने आई है। यही कारण है कि इस मामले में plant variety protection और किसानों के अधिकारों का सवाल बेहद महत्वपूर्ण बन गया।
यह patent नहीं, plant variety registration का मामला है
इस विवाद को कई जगह “PepsiCo potato patent case” के रूप में बताया गया, लेकिन कानूनी तौर पर यह अंतर समझना जरूरी है।
मामला PPVFR Act, 2001 के तहत plant variety registration का है। PepsiCo India को FL 2027 के लिए 1 फरवरी 2016 को “extant variety” के रूप में registration certificate दिया गया था। इसलिए खबर में इसे “आलू का patent” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। यह plant variety registration का विवाद है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
PepsiCo ने FL 2027 को अपने Lay’s chips के लिए इस्तेमाल किया और इस वैरायटी से जुड़े अपने अधिकारों का संरक्षण PPVFR Act के तहत हासिल किया।
2019 में मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया जब PepsiCo ने गुजरात के कुछ किसानों के खिलाफ FL 2027/FC-5 आलू की कथित अनधिकृत खेती और बिक्री को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी ने कुछ किसानों के खिलाफ damages की मांग की थी। बाद में PepsiCo ने किसानों को out-of-court settlement का विकल्प भी दिया था। यही घटनाक्रम बाद में किसानों के अधिकार बनाम plant variety protection की बड़ी कानूनी बहस का आधार बना।
Kavitha Kuruganti ने क्यों चुनौती दी PepsiCo का registration?
सामाजिक कार्यकर्ता Kavitha Kuruganti ने PepsiCo के FL 2027 registration को चुनौती दी और registration रद्द करने की मांग की। उनकी दलील थी कि किसानों के खिलाफ PepsiCo की infringement proceedings किसानों के अधिकारों के विपरीत थीं और ऐसी कार्रवाई को public interest के खिलाफ माना जाना चाहिए। इसी आधार पर PPVFR Authority के सामने registration revocation की कार्यवाही शुरू हुई।
2021 में Authority ने PepsiCo का registration रद्द किया
Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Authority ने 3 दिसंबर 2021 को PepsiCo की FL 2027 variety का registration revoke कर दिया।
PepsiCo ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद मामला कई न्यायिक स्तरों से गुजरते हुए अंततः सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
2023 में Single Judge ने Authority के फैसले को बरकरार रखा
5 जुलाई 2023 को दिल्ली हाईकोर्ट के Single Judge ने PepsiCo की चुनौती पर फैसला सुनाया और Authority के revocation order को बरकरार रखा।
उस समय अदालत के सामने PepsiCo की registration application में variety की category और first commercialisation की तारीख से जुड़े सवाल भी थे।
यह फैसला बाद में Division Bench के सामने चुनौती दिया गया।
2024 में Delhi High Court Division Bench ने पलटा फैसला
PepsiCo और Kavitha Kuruganti, दोनों पक्षों ने Single Judge के फैसले के खिलाफ Division Bench में अपील की। 9 जनवरी 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट की Division Bench ने PepsiCo के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला दिया और registration revocation को हटाते हुए PepsiCo के registration से जुड़े अधिकारों को बहाल कर दिया।
Division Bench ने खास तौर पर Section 34(h) और किसानों के खिलाफ PepsiCo द्वारा दायर मुकदमों के बीच संबंध की जांच की।
किसानों के खिलाफ मुकदमे दायर करना अपने आप में vexatious नहीं: HC
Delhi High Court ने कहा कि केवल यह तथ्य कि PepsiCo ने किसानों के खिलाफ infringement suits दायर किए, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मुकदमे vexatious यानी परेशान करने के उद्देश्य से या predatory tactics के तहत दायर किए गए थे। अदालत ने माना कि कानून द्वारा दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए मुकदमा दायर करना अपने आप में intimidatory या vexatious नहीं कहा जा सकता। यदि किसी विशेष मुकदमे को vexatious या predatory बताया जाता है तो उसे उचित मंच पर साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा।
5 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिया अंतिम फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। Special Leave Petition (Civil) Nos. 10320-10321/2024 पर सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। Justice J.B. Pardiwala और Justice K. Vinod Chandran की पीठ ने कहा कि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने PepsiCo के plant variety registration को बरकरार रखा और याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी Delhi HC के निष्कर्ष में हस्तक्षेप नहीं किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ नहीं था जिससे यह स्थापित हो कि PepsiCo द्वारा किसानों के खिलाफ दायर किए गए मुकदमे केवल किसानों को डराने या दबाव डालने की predatory strategy थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून द्वारा दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए मुकदमा दायर करना अपने आप में intimidatory या vexatious नहीं हो सकता। इसलिए केवल किसानों के खिलाफ मुकदमे दायर किए जाने के आधार पर PPVFR Act की Section 34(h) के तहत PepsiCo का registration रद्द नहीं किया जा सकता।
लेकिन किसानों को Section 39(1)(iv) की सुरक्षा मिलेगी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किसानों के अधिकारों को लेकर है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि PepsiCo किसी व्यक्तिगत किसान के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करती है तो वह किसान PPVFR Act की Section 39(1)(iv) के तहत उपलब्ध statutory protection का दावा कर सकता है। हालांकि किसान को संबंधित मामले में यह साबित करना होगा कि वह इस प्रावधान की शर्तों के अंतर्गत आता है। इसका अर्थ यह है कि PepsiCo का registration बरकरार रहने के बावजूद किसी किसान को अपनी वैधानिक सुरक्षा का दावा करने से वंचित नहीं किया जा सकता।
Section 39(1)(iv) किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
PPVFR Act में किसानों के लिए विशेष अधिकारों का प्रावधान किया गया है। Section 39(1)(iv) किसानों को protected variety से संबंधित farm produce और seed को कानून में निर्धारित परिस्थितियों में save, use, sow और resow करने तथा निर्धारित शर्तों के अनुसार बेचने से जुड़ी सुरक्षा देता है। हालांकि branded seed के रूप में बिक्री पर इस सुरक्षा की सीमा है। इसलिए किसी किसान के खिलाफ PepsiCo की ओर से proceeding शुरू होने पर यह सवाल संबंधित मामले में देखा जाएगा कि वह किसान Section 39(1)(iv) की सुरक्षा के दायरे में आता है या नहीं।
PepsiCo को भी कानूनी कार्रवाई का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के अधिकारों की बात करते हुए PepsiCo के statutory rights को भी कमजोर नहीं किया। अदालत ने साफ कहा कि यदि PepsiCo को लगता है कि उसके कानूनन संरक्षित अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो कंपनी कानूनी remedies का इस्तेमाल कर सकती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने PepsiCo पर किसानों के खिलाफ कार्रवाई करने पर कोई blanket ban नहीं लगाया है। दूसरी ओर, किसान को भी अपनी वैधानिक सुरक्षा का दावा करने से वंचित नहीं किया गया है।
यही इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण संतुलन है।
Section 34(h) क्यों बना विवाद का केंद्र?
PPVFR Act की Section 34 registration को revoke करने के आधारों से संबंधित है।
Kuruganti की ओर से यह तर्क दिया गया था कि किसानों के खिलाफ PepsiCo की litigation public interest के खिलाफ थी और इस आधार पर registration रद्द किया जाना चाहिए। लेकिन Delhi High Court ने पाया कि केवल विभिन्न infringement suits का हवाला देना पर्याप्त नहीं था। यह साबित करना जरूरी था कि वे suits vexatious अथवा predatory tactics के रूप में दायर किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस निष्कर्ष में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
किसानों और PepsiCo के बीच 2019 का विवाद क्यों महत्वपूर्ण था?
2019 में गुजरात के किसानों के खिलाफ PepsiCo की कार्रवाई ने इस मामले को व्यापक सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया था। कंपनी की कार्रवाई के बाद यह सवाल उठा कि plant variety के पंजीकृत अधिकार और किसानों को PPVFR Act के तहत मिले अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। बाद में यही विवाद Kavitha Kuruganti की ओर से PepsiCo के registration को चुनौती देने वाली कानूनी कार्यवाही में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना।
हजारों किसान contract cultivation से जुड़े थे
FL 2027 के मामले का एक महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू भी है।
रिपोर्टों के अनुसार भारत में बड़ी संख्या में किसान PepsiCo की contract cultivation व्यवस्था के तहत इस processing-grade variety की खेती से जुड़े थे।
किसानों से उत्पादन की खरीद और कंपनी की processing requirements के कारण यह मामला केवल intellectual property dispute नहीं रहा, बल्कि contract farming और farmers’ rights से भी जुड़ गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या मतलब है?
इस फैसले से तीन बातें स्पष्ट होती हैं।
पहली, PepsiCo का FL 2027 plant variety registration केवल इसलिए रद्द नहीं किया जाएगा क्योंकि कंपनी ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसानों के खिलाफ मुकदमे दायर किए थे।
दूसरी, किसी खास मुकदमे को vexatious या predatory बताने के लिए ठोस आधार और प्रमाण जरूरी होंगे।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण, PepsiCo द्वारा किसी किसान के खिलाफ कार्यवाही शुरू किए जाने पर संबंधित किसान Section 39(1)(iv) के तहत अपने वैधानिक बचाव का दावा कर सकता है, यदि वह कानून की शर्तें पूरी करता है।
निष्कर्ष
PepsiCo और FL 2027 आलू की यह कानूनी लड़ाई भारत में intellectual property और farmers’ rights के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त 2026 को Justice J.B. Pardiwala और Justice K. Vinod Chandran की पीठ के माध्यम से PepsiCo के plant variety registration को चुनौती देने वाली याचिकाओं में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
साथ ही अदालत ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा स्पष्ट करते हुए कहा कि PepsiCo यदि किसी व्यक्तिगत किसान के खिलाफ कार्यवाही शुरू करती है, तो वह किसान Section 39(1)(iv) के तहत उपलब्ध statutory protection का दावा कर सकता है, बशर्ते वह कानून की शर्तों को पूरा करता हो।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने PepsiCo के वैधानिक अधिकार और किसानों के statutory protection—दोनों को अलग-अलग आधार पर बरकरार रखा है।
