education

छात्र आत्महत्या पर सरकार का बड़ा फोकस, स्कूल से IIT तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता मजबूत करने की तैयारी; जानिए क्या कदम उठाए गए

केंद्र सरकार ने छात्र आत्महत्या की समस्या से निपटने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग, एंटी-रैगिंग व्यवस्था और शुरुआती स्तर पर संकट की पहचान को मजबूत करने पर जोर दिया है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार MANODARPAN, UGC की गाइडलाइंस, कैंपस काउंसलिंग सेंटर, Tele-MANAS और National Mental Health Programme जैसी पहल छात्रों को समय पर मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

Anshuman Mishra10 अग. 2026, 06:00 PM IST
खबर शेयर करें:
छात्र आत्महत्या पर सरकार का बड़ा फोकस, स्कूल से IIT तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता मजबूत करने की तैयारी; जानिए क्या कदम उठाए गए


नई दिल्ली: देश में छात्रों की आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को लेकर केंद्र सरकार ने बहुस्तरीय व्यवस्था पर जोर दिया है। शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में बताया है कि छात्रों की आत्महत्या के मामलों को समझने के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB के Accidental Deaths & Suicides in India यानी ADSI रिपोर्टों में वर्ष, राज्य, लिंग और आयु वर्ग के आधार पर आंकड़े उपलब्ध हैं। सरकार के अनुसार छात्रों की आत्महत्या के पीछे करियर और पेशे से जुड़ी समस्याएं, अकेलेपन की भावना, दुर्व्यवहार, हिंसा, पारिवारिक समस्याएं, मानसिक विकार, शराब की लत, आर्थिक नुकसान और लंबे समय तक रहने वाला दर्द जैसे कई कारण हो सकते हैं।


इस मुद्दे को केवल शिक्षा या परीक्षा से जुड़ी समस्या मानने के बजाय सरकार अब मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक दबाव, सामाजिक परिस्थितियों, भेदभाव, रैगिंग, वित्तीय तनाव और संस्थागत सहायता को एक साथ जोड़कर देख रही है। इसी दिशा में स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, शिकायत निवारण, एंटी-रैगिंग व्यवस्था और शुरुआती स्तर पर संकट की पहचान जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है।


छात्र आत्महत्या का मुद्दा इतना गंभीर क्यों है

छात्र जीवन को अक्सर पढ़ाई, परीक्षा और करियर बनाने के दौर के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसी अवधि में कई युवा सामाजिक अलगाव, परिवार से दूरी, आर्थिक दबाव, असफलता का डर, प्रतिस्पर्धा, करियर की अनिश्चितता, भेदभाव या संस्थागत समस्याओं का सामना कर सकते हैं। सरकार की ताजा जानकारी भी इस बात की ओर इशारा करती है कि आत्महत्या का कोई एक कारण नहीं होता। NCRB के आंकड़ों में अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़े कारण सामने आते हैं। इसलिए किसी एक परीक्षा, एक संस्थान या केवल अकादमिक प्रदर्शन को पूरे मुद्दे की व्याख्या मानना उचित नहीं होगा। यही वजह है कि छात्र मानसिक स्वास्थ्य को अब केवल व्यक्तिगत समस्या के रूप में नहीं बल्कि संस्थागत और सार्वजनिक नीति के विषय के रूप में भी देखा जा रहा है।


NCRB के आंकड़े क्या बताते हैं

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो पुलिस में दर्ज आत्महत्या के मामलों के आधार पर आंकड़े एकत्र करता है और इन्हें Accidental Deaths & Suicides in India यानी ADSI रिपोर्टों में प्रकाशित करता है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इन्हीं रिपोर्टों में छात्रों की आत्महत्या से जुड़े वर्षवार, राज्यवार, लिंगवार और आयु वर्गवार विवरण उपलब्ध हैं। यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि NCRB का डेटा पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित होता है। इसलिए इसे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की पूरी तस्वीर मानने के बजाय दर्ज मामलों का आधिकारिक रिकॉर्ड समझना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी हो सकता है जो आत्महत्या के आंकड़ों में दिखाई नहीं देता, जैसे लंबे समय तक तनाव, अवसाद, चिंता, अकेलापन या मदद लेने में झिझक।


सरकार ने स्कूल स्तर पर क्या कदम उठाए

केंद्र सरकार की पहल MANODARPAN छात्रों, शिक्षकों और परिवारों को मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा सहयोग देने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत प्रशिक्षित काउंसलरों के माध्यम से राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन पर मार्गदर्शन, Sahyog नाम से लाइव इंटरैक्टिव सत्र और Paricharcha नाम से वेबिनार आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है और इन्हें PM e-Vidya चैनलों तथा NCERT Official YouTube चैनल के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जाता है।


CBSE से संबद्ध माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में Counsellor और Wellness Teacher की नियुक्ति का प्रावधान उसके affiliation bye-laws में शामिल है। वहीं जवाहर नवोदय विद्यालयों में प्रत्येक JNV में एक पुरुष और एक महिला काउंसलर रखने का प्रावधान है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार फरवरी 2026 तक देशभर के JNVs में 830 काउंसलर संविदा आधार पर लगाए जा चुके थे। केंद्रीय विद्यालयों में भी काउंसलरों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं। इसका संभावित लाभ यह है कि समस्या गंभीर होने के बाद सहायता देने के बजाय स्कूल स्तर पर ही तनाव, व्यवहार में बदलाव और भावनात्मक परेशानी को पहचानने की संभावना बढ़ सकती है।


कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी बढ़ाया गया फोकस

उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अलग से कई दिशानिर्देश और व्यवस्थाएं विकसित की हैं। UGC ने जनवरी 2023 में उच्च शिक्षण संस्थानों को National Suicide Prevention Strategy उपलब्ध कराई थी। इसके बाद अप्रैल 2023 में जारी दिशा-निर्देशों में छात्रों की शारीरिक फिटनेस और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ अकादमिक दबाव, peer pressure, व्यवहार संबंधी समस्याओं, तनाव, करियर संबंधी चिंताओं और अवसाद जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सुरक्षा उपायों और सहयोगी माहौल पर जोर दिया गया।


UGC की आधिकारिक guidelines भी कहती हैं कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की psychological और emotional well-being के लिए support centres और career counselling जैसी सहायता उपलब्ध होनी चाहिए। साथ ही academic pressure, peer pressure, stress, career concerns और depression जैसी समस्याओं के खिलाफ संस्थागत safeguards विकसित करने पर जोर दिया गया है। 2023 में जारी UGC की छात्र शिकायत निवारण व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। UGC की Student Grievance Redressal Regulations 2023 उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की शिकायतों के लिए संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा हैं।


रैगिंग और मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध

छात्रों की मानसिक स्थिति पर रैगिंग का प्रभाव भी गंभीर हो सकता है। UGC के anti-ragging regulations में ऐसे व्यवहार को रोकने की व्यवस्था है जो छात्रों को मानसिक नुकसान, भय, शर्मिंदगी या मनोवैज्ञानिक परेशानी की स्थिति में डाल सकता है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार UGC ने anti-ragging outreach अभियान को भी व्यापक बनाया है। आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 21 भाषाओं में वीडियो, बैनर और अन्य जागरूकता सामग्री जारी की जा रही है। इसके अलावा 24x7 National Anti-Ragging Helpline, संस्थानों में workshops और seminars, prospectus में रैगिंग के गंभीर परिणामों की जानकारी तथा छात्रों और अभिभावकों से हर वर्ष online undertaking जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। इसका उद्देश्य केवल रैगिंग की घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं बल्कि ऐसा संस्थागत माहौल बनाना है जिसमें छात्र बिना डर के शिकायत कर सकें। 


उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए 2023 का बड़ा mental well-being framework

शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2023 में Higher Education Institutions में छात्रों के emotional और mental well-being को लेकर framework guidelines भी साझा की थीं। इनमें counselling services, distress की शुरुआती पहचान, suicide prevention के लिए Standard Operating Procedures, student support networks, grievance redressal को मजबूत करना और संस्थागत व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा जैसे उपाय शामिल हैं। इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य की समस्या में शुरुआती पहचान बहुत महत्वपूर्ण होती है। यदि छात्र के व्यवहार में गंभीर बदलाव, लगातार तनाव, सामाजिक अलगाव या पढ़ाई से जुड़ी परेशानी को शुरुआती स्तर पर पहचाना जाए तो उसे professional support तक पहुंचाने की संभावना बढ़ सकती है।


कोचिंग संस्थानों पर भी सरकार का ध्यान

छात्रों पर बढ़ते academic pressure को देखते हुए जनवरी 2024 में Coaching Centres के लिए guidelines भी जारी की गईं। इनमें counselling facilities, transparent fee structure, batch segregation पर रोक और ऐसे तौर-तरीकों से सुरक्षा जैसे student-support measures शामिल हैं जो academic pressure को बढ़ा सकते हैं।

यह कदम खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि competitive examinations की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए coaching environment भी उनके दैनिक जीवन का बड़ा हिस्सा बन सकता है। इसलिए mental well-being को केवल स्कूल या कॉलेज परिसर तक सीमित रखने के बजाय coaching ecosystem में भी शामिल करना जरूरी माना जा रहा है।

IIT, IIM, NIT और IIIT में क्या व्यवस्था है


शिक्षा मंत्रालय के अनुसार सभी IITs, IIMs, NITs और IIITs में dedicated mental health या counselling centres स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में full-time या visiting professional counsellors, clinical psychologists और कुछ मामलों में psychiatrists भी उपलब्ध हैं। कई संस्थानों में mental health awareness और training sessions आयोजित किए जाते हैं, जिनमें stress management, coping strategies और mental health problems के संकेत पहचानने जैसे विषय शामिल होते हैं। IIT Kharagpur ने SETU यानी Support, Empathy, Transformation & Upliftment framework लागू किया है, जिसका उद्देश्य केवल संकट के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं बल्कि preventive और round-the-clock support व्यवस्था विकसित करना है। IIT Madras, IIT Delhi, IIT Guwahati, IIT Gandhinagar और IIT Roorkee में Mental Wellness और Stress Management पर workshops भी आयोजित किए गए हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे counselling को केवल emergency service के बजाय campus well-being system का हिस्सा बनाने की कोशिश दिखाई देती है।


National Task Force क्यों महत्वपूर्ण है

छात्र आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर 24 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद National Task Force का गठन किया गया। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश Justice S. Ravindra Bhat कर रहे हैं। Task Force में psychiatry, gender, disability और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। Task Force का उद्देश्य छात्रों की आत्महत्या के पीछे प्रमुख कारणों की पहचान करना, मौजूदा कानूनों और संस्थागत व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता का आकलन करना और सुरक्षा तथा रोकथाम की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुधार सुझाना है। इसके दायरे में academic pressure के साथ-साथ caste-based discrimination, gender discrimination, sexual harassment, financial burden, mental health stigma, disability और अन्य प्रकार के भेदभाव जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। इस Task Force ने 2026 में अपना Interim Report भी उपलब्ध कराया है। आधिकारिक वेबसाइट पर रिपोर्ट 8 जून 2026 को प्रकाशित की गई है। इससे साफ है कि सरकार और न्यायपालिका छात्र आत्महत्या को केवल individual घटना के तौर पर नहीं बल्कि व्यापक institutional और social factors से जुड़े विषय के रूप में देख रहे हैं।


मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर तक पहुंचाने की कोशिश

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का समाधान केवल educational institutions में counselling से नहीं हो सकता। गंभीर मामलों में professional medical और psychiatric care की जरूरत पड़ सकती है। इसीलिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय National Mental Health Programme लागू कर रहा है। इसके तहत Community Health Centres और Primary Health Centres के स्तर पर outpatient services, assessment, counselling और psychosocial interventions, continuing care, दवाएं, outreach और ambulance जैसी सेवाएं शामिल हैं। सरकार के अनुसार देश में 1.81 लाख से अधिक Sub Health Centres और Primary Health Centres को Ayushman Arogya Mandirs में upgrade किया जा चुका है और Comprehensive Primary Health Care के तहत इन केंद्रों में mental health services को भी शामिल किया गया है।


Tele-MANAS से दूर बैठे छात्रों को भी मदद की उम्मीद

Mental health services को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए National Tele Mental Health Programme 2022 में शुरू किया गया था।

शिक्षा मंत्रालय को दी गई ताजा जानकारी के अनुसार 6 अगस्त 2026 तक 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 53 Tele-MANAS Cells स्थापित किए जा चुके थे और हेल्पलाइन पर 43.25 लाख से अधिक calls handle की जा चुकी थीं। Tele-MANAS Mobile Application भी शुरू की गई है और audio calling के अलावा video consultation facility भी जोड़ी गई है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा संभावित फायदा यह है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता केवल बड़े शहरों या बड़े अस्पतालों तक सीमित न रहकर दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंच सकती है।


क्या इन कदमों से समस्या खत्म हो जाएगी

सरकार द्वारा उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केवल हेल्पलाइन, counsellor या guidelines होने से छात्र आत्महत्या की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी।

सबसे बड़ी चुनौती implementation की है। किसी संस्थान में counsellor की नियुक्ति होना और छात्रों का उस counsellor तक बिना डर या stigma के पहुंच पाना दो अलग बातें हैं। इसी तरह guidelines जारी होना और उनका नियमित रूप से पालन होना भी अलग-अलग विषय हैं।


National Task Force की प्रक्रिया भी इसी कारण महत्वपूर्ण है। Task Force ने अपनी प्रक्रिया में students, parents, faculty, mental health professionals और institutions से inputs जुटाए हैं तथा academic pressure, discrimination, financial hardship और institutional support जैसे कई determinants को साथ में देखने का प्रयास किया है। इसलिए आगे की नीति में केवल counselling की संख्या बढ़ाने के बजाय यह देखना जरूरी होगा कि छात्रों को कितनी आसानी से सहायता मिलती है, कितने मामलों की शुरुआती पहचान होती है, शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और संस्थान अपने mental-health protocols की समीक्षा कितनी नियमितता से करते हैं।


छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है

इस पूरी पहल का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि मानसिक स्वास्थ्य को पढ़ाई या करियर की सफलता से अलग नहीं किया जा सकता। छात्र के प्रदर्शन में अचानक गिरावट, लगातार तनाव, सामाजिक दूरी, व्यवहार में बड़ा बदलाव या लगातार भावनात्मक परेशानी जैसे संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर बातचीत और professional help की ओर कदम बढ़ाना जरूरी है। अभिभावकों के लिए भी यह समझना जरूरी है कि हर academic setback को असफलता की तरह देखना छात्र पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। वहीं संस्थानों की जिम्मेदारी है कि counselling और grievance mechanisms ऐसी हों जिनका इस्तेमाल छात्र बिना stigma और retaliation के डर के कर सकें।


सबसे बड़ा लाभ क्या हो सकता है

यदि इन व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो इसके कई स्तरों पर लाभ हो सकते हैं। पहला, छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और मदद मांगने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। दूसरा, distress की शुरुआती पहचान होने से गंभीर स्थिति बनने से पहले intervention संभव हो सकता है। तीसरा, counselling, grievance redressal और anti-ragging mechanisms के मजबूत होने से campus environment अधिक सुरक्षित और supportive बनाया जा सकता है।

चौथा, Tele-MANAS जैसी सेवाएं उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं जिनके आसपास विशेषज्ञ mental-health services उपलब्ध नहीं हैं। पांचवां, National Task Force जैसी पहल के माध्यम से अलग-अलग संस्थानों और राज्यों में मौजूद समस्याओं तथा व्यवस्थाओं की तुलना करके ज्यादा evidence-based policies तैयार करने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन असली सफलता का पैमाना केवल कितने counsellors नियुक्त हुए या कितनी calls received हुईं नहीं होगा। असली सफलता तब मानी जाएगी जब जरूरत में मौजूद छात्र समय पर मदद ले सके, संस्थान उसके संकेतों को पहचान सके और academic या सामाजिक संकट के समय उसे अकेला न छोड़ा जाए।


सरकार की ताजा पहल का व्यापक संदेश

10 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी गई जानकारी से यह स्पष्ट है कि छात्र आत्महत्या को लेकर सरकार का दृष्टिकोण अब कई स्तरों पर काम करने वाला है। स्कूलों में MANODARPAN और counsellors से लेकर विश्वविद्यालयों में mental-health centres, UGC guidelines, anti-ragging व्यवस्था, coaching-centre safeguards, IITs और अन्य प्रमुख संस्थानों के wellness programmes तथा स्वास्थ्य मंत्रालय की National Mental Health Programme और Tele-MANAS जैसी सेवाएं इस व्यापक approach का हिस्सा हैं।


अब चुनौती इन सभी व्यवस्थाओं को जमीन पर प्रभावी, भरोसेमंद और आसानी से उपलब्ध बनाने की है। छात्र मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का समाधान केवल एक मंत्रालय या एक हेल्पलाइन से नहीं होगा। परिवार, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, coaching institutions, health system और समाज—सभी को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना होगा जहां मदद मांगना कमजोरी नहीं बल्कि समय पर उठाया गया जरूरी कदम माना जाए। 


छात्र मानसिक स्वास्थ्य सहायता

National Task Force की आधिकारिक student-support resources में Tele-MANAS के लिए 14416 और 1800-891-4416 तथा MANODARPAN के लिए 8448440632 दिए गए हैं। अगर किसी छात्र को तत्काल खतरा महसूस हो या वह आत्महत्या अथवा self-harm के विचारों से जूझ रहा हो, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत स्थानीय emergency service या mental-health professional से संपर्क करें।