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भारत बनेगा दुनिया का ‘Dispute Resolution Hub’! CJI सूर्यकांत ने बताई Global ADR की पूरी तस्वीर
भारत को वैश्विक विवाद समाधान के नक्शे पर बड़ी ताकत बनाने का खाका खींचते हुए CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि mediation महज कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि गहराई से एक “मनोवैज्ञानिक” प्रक्रिया है। International ADR Conference 2026 में उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया के लिए एक भरोसेमंद mediation centre बनने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए आधुनिक infrastructure के साथ मजबूत institutions, technology और international confidence भी विकसित करना होगा।

नई दिल्ली:
भारत को वैश्विक स्तर पर विवाद समाधान यानी dispute resolution का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण संदेश दिया है। 7 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के एस ब्लॉक में आयोजित International ADR Conference 2026 में CJI ने कहा कि mediation की मूल प्रकृति गहराई से “मनोवैज्ञानिक” है और भारत के पास वैश्विक समुदाय के लिए एक वास्तविक mediation centre के रूप में उभरने की पूरी क्षमता है। CJI ने कहा कि केवल पर्याप्त dispute resolution infrastructure तैयार करना पर्याप्त नहीं है। भारत को अपनी तेज आर्थिक और सामाजिक वृद्धि के साथ कदम मिलाते हुए ऐसा state-of-the-art ADR framework विकसित करना होगा, जो घरेलू ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय और cross-border विवादों को भी प्रभावी ढंग से संभाल सके।
यह सम्मेलन Maadhyam International Council for Conflict Resolution की ओर से आयोजित किया गया। CJI के संबोधन में mediation, arbitration, technology, institutional capacity और international dispute resolution के भविष्य को लेकर भारत की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
Mediation की सफलता में ‘मनोवैज्ञानिक’ पहलू क्यों अहम?
CJI सूर्यकांत ने mediation को केवल कानूनी तकनीक के रूप में देखने के बजाय इसके psychological dimension पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न jurisdictions में हुए research से लगातार यह सामने आया है कि लोग उन agreements का अधिक सम्मान करते हैं, जिन्हें तैयार करने में उन्होंने स्वयं भूमिका निभाई होती है। यही mediation की सबसे बड़ी ताकत है। इसमें विवाद का समाधान अदालत या arbitrator द्वारा थोपे जाने के बजाय पक्षकारों को स्वयं स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने का अवसर मिलता है। इससे समझौते के प्रति parties में ownership की भावना पैदा होती है और settlement के बाद उसे लागू करने की संभावना मजबूत होती है।
भारत में दो दशकों में बदली mediation की तस्वीर
CJI ने कहा कि पिछले करीब दो दशकों में भारत में mediation व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। आज institutional mediation centres में trained professionals, case managers, secure digital systems और Online Dispute Resolution यानी ODR platforms उपलब्ध हैं। इन व्यवस्थाओं की मदद से अलग-अलग शहरों या देशों में मौजूद पक्षकार भी डिजिटल माध्यम से विवादों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। यह बदलाव भारत के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि cross-border commercial disputes में parties को तेज, भरोसेमंद और कम जटिल dispute resolution mechanism की जरूरत होती है।
Med-Arb-Med मॉडल: Mediation और Arbitration का मेल
CJI सूर्यकांत ने Med-Arb-Med जैसे hybrid models को भी भविष्य की महत्वपूर्ण दिशा बताया।
इस प्रक्रिया में विवाद की शुरुआत mediation से होती है। दोनों पक्ष बातचीत के जरिए साझा समाधान खोजने की कोशिश करते हैं। यदि किसी खास मुद्दे पर सहमति नहीं बनती तो उस सीमित मुद्दे पर arbitrator हस्तक्षेप कर सकता है। इसके बाद parties फिर mediation की प्रक्रिया में लौट सकती हैं और arbitrator के निर्णय को व्यापक settlement का हिस्सा बनाया जा सकता है। CJI के मुताबिक यह तरीका arbitration की procedural rigor और mediation की party ownership को एक साथ लाने की कोशिश करता है। उन्होंने संकेत दिया कि ADR का भविष्य mediation और arbitration को एक-दूसरे का competitor मानने में नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार दोनों प्रक्रियाओं को intelligently integrate करने में है।
Mediation Act 2023 ने भारत को दिया अलग कानूनी ढांचा
CJI ने Mediation Act, 2023 को भारत की mediation journey में महत्वपूर्ण milestone बताया।
Mediation Act को 14 सितंबर 2023 को अधिनियमित किया गया था और इसके प्रमुख प्रावधान 9 अक्टूबर 2023 से लागू हुए। इस कानून ने भारत में mediation के लिए standalone statutory framework उपलब्ध कराया। कानून में institutional mediation, pre-litigation mediation, online mediation, community mediation, mediators और mediated settlement agreements से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। Mediation Act का उद्देश्य mediation को अधिक संस्थागत, भरोसेमंद और enforceable dispute resolution mechanism बनाना है।
Mediated settlement को मिलती है मजबूत कानूनी मान्यता
Mediation Act की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था mediated settlement agreement से जुड़ी है। कानून के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाला mediated settlement agreement final और binding होता है तथा उसे कानून में निर्धारित तरीके से लागू कराया जा सकता है। इससे mediation केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सफल settlement को कानूनी enforceability भी मिलती है। यही वजह है कि mediation को commercial और cross-border disputes के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
CJI का पहले भी mediation पर जोर
7 अगस्त के International ADR Conference में CJI का बयान अचानक सामने आया कोई अलग विचार नहीं है। पिछले कुछ महीनों में वे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर mediation और arbitration के भविष्य पर अपनी राय रख चुके हैं। जून 2026 में London International Disputes Week के दौरान UK Supreme Court में बोलते हुए CJI सूर्यकांत ने mediation को commercial dispute resolution की उभरती हुई frontier बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि arbitration कई मामलों में उन्हीं procedural complexities को अपनाने लगा है, जिनसे बचने के लिए उसे विकसित किया गया था। इसी दौरान London में Indian High Commission से जुड़े एक panel discussion में CJI ने कहा था कि भारतीय न्यायपालिका ने mediation को केवल alternative mechanism के तौर पर नहीं बल्कि एक मजबूत dispute resolution mechanism के रूप में बढ़ावा दिया है। उन्होंने trained mediators की बड़ी टीम तैयार होने और देशभर में mediation की बढ़ती पहचान का भी उल्लेख किया था।
‘Alternative’ शब्द पर भी CJI उठा चुके हैं सवाल
अप्रैल 2026 में CJI सूर्यकांत ने ADR terminology को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि mediation, arbitration, Lok Adalat और conciliation को “Alternative Dispute Resolution” कहना कभी-कभी यह गलत धारणा पैदा करता है कि ये अदालतों से नीचे या secondary mechanisms हैं।
उनके अनुसार non-court dispute resolution mechanisms को न्याय वितरण की मुख्य व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस विचार से यह संकेत मिलता है कि CJI mediation को केवल अदालतों का workload कम करने के उपाय के रूप में नहीं, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली के महत्वपूर्ण pillar के रूप में देखते हैं।
India-France cooperation में भी ADR पर जोर
जनवरी 2026 में पेरिस में आयोजित Indo-French Legal and Business Conference में भी CJI सूर्यकांत ने cross-border justice, institutional trust और India-France legal cooperation पर बात की थी। इस सम्मेलन में भारत और फ्रांस के judicial, legal, policy और business sectors से 250 से अधिक senior representatives शामिल हुए थे। कार्यक्रम में cross-border dispute resolution और दोनों देशों के बीच legal cooperation को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
यह पहल इस मायने में महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के बढ़ते international trade और investment के साथ cross-border commercial disputes के समाधान के लिए विश्वसनीय mechanisms की जरूरत भी बढ़ रही है।
भारत के ADR ecosystem में तेजी से बढ़ रही गतिविधियां
भारत में ADR को लेकर institutional activity भी लगातार बढ़ रही है।
India ADR Week 2026 का छठा संस्करण 7 से 11 सितंबर 2026 तक Bengaluru, Mumbai और New Delhi में आयोजित होगा। इसमें judges, arbitrators, lawyers, in-house counsels, arbitral institutions और industry representatives की भागीदारी होगी। CJI सूर्यकांत New Delhi में इसके closing day पर keynote address देंगे। Swiss Arbitration Association के अनुसार इस सप्ताह में तीन शहरों में international dispute resolution community की भागीदारी होगी और arbitration, mediation तथा dispute resolution के emerging trends पर चर्चा की जाएगी। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में ADR को मजबूत करने की कोशिश केवल एक conference तक सीमित नहीं है, बल्कि institutional level पर भी गतिविधियां बढ़ रही हैं।
Global ADR hub बनने के लिए सिर्फ कानून पर्याप्त नहीं
भारत के सामने अवसर बड़ा है, लेकिन चुनौती भी कम नहीं है। Global dispute resolution centre बनने के लिए केवल कानून और infrastructure तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। International parties के लिए neutrality, procedural predictability, professional expertise, speedy proceedings और settlement/enforcement में भरोसा भी जरूरी होगा। मार्च 2026 में Indian arbitration ecosystem पर चर्चा करते हुए Indian Express ने भी institutional trust और reforms से जुड़े मुद्दों को रेखांकित किया था। ऐसे में भारत को global ADR hub बनाने की दिशा में कानून के साथ-साथ institutions की quality और consistency पर भी ध्यान देना होगा।
Chandigarh में भी CJI ने दिया था इसी दिशा का संदेश
मार्च 2026 में Chandigarh International Arbitration Centre के उद्घाटन के दौरान CJI सूर्यकांत ने credible dispute resolution systems को भारत की economic और legal growth के लिए महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने जोर दिया था कि जैसे-जैसे भारत का global economic engagement बढ़ रहा है, वैसे-वैसे देश को ऐसे legal institutions की जरूरत है जो cross-border commercial disputes को integrity और efficiency के साथ संभाल सकें। उन्होंने यह भी कहा था कि international investors के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि विवाद होने पर उन्हें स्पष्ट हो कि dispute कहां और किस भरोसेमंद व्यवस्था के तहत सुलझाया जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है CJI का यह बयान?
CJI सूर्यकांत का 7 अगस्त का संदेश तीन बड़े बदलावों की ओर इशारा करता है।
पहला, mediation को केवल litigation के बाहर का विकल्प नहीं बल्कि justice delivery system का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना।
दूसरा, arbitration और mediation को अलग-अलग रास्तों के बजाय आवश्यकता के अनुसार integrated ADR mechanisms के रूप में विकसित करना।
तीसरा, भारत को घरेलू विवाद समाधान से आगे ले जाकर international और cross-border dispute resolution के लिए विश्वसनीय destination बनाना।
अगर भारत मजबूत institutions, trained professionals, technology, enforceability और international confidence को एक साथ विकसित कर पाता है तो global dispute resolution market में उसकी भूमिका काफी मजबूत हो सकती है।
