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गोरखपुर (Gorakhpur)से लखनऊ 3 घंटे के करीब, देवरिया-कसया फोरलेन से बदलेगा पूर्वांचल का रोड नेटवर्क; कुशीनगर से सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे तक बनेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

देवरिया/गोरखपुर, Deoria/Gorakhpur पूर्वी उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाएं एक साथ आगे बढ़ रही हैं। इनमें देवरिया-कसया फोरलेन, पहले से चालू गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे प्रमुख हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और पूर्वांचल के दूसरे जिलों के बीच आवागमन और माल परिवहन को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

sd10 अग. 2026, 05:38 PM IST
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गोरखपुर (Gorakhpur)से लखनऊ 3 घंटे के करीब, देवरिया-कसया फोरलेन से बदलेगा पूर्वांचल का रोड नेटवर्क; कुशीनगर से सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे तक बनेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

इसकी सबसे अहम कड़ी 31.5 किलोमीटर लंबा देवरिया-कसया फोरलेन है, जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ₹292.06 करोड़ की मंजूरी दी है। यह सड़क देवरिया को कुशीनगर के कसया क्षेत्र से जोड़ेगी और आगे कुशीनगर एयरपोर्ट, पर्यटन स्थलों तथा प्रस्तावित बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक पहुंच आसान करेगी। यूपी कैबिनेट ने जनवरी 2026 में इस परियोजना को मंजूरी दी थी।

देवरिया-कसया फोरलेन: क्या बदलेगा?

मौजूदा देवरिया-कसया मार्ग को चौड़ा कर फोरलेन बनाने की योजना है। परियोजना की लंबाई 31.500 किलोमीटर है और कुल अनुमानित लागत ₹292.06 करोड़ है। फरवरी-मार्च 2026 तक परियोजना के लिए पहली किस्त के रूप में ₹102 करोड़ जारी होने और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी सामने आई थी। सड़क चौड़ी होने के बाद देवरिया से कसया और कुशीनगर की ओर जाने वाले वाहनों को अधिक क्षमता वाला मार्ग मिलेगा। इससे स्थानीय यातायात के साथ-साथ पर्यटकों और मालवाहक वाहनों को भी फायदा होगा।

परियोजना के प्रमुख आंकड़े

  • लंबाई: 31.5 किमी
  • कुल लागत: ₹292.06 करोड़
  • पहली किस्त: ₹102 करोड़
  • निर्माण एजेंसी: लोक निर्माण विभाग
  • स्थिति: निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है
  • मुख्य कनेक्टिविटी: देवरिया–कसया–कुशीनगर
  • महत्व: कुशीनगर एयरपोर्ट और पर्यटन क्षेत्र तक बेहतर पहुंच

छोटी गंडक पर बनेगा ₹115 करोड़ का नया पुल

देवरिया-कसया फोरलेन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रामपुर कारखाना क्षेत्र के पटनवा पुल के समानांतर नया पुल है।

करीब 104 मीटर लंबे इस नए पुल पर ₹115 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। मई 2026 तक इसके निर्माण का काम शुरू हो चुका था। निर्माण के लिए छोटी गंडक नदी की धारा को अस्थायी रूप से मोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।

नया पुल फोरलेन सड़क की यातायात क्षमता को पूरा करने के लिए जरूरी है। पुराने पटनवा पुल का इतिहास भी करीब 122 साल पुराना बताया गया है।

1,400 बिजली के खंभे हटेंगे, 3,000 पेड़ों की कटाई

फोरलेन निर्माण के लिए मौजूदा सड़क के आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव होंगे।

सर्वे के अनुसार:

  • करीब 1,400 बिजली के खंभे हटाए जाएंगे।
  • लगभग 3,000 पेड़ों को हटाने की जरूरत बताई गई है।
  • करीब 22 स्थानों पर पुलिया बनाए जाने की योजना है।
  • सड़क की चौड़ाई मौजूदा स्थिति से काफी बढ़ाई जाएगी।

मई 2026 में PWD इंजीनियरों ने टीएस मशीन के जरिए सड़क का सर्वे शुरू किया था।

✈️ कुशीनगर एयरपोर्ट और पर्यटन को मिलेगा फायदा

देवरिया-कसया मार्ग का चौड़ीकरण सिर्फ स्थानीय यातायात के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। यह मार्ग कुशीनगर, भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली और कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच के लिए भी महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश कैबिनेट के फैसले में भी कहा गया था कि सड़क चौड़ी होने से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को देवरिया तथा कुशीनगर तक पहुंचने में सुविधा होगी।

इससे होटल, पर्यटन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सड़क किनारे कारोबार को भी भविष्य में बढ़ावा मिलने की संभावना है।

🚗 गोरखपुर से लखनऊ: 3 घंटे का दावा कितना सही?

इस खबर का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा है—“गोरखपुर से लखनऊ सिर्फ 3 घंटे में।”

यहां तथ्य समझना जरूरी है। गोरखपुर-लखनऊ की तेज कनेक्टिविटी में पहले से चालू गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी भूमिका है। UPEIDA के अनुसार यह 91.352 किलोमीटर लंबा, चार लेन और पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है। इसकी स्वीकृत परियोजना लागत ₹7,283.28 करोड़ है। यह गोरखपुर के NH-27 के पास जैतपुर से शुरू होकर आजमगढ़ के सालारपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इस नेटवर्क के कारण गोरखपुर से लखनऊ की यात्रा पहले की तुलना में काफी तेज हुई है। विभिन्न रिपोर्टों में यात्रा समय करीब 3.5 घंटे तक आने की बात कही गई है।

इसलिए “3 घंटे” को संभावित यात्रा समय के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन देवरिया-कसया फोरलेन पूरा होते ही गोरखपुर-लखनऊ यात्रा ठीक 3 घंटे में होने की कोई आधिकारिक गारंटी फिलहाल नहीं है।

🛣️ गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की पूरी जानकारी

91.352 किमी का हाई-स्पीड कॉरिडोर

शुरुआत: जैतपुर, गोरखपुर, NH-27
अंत: सालारपुर, आजमगढ़
कनेक्शन: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
लेन: 4
लंबाई: 91.352 किमी
स्वीकृत लागत: ₹7,283.28 करोड़

इस एक्सप्रेसवे के जरिए गोरखपुर सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ गया है। इससे लखनऊ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा को बड़ा फायदा मिला है।

🚀 अब अगली बड़ी कड़ी—गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे

पूर्वांचल के रोड नेटवर्क में भविष्य की सबसे बड़ी परियोजनाओं में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे शामिल है। विभिन्न हालिया रिपोर्टों में इसकी लंबाई करीब 568 किलोमीटर बताई गई है। यह उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा। प्रस्तावित रूट में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और कुशीनगर क्षेत्र के बाद बिहार के कई जिले और फिर पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी क्षेत्र शामिल हैं।

बिहार में प्रमुख जिले

रिपोर्टों के अनुसार एक्सप्रेसवे बिहार के:

  • पश्चिम चंपारण
  • पूर्वी चंपारण
  • शिवहर
  • सीतामढ़ी
  • मधुबनी
  • सुपौल
  • अररिया
  • किशनगंज

जैसे क्षेत्रों से होकर गुजरने की योजना है।

💰 गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की लागत

इस परियोजना की लागत को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग आंकड़े मिलते हैं। कुछ रिपोर्टों में लगभग ₹32,000 करोड़, जबकि अन्य में करीब ₹38,645 करोड़ तक का आंकड़ा सामने आया है।

इसलिए जब तक अंतिम DPR/आधिकारिक परियोजना लागत स्पष्ट रूप से जारी नहीं होती, इसे अनुमानित लागत के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसी तरह इसकी अंतिम लंबाई और कुछ हिस्सों के एलाइनमेंट में भी समय-समय पर बदलाव की खबरें आती रही हैं। इसलिए News Portal पर 568 किमी और लागत को “वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार” लिखना अधिक सुरक्षित है।

🌐 देवरिया-कसया से लेकर सिलीगुड़ी तक कैसे जुड़ेगा नेटवर्क?

इन परियोजनाओं को एक साथ देखें तो पूर्वांचल में कनेक्टिविटी का बड़ा नेटवर्क बनता नजर आता है:

देवरिया
⬇️
देवरिया-कसया फोरलेन
⬇️
कसया/कुशीनगर
⬇️
गोरखपुर क्षेत्र
⬇️
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे
⬇️
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
⬇️
लखनऊ

और भविष्य में:

गोरखपुर/कुशीनगर क्षेत्र
⬇️
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे
⬇️
बिहार
⬇️
पश्चिम बंगाल
⬇️
सिलीगुड़ी

यानी एक तरफ गोरखपुर को लखनऊ से तेज एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ कुशीनगर के रास्ते पूर्वी भारत की ओर नया हाई-स्पीड कॉरिडोर तैयार होने की दिशा में काम हो रहा है।

⏳ कब तक पूरा होगा देवरिया-कसया फोरलेन?

परियोजना के लिए धन जारी हो चुका है और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार ₹102 करोड़ की पहली किस्त जारी हो चुकी थी। मई 2026 तक सड़क का तकनीकी सर्वे और पटनवा पुल का निर्माण कार्य भी आगे बढ़ चुका था। हालांकि 10 अगस्त 2026 तक उपलब्ध सूचनाओं में इस पूरे 31.5 किमी फोरलेन की निश्चित अंतिम completion date का स्पष्ट आधिकारिक ऐलान नहीं मिला है।

इसलिए फिलहाल इसे “फलां तारीख तक सड़क पूरी हो जाएगी” कहने के बजाय निर्माण प्रक्रिया में बताना ज्यादा सटीक होगा।

📈 रियल एस्टेट और कारोबार पर भी पड़ेगा असर

बड़े सड़क प्रोजेक्ट का असर सिर्फ यात्रा पर नहीं होता। देवरिया-कसया फोरलेन के साथ आसपास के इलाकों में:

  • जमीन की मांग बढ़ सकती है
  • वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां बढ़ सकती हैं
  • होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को फायदा मिल सकता है
  • कुशीनगर पर्यटन को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी
  • छोटे-बड़े व्यापारिक केंद्र विकसित हो सकते हैं
  • देवरिया और कुशीनगर के बीच आवागमन तेज होगा
  • गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए नए निवेश अवसर पैदा हो सकते हैं

हालांकि केवल एक्सप्रेसवे या फोरलेन बनने की खबर के आधार पर किसी जमीन की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए।

🏁 निष्कर्ष: पूर्वांचल में बन रहा है नया हाई-स्पीड रोड नेटवर्क

देवरिया-कसया फोरलेन की ₹292.06 करोड़ की परियोजना स्थानीय सड़क सुधार से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह देवरिया को कुशीनगर और आगे के बड़े रोड नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनेगी।

इसके साथ ₹7,283.28 करोड़ का 91.352 किमी गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पहले ही गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ चुका है।

भविष्य में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे इस नेटवर्क को बिहार और पश्चिम बंगाल तक विस्तार देने की क्षमता रखता है।

इसलिए आने वाले वर्षों में पूर्वांचल का रोड मैप कुछ ऐसा दिखाई दे सकता है—

लखनऊ → पूर्वांचल एक्सप्रेसवे → गोरखपुर → कुशीनगर → बिहार → सिलीगुड़ी

और इसके साथ देवरिया-कसया फोरलेन देवरिया को इस बड़े नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क साबित हो सकती है।

सबसे जरूरी बात: “गोरखपुर से लखनऊ सिर्फ 3 घंटे” एक आकर्षक संभावित यात्रा समय है, लेकिन इसे अभी आधिकारिक गारंटी के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए। मौजूदा आधिकारिक जानकारी गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की 91.352 किमी लंबाई और ₹7,283.28 करोड़ लागत की पुष्टि करती है, जबकि देवरिया-कसया फोरलेन की 31.5 किमी लंबाई और ₹292.06 करोड़ लागत सरकारी/विश्वसनीय रिपोर्टों से पुष्ट है।