health
39 साल तक दाईं तरफ धड़कता रहा दिल… अंदर छिपी थी ऐसी जन्मजात गड़बड़ी, दिल्ली के डॉक्टरों ने किया जटिल ऑपरेशन
दिल्ली के 39 वर्षीय एक व्यक्ति को 39 साल तक यह पता ही नहीं था कि उसका दिल सामान्य से अलग स्थिति में है और उसकी संरचना भी असामान्य है। जांच में सामने आया कि वह dextrocardia के साथ congenitally corrected transposition of the great arteries (ccTGA) जैसी दुर्लभ जन्मजात हृदय विकृति के साथ जी रहा था। इस स्थिति में हृदय का वह दायां वेंट्रिकल, जो सामान्यतः फेफड़ों की ओर रक्त पंप करता है, शरीर के पूरे हिस्से में रक्त पहुंचाने का काम करने लगता है। वर्षों के अतिरिक्त दबाव ने हृदय को कमजोर किया और एक वाल्व को भी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद दिल्ली के डॉक्टरों को जटिल सर्जरी करनी पड़ी।
Kalpana Gautam09 अग. 2026, 01:12 AM IST

नई दिल्ली। दिल को शरीर का सबसे भरोसेमंद पंप कहा जाता है, लेकिन दिल्ली के एक 39 वर्षीय व्यक्ति का दिल जन्म से ही सामान्य व्यवस्था से बिल्कुल अलग तरीके से काम कर रहा था। खास बात यह रही कि उसे लगभग चार दशक तक इसकी गंभीरता का पता ही नहीं चला।
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यक्ति का दिल छाती के बाईं ओर होने के बजाय दाईं ओर स्थित था। मेडिकल भाषा में इसे dextrocardia कहा जाता है। लेकिन मामला केवल दिल के दूसरी तरफ होने तक सीमित नहीं था। उसके दिल की अंदरूनी संरचना और रक्त प्रवाह की व्यवस्था भी सामान्य से अलग थी।
दिल दाईं तरफ था, लेकिन असली समस्या कहीं ज्यादा गंभीर थी
दाईं तरफ दिल होना अपने आप में हमेशा गंभीर बीमारी नहीं होता। कुछ लोगों में dextrocardia बिना महत्वपूर्ण हृदय समस्या के भी हो सकता है। लेकिन इस मरीज के मामले में इसके साथ एक दूसरी दुर्लभ जन्मजात विकृति भी मौजूद थी।
डॉक्टरों ने congenitally corrected transposition of the great arteries (ccTGA) की पहचान की।
इस स्थिति में हृदय के दो स्तरों पर कनेक्शन उलट जाते हैं—atria और ventricles के बीच तथा ventricles और बड़ी धमनियों के बीच। इसका परिणाम यह होता है कि रक्त का प्रवाह शरीर तक पहुंचने के लिए एक ऐसे वेंट्रिकल का इस्तेमाल करता है जो सामान्यतः फेफड़ों की ओर रक्त पंप करने के लिए बना होता है।
जिस वेंट्रिकल को फेफड़ों के लिए काम करना था, वही शरीर को रक्त पहुंचाता रहा
सामान्य हृदय में दायां वेंट्रिकल कम दबाव पर रक्त को फेफड़ों तक पहुंचाता है, जबकि बायां वेंट्रिकल ज्यादा दबाव के साथ पूरे शरीर में रक्त पंप करता है।
लेकिन ccTGA में morphological right ventricle systemic ventricle बन जाता है—यानी वही वेंट्रिकल पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालता है।
शुरुआत में शरीर इस असामान्य व्यवस्था को काफी हद तक संभाल सकता है। यही कारण है कि कुछ मरीज वर्षों तक अपेक्षाकृत सामान्य जीवन जी सकते हैं और उनकी जन्मजात समस्या देर से सामने आती है। लेकिन लंबे समय तक systemic pressure के खिलाफ काम करने के कारण यह दायां वेंट्रिकल धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है।
39 साल बाद सामने आया असर
इस मरीज में वर्षों तक असामान्य तरीके से काम करने वाले systemic right ventricle पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। समय के साथ हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित हुई और उसके एक वाल्व में भी समस्या विकसित हुई।
ccTGA में systemic atrioventricular valve आमतौर पर tricuspid valve होता है। ऐसे मरीजों में समय के साथ tricuspid valve regurgitation यानी वाल्व से रक्त के पीछे की ओर रिसने की समस्या विकसित हो सकती है। इससे systemic right ventricle पर और दबाव बढ़ता है और हृदय की कमजोरी बढ़ सकती है।
दिल की असामान्य बनावट ने सर्जरी को बनाया चुनौतीपूर्ण
ऐसे मरीज में सामान्य हृदय की तरह ऑपरेशन करना आसान नहीं होता, क्योंकि डॉक्टरों को पहले से ही यह समझना पड़ता है कि हृदय के कक्ष, वाल्व और बड़ी रक्त वाहिकाएं किस दिशा और किस क्रम में जुड़ी हुई हैं।
दाईं ओर स्थित हृदय और बदली हुई आंतरिक संरचना के कारण सर्जिकल टीम को सामान्य anatomical landmarks से अलग तरीके से योजना बनानी पड़ती है। Dextrocardia और जटिल congenital heart defects के मामलों में pre-operative imaging और detailed anatomical mapping इसलिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
दुर्लभ बीमारी, लेकिन मरीज 39 साल तक सामान्य जीवन जीता रहा
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यही है कि इतनी जटिल जन्मजात हृदय संरचना के बावजूद मरीज लगभग चार दशक तक बिना इस समस्या की जानकारी के जीवन जीता रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, ccTGA जैसे मामलों में लक्षण कई वर्षों तक हल्के या अनुपस्थित रह सकते हैं। समस्या अक्सर तब सामने आती है जब systemic right ventricle की कार्यक्षमता कम होने लगती है या वाल्व में regurgitation बढ़ जाती है।
क्या होता है dextrocardia?
Dextrocardia एक जन्मजात स्थिति है जिसमें हृदय सामान्य बाईं ओर होने के बजाय छाती के दाईं ओर स्थित होता है और उसका apex भी दाईं दिशा में हो सकता है।
यह स्थिति अकेले भी हो सकती है और अन्य जन्मजात हृदय विकृतियों के साथ भी। इसलिए केवल यह देखकर कि किसी व्यक्ति का दिल दाईं ओर है, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसे गंभीर बीमारी है। असली स्थिति जानने के लिए ECG, echocardiography, CT या cardiac MRI जैसी जांचों की आवश्यकता पड़ सकती है।
दिल्ली के इस 39 वर्षीय मरीज का मामला दिखाता है कि जन्मजात हृदय की कुछ गंभीर संरचनात्मक असामान्यताएं कई दशकों तक छिपी रह सकती हैं। इस मामले में दिल का दाईं ओर होना केवल बाहरी संकेत था; असली चुनौती हृदय के अंदर रक्त प्रवाह की बदली हुई व्यवस्था और systemic right ventricle पर पड़ने वाला लंबे समय का दबाव था।
ऐसे दुर्लभ मामलों में आधुनिक imaging, congenital-heart विशेषज्ञों की विशेषज्ञता और जटिल cardiac surgery मिलकर मरीज को उपचार का रास्ता प्रदान कर सकते हैं। यह मामला चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ इस बात की भी याद दिलाता है कि शरीर में जन्म से मौजूद असामान्यता हमेशा तुरंत लक्षणों के रूप में सामने आए, यह जरूरी नहीं है।
