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महिलाओं को न्याय की नई दिशा: बेंगलुरु में शुरू हुआ पहला South Zone Conference, Justice B.V. Nagarathna ने किया उद्घाटन

बेंगलुरु में महिलाओं के न्याय की तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की Justice B.V. Nagarathna ने 8-9 अगस्त के South Zone Regional Conference on “Justice for Women” में त्वरित कानूनी सहायता, घरेलू हिंसा, workplace harassment, victim compensation और digital safety जैसे मुद्दों को केंद्र में रखते हुए ऐसी न्याय व्यवस्था की जरूरत बताई, जो महिला तक अदालत पहुंचने से पहले ही सुरक्षा और कानूनी मदद पहुंचा सके।

Sonali08 अग. 2026, 04:56 PM IST
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महिलाओं को न्याय की नई दिशा: बेंगलुरु में शुरू हुआ पहला South Zone Conference, Justice B.V. Nagarathna ने किया उद्घाटन

बेंगलुरु में महिलाओं को न्याय तक बेहतर और त्वरित पहुंच दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। 8 और 9 अगस्त को Karnataka Judicial Academy में पहली South Zone Regional Conference on “Justice for Women” आयोजित की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की जज Justice B.V. Nagarathna ने शनिवार को सम्मेलन का उद्घाटन किया। National Commission for Women (NCW), Karnataka High Court और Karnataka Judicial Academy के संयुक्त आयोजन में न्यायपालिका, पुलिस, अधिवक्ताओं, mediators और अन्य विशेषज्ञ महिलाओं से जुड़े न्यायिक और सामाजिक मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं।


घटना के तुरंत बाद मिले कानूनी सहायता: Justice Nagarathna

Justice B.V. Nagarathna ने महिलाओं को घटना के तुरंत बाद कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस स्टेशनों और अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां महिला को किसी घटना के बाद तत्काल कानूनी मदद और उसके अधिकारों की जानकारी मिल सके। उन्होंने State Legal Services Authorities, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों और पुलिस स्टेशनों के बीच एक structured framework बनाने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि legal aid की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि कितनी महिलाओं को सहायता मिली, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि उससे महिला को वास्तविक राहत और न्याय कितना मिला।

महिलाओं के खिलाफ अपराध के बीच क्यों जरूरी है यह सम्मेलन?

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों के बीच बेंगलुरु में आयोजित यह सम्मेलन और महत्वपूर्ण हो जाता है। NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,41,534 मामले दर्ज हुए। इनमें पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,22,027 मामले शामिल थे।

घरेलू हिंसा और वैवाहिक क्रूरता के मामलों में महिलाओं को अक्सर कानूनी, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केवल FIR दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़िता को तत्काल कानूनी सहायता, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और मुआवजा मिलना भी जरूरी है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में legal aid, domestic violence, victim compensation, matrimonial disputes और mediation जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। Justice Nagarathna ने भी महिलाओं के लिए त्वरित कानूनी सहायता व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है।

4.14 लाख महिलाओं ने एक साल में ली legal aid

Justice Nagarathna ने National Legal Services Authority के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 4,14,795 महिलाओं ने legal aid का लाभ लिया। उन्होंने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए legal aid के वास्तविक outcomes का अध्ययन करने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने सुझाव दिया कि High Court में legal aid के माध्यम से तय हुए मामलों की जानकारी Supreme Court Legal Services Committee को भी भेजी जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर महिला को आगे Supreme Court स्तर पर भी कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

Workplace harassment से domestic violence तक कई मुद्दों पर चर्चा

दो दिवसीय सम्मेलन में महिलाओं के लिए legal aid, महिला आरोपियों के अधिकार, victim compensation और rehabilitation जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।

इसके अलावा Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन, matrimonial disputes, child custody, partition, succession और domestic violence से जुड़े मामलों में mediation की भूमिका पर भी मंथन किया जा रहा है।

Digital space में महिलाओं की सुरक्षा भी एजेंडे में

सम्मेलन में महिलाओं के लिए उभरती digital challenges पर भी चर्चा हो रही है। Deepfake, cyberstalking और online harassment जैसी चुनौतियों को देखते हुए महिलाओं के लिए बेहतर reporting mechanism, technical assistance और तत्काल legal support की जरूरत पर जोर दिया गया है।

Victim compensation में देरी खत्म करने की जरूरत

Justice Nagarathna ने पीड़ित महिलाओं को मिलने वाले compensation में देरी दूर करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि महिलाओं को अंतरिम आर्थिक सहायता समय पर मिलनी चाहिए, ताकि इलाज, पुनर्वास और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े खर्चों का सामना किया जा सके। उन्होंने compensation mechanism की समीक्षा और देरी के कारणों की पहचान करने की आवश्यकता बताई।

Judicial process में gender sensitivity पर जोर

सम्मेलन में judicial officers को gender stereotypes और prejudices के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत पर भी चर्चा हो रही है। महिलाओं से जुड़े मामलों में evidence recording और judgments की भाषा को gender-sensitive बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया खुद महिला के लिए अतिरिक्त मानसिक या सामाजिक दबाव का कारण न बने।

Karnataka में High Court jurisdiction का मुद्दा भी उठा

Justice Nagarathna ने Karnataka में हाल के कानूनी संशोधनों के कारण High Court की regular first appeals से जुड़ी jurisdiction में आई कमी का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि Civil Judge के judgment और decree के खिलाफ appeal district court में जाने की व्यवस्था के कारण कुछ मामलों में न्याय तक पहुंच की अतिरिक्त चुनौती पैदा हो सकती है। उन्होंने राज्य सरकार और Advocate General से इस व्यवस्था की समीक्षा करने की अपील की।

सम्मेलन में कौन-कौन शामिल?

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता Karnataka High Court के Chief Justice Justice Vibhu Bakhru ने की। Karnataka High Court के Justice Jayant Banerji और Justice S.G. Pandit Guest of Honour के रूप में शामिल हुए, जबकि NCW Chairperson Dr. Vijaya Rahatkar ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

सम्मेलन में Supreme Court की महिला जजों के साथ दक्षिण भारत के विभिन्न High Courts के जज, senior advocates, mediators, senior police officers, academicians और subject experts हिस्सा ले रहे हैं।

महिलाओं के लिए दो महत्वपूर्ण प्रकाशन जारी

उद्घाटन समारोह में “We the Women of India” handbook का digital version और “Breaking the Silence – A Complete Guide to Domestic Violence and the Law” नामक publication भी जारी किया गया। इनका उद्देश्य महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध remedies के बारे में जागरूक करना है।

9 अगस्त को होगा समापन

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 9 अगस्त को होगा। Supreme Court की Justice V. Mohana valedictory address देंगी। Andhra Pradesh High Court की Chief Justice Justice Lisa Gill closing session की अध्यक्षता करेंगी, जबकि NCW Chairperson Dr. Vijaya Rahatkar Guest of Honour के रूप में मौजूद रहेंगी।

NCW की बड़ी पहल का पहला चरण

यह सम्मेलन NCW की देशभर में अलग-अलग zones में regional conferences आयोजित करने की व्यापक पहल का पहला सम्मेलन है। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जाने और अंततः महिलाओं के न्याय से जुड़े मुद्दों पर एक National Convention आयोजित करने की योजना है।

बेंगलुरु का यह सम्मेलन इसलिए खास है क्योंकि यहां महिलाओं के न्याय को केवल अदालतों तक सीमित न रखकर legal aid, police response, victim compensation, mediation, workplace safety, domestic violence और digital safety जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है।