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मिशन शक्ति के तहत 991 वन स्टॉप सेंटर और 181 महिला हेल्पलाइन से करोड़ों महिलाओं को मिला लाभ, बच्चों की सुरक्षा के लिए मिशन वात्सल्य और ट्रैकचाइल्ड पोर्टल भी हुआ मजबूत
केंद्र सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्वास और सशक्तिकरण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कहा है कि देश में महिलाओं और बच्चों के लिए बहुस्तरीय योजनाओं के माध्यम से व्यापक सुरक्षा तंत्र विकसित किया गया है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाकर ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की अवधारणा को मजबूत करना है, जिससे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति, जबकि बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए मिशन वात्सल्य जैसी योजनाओं को पूरे देश में लागू किया जा रहा है। इनके माध्यम से महिलाओं और बच्चों को आपातकालीन सहायता, कानूनी संरक्षण, पुनर्वास, स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल निगरानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मिशन शक्ति के दो प्रमुख स्तंभ
सरकार ने बताया कि मिशन शक्ति महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए केंद्र प्रायोजित योजना है। इसे दो प्रमुख घटकों में लागू किया गया है। पहला घटक ‘संबल’ है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना है। दूसरा घटक ‘समर्थ्य’ है, जिसके माध्यम से महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस योजना का क्रियान्वयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है, जबकि केंद्र सरकार आवश्यक वित्तीय सहायता, आधारभूत ढांचा और मानव संसाधन उपलब्ध कराती है।
991 वन स्टॉप सेंटरों से 15 लाख से अधिक महिलाओं को मिली सहायता
मिशन शक्ति के ‘संबल’ घटक के अंतर्गत संचालित वन स्टॉप सेंटर (OSC) हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। सरकार के अनुसार 1 अप्रैल 2015 से 30 जून 2026 तक देशभर में 991 वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 15.20 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। इन केंद्रों पर महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सलाह, पुलिस सहायता, अस्थायी आश्रय तथा मनोसामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मध्य प्रदेश में वर्तमान समय में 63 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। इनमें होशंगाबाद-नरसिंहपुर संसदीय क्षेत्र के नर्मदापुरम, नरसिंहपुर और रायसेन जिलों में भी एक-एक केंद्र कार्यरत है। राज्य में अब तक 1.65 लाख से अधिक महिलाओं को इन केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा चुकी है।
181 महिला हेल्पलाइन से एक करोड़ से अधिक महिलाओं को मिला सहयोग
महिला हेल्पलाइन 181 भी मिशन शक्ति के ‘संबल’ घटक का हिस्सा है। यह सेवा महिलाओं को चौबीसों घंटे निःशुल्क टेलीफोन सहायता उपलब्ध कराती है। सरकार ने बताया कि योजना शुरू होने से 30 जून 2026 तक देशभर में 1.04 करोड़ से अधिक महिलाओं को हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है। इनमें अकेले मध्य प्रदेश की लगभग 3.83 लाख महिलाएं शामिल हैं। यह हेल्पलाइन आपातकालीन और गैर-आपातकालीन दोनों प्रकार की परिस्थितियों में महिलाओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराती है।
हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटरों का हुआ एकीकरण
महिलाओं को समय पर समन्वित सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने वन स्टॉप सेंटरों को महिला हेल्पलाइन से जोड़ा है। अब तक 661 वन स्टॉप सेंटरों को महिला हेल्पलाइन के साथ एकीकृत किया जा चुका है। इसके माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को आवश्यक सेवाओं तक शीघ्र रेफर किया जा सकता है। इसके अलावा महिला हेल्पलाइन को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम-112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा अन्य सेवा तंत्रों से भी जोड़ा गया है, जिससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो सके। वन स्टॉप सेंटरों को शक्ति सदन से भी जोड़ा गया है, ताकि दीर्घकालीन पुनर्वास और सुरक्षित आवास की आवश्यकता वाली महिलाओं को उचित संस्थानों तक भेजा जा सके।
मिशन शक्ति की लगातार हो रही निगरानी
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि मिशन शक्ति की नियमित समीक्षा की जाती है। हर वर्ष प्रोग्राम अप्रूवल बोर्ड (PAB) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ योजना की प्रगति, उद्देश्यों की पूर्ति और महिलाओं तक सेवाओं की प्रभावी पहुंच की समीक्षा करता है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय के अधिकारी समय-समय पर बैठकों, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और राज्यों के दौरे के माध्यम से भी योजना की निगरानी करते हैं। मंत्रालय ने मिशन शक्ति डैशबोर्ड भी विकसित किया है, जिसके जरिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर योजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए मिशन वात्सल्य
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के क्रियान्वयन के लिए भी नोडल मंत्रालय है। इस कानून के तहत राज्य बाल संरक्षण समितियां, बाल कल्याण समितियां, किशोर न्याय बोर्ड, जिला बाल संरक्षण इकाइयां और बाल देखभाल संस्थान स्थापित किए गए हैं। सरकार मिशन वात्सल्य के माध्यम से कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को संस्थागत और गैर-संस्थागत दोनों प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रही है। बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों को शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाएं, परामर्श और मनोरंजन जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। वहीं गैर-संस्थागत देखभाल के तहत स्पॉन्सरशिप, फोस्टर केयर, गोद लेने और आफ्टर केयर जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
चाइल्ड हेल्पलाइन और डिजिटल पोर्टल से बच्चों की सुरक्षा मजबूत
मिशन वात्सल्य के अंतर्गत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पूरे वर्ष चौबीसों घंटे संचालित की जाती है। यह सेवा इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम-112 से भी जुड़ी हुई है। मंत्रालय ने राज्यों के सहयोग से एकीकृत मिशन वात्सल्य पोर्टल विकसित किया है, जिसमें ट्रैकचाइल्ड पोर्टल और खोया-पाया एप्लीकेशन को भी शामिल किया गया है। ट्रैकचाइल्ड पोर्टल गृह मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय, राज्य सरकारों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्ड और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण सहित कई संस्थाओं के सहयोग से संचालित किया जाता है। इस पोर्टल को गृह मंत्रालय के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग एंड नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) से भी जोड़ा गया है, जिससे लापता बच्चों की एफआईआर का मिलान कर उनकी तलाश तेज की जा सके। खोया-पाया मॉड्यूल के माध्यम से आम नागरिक भी किसी लापता या मिले हुए बच्चे की सूचना दर्ज करा सकते हैं।
मानव तस्करी और साइबर अपराध पर भी सरकार का फोकस
महिलाओं और बच्चों की तस्करी रोकने के लिए प्रत्येक जिले में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) गठित की गई है। इन इकाइयों में पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों के प्रशिक्षित अधिकारी शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (Cri-MAC), राष्ट्रीय मानव तस्करी अपराधी डेटाबेस (NDHTO), सीसीटीएनएस, राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस (NDSO), यौन अपराध जांच ट्रैकिंग प्रणाली (ITSSO), इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम-112 और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 'साइबर क्राइम प्रिवेंशन अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रेन' योजना के तहत क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयास
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षा, पुनर्वास और सशक्तिकरण की योजनाओं को लगातार मजबूत कर रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्पलाइन, पुनर्वास केंद्र, बाल संरक्षण संस्थाएं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
