politics

सुप्रीम कोर्ट से उद्धव ठाकरे को फिर से झटका : SC ने सांसदों के शिवसेना में विलय को दी गई चुनौती पर सुनवाई दो हफ्ते टाली, लोकसभा स्पीकर के पेश न होने पर जताई नाराजगी ।

आज 10 अगस्त 2026 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे - UBT) गुट को बड़ा झटका देते हुए लोकसभा स्पीकर के उस फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है, जिसमें शिवसेना के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दी गई थी। अदालत ने यह कदम लोकसभा स्पीकर की ओर से किसी के भी अदालत में पेश न होने के कारण उठाया है।

Priyanka Gaikwad10 अग. 2026, 02:15 PM IST
खबर शेयर करें:
सुप्रीम कोर्ट से उद्धव ठाकरे को फिर से झटका : SC ने सांसदों के शिवसेना में विलय को दी गई चुनौती पर सुनवाई दो हफ्ते टाली, लोकसभा स्पीकर के पेश न होने पर जताई नाराजगी ।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए यह अहम टिप्पणी की। इससे पहले, गत 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था। स्पीकर की गैर-मौजूदगी पर उठे सवाल सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान शिंदे सेना के विधायकों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल और सिद्धार्थ भटनागर अदालत में पेश हुए, लेकिन लोकसभा स्पीकर की ओर से कोई भी नुमाइंदा उपस्थित नहीं हुआ। याचिकाकर्ता यूबीटी गुट के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष तत्काल अंतरिम राहत (Interim Relief) दिए जाने की जोरदार मांग की। वहीं, यूबीटी की तरफ से पेश हुए एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने आरोप लगाया कि प्रतिवादियों का मुख्य मकसद संसद के चल रहे मानसून सत्र को किसी तरह "पार करना" या टालना है। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह बिना प्रतिवादियों को सुने अंतरिम राहत पर कोई फैसला नहीं देगी।

'स्पीकर के पास नहीं है पूर्ण शक्तियां' वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जब संबंधित सांसदों के खिलाफ कोई अयोग्यता (Disqualification) याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी, तो लोकसभा स्पीकर के पास इस तरह के विलय को मंजूरी देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। सिब्बल ने संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों से यह स्पष्ट है कि स्पीकर [10वीं अनुसूची के] पैरा 4 के तहत केवल अयोग्यता याचिका के बचाव के रूप में ही विलय पर फैसला कर सकते हैं। उनके पास कोई पूर्ण (Plenary) शक्तियां नहीं हैं।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्पीकर ने एकतरफा फैसला लेते हुए यूबीटी पक्ष को अपना पक्ष रखने या सुनवाई का कोई अवसर तक नहीं दिया। अदालत ने संज्ञान लिया कि नोटिस तामील होने के बावजूद लोकसभा स्पीकर और लोकसभा के संयुक्त सचिव की ओर से कोई भी अदालत में हाजिर नहीं हुआ।

क्या है पूरा मामला? गौरतलब है कि संसद के मानसून ठीक पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में हुए विलय को हरी झंडी दे दी थी। इस राजनीतिक उठापटक के बाद पाला बदलने वाले सांसदों में:
संजय देशमुख (यवतमाल) ,संजय जाधव (परभणी) ,संजय दिना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) ,नागेश पाटिल-अष्टिकर (हिंगोली) ,ओमप्रकाश राजेनिम्बालकर (धाराशिव) ,भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) शामिल हैं।

इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक घटनाक्रम के बाद लोकसभा में उद्धव गुट के सांसदों की संख्या सिमटकर महज तीन रह गई है, जबकि शिंदे नीत शिवसेना के सांसदों का आंकड़ा बढ़कर 13 पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस स्थगन से साफ है कि मानसून सत्र के दौरान फिलहाल यूबीटी गुट को कानूनी मोर्चे पर तुरंत राहत मिलने की संभावना टल गई है। अदालत अब दो हफ्ते बाद इस मामले पर अगली सुनवाई करेगी।