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पढ़ाई और भविष्य के लिए समान अवसर की मांग, NIEPVD मॉडल स्कूल के दृष्टिबाधित छात्रों का आंदोलन जारी
देहरादून के NIEPVD मॉडल स्कूल के दृष्टिबाधित छात्र छात्रवृत्ति में रुकावट, महंगी किताबों, भोजन की गुणवत्ता, पर्याप्त सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों और प्रशासन के बीच दो दौर की बातचीत के बावजूद ठोस समाधान नहीं निकल सका है। छात्र बकाया छात्रवृत्ति बहाल करने, स्थायी वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
Neha Sharma10 अग. 2026, 05:37 PM IST

रांची में चल रहे बड़े छात्र आंदोलन के बीच देहरादून से भी छात्रों के विरोध की एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। देहरादून स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद विजुअल डिसएबिलिटीज़ (NIEPVD) के मॉडल स्कूल के दृष्टिबाधित छात्र पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
यह संस्थान पहले नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द विजुअली हैंडीकैप्ड (NIVH) के नाम से जाना जाता था। यह केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाला राष्ट्रीय स्तर का संस्थान है। यहां दृष्टिबाधित बच्चों को स्कूल शिक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं। छात्रों का आरोप है कि संस्थान में लंबे समय से कई समस्याएं बनी हुई हैं। इनमें खाने की गुणवत्ता, महंगी किताबें, छात्रवृत्ति में रुकावट, पर्याप्त सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं। छात्रों का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर पहले भी संस्थान के प्रशासन के साथ बातचीत की गई और केंद्र तथा राज्य सरकार तक अपनी शिकायतें पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से बातचीत भी की, लेकिन दो दौर की बातचीत के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद छात्रों ने अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है। छात्रों की मांगों में बकाया छात्रवृत्ति बहाल करना, स्थायी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति, बेहतर सुविधाएं और शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि वे सिर्फ सुविधाएं नहीं, बल्कि अपने शिक्षा और भविष्य के लिए समान अवसर की मांग कर रहे हैं।
यह आंदोलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये वे छात्र हैं जिन्हें शिक्षा और आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त सहयोग और सुलभ सुविधाओं की जरूरत होती है। ऐसे में अगर किसी राष्ट्रीय संस्थान में ही उन्हें अपनी बुनियादी मांगों के लिए आंदोलन करना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब छात्रों की नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर है। सवाल सिर्फ उनकी मौजूदा मांगों का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि दृष्टिबाधित छात्रों को ऐसा शैक्षणिक माहौल कब मिलेगा, जहां उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए हड़ताल का सहारा न लेना पड़े।
