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मथुरा में 9 अगस्त की कार सेवा पर साधु-संतों में मतभेद, प्रशासन ने कार्यक्रम पर लगाई रोक l

मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए 9 अगस्त को कार सेवा के आह्वान को लेकर साधु-संतों के बीच खुला मतभेद सामने आया है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि जन्मभूमि परिसर में किसी कार सेवा या कार्यक्रम की अनुमति नहीं है और जिन संतों ने कार सेवा का ऐलान किया था, उन्होंने भी अपना फैसला वापस ले लिया है। प्रशासन और पुलिस ने अदालतों के आदेशों का हवाला देते हुए विवादित क्षेत्र में किसी नई धार्मिक परंपरा या भीड़ जुटाने पर रोक लगा रखी है।

Kashish Rai11 अग. 2026, 01:38 PM IST
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मथुरा में 9 अगस्त की कार सेवा पर साधु-संतों में मतभेद, प्रशासन ने कार्यक्रम पर लगाई रोक l

श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए 9 अगस्त को प्रस्तावित कार सेवा के आह्वान ने ब्रज के साधु-संतों के बीच मतभेद पैदा कर दिए हैं। चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर सच्चिदानंद महाराज ने गोवर्धन रोड स्थित अपने आश्रम से 9 अगस्त को कार सेवा का आह्वान किया था, जिसके बाद यह मुद्दा सुर्खियों में आ गया। कुछ साधु-संतों ने इस आह्वान का समर्थन किया, तो कई ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक प्रतिबंधों के विपरीत बताया।


श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर में किसी भी प्रकार की कार सेवा संभव नहीं है, क्योंकि शासन-प्रशासन की ओर से वहां किसी कार्यक्रम की अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि जिन साधु-संतों ने कार सेवा का ऐलान किया था, उन्होंने बाद में अपना ऐलान वापस ले लिया है। दिनेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि जन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है और हिंदू समाज को न्यायालय के माध्यम से ही जीत मिलने की उम्मीद है।


इस बीच, जिला प्रशासन और पुलिस ने शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। मथुरा-वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अदालतों की रिट याचिकाओं और आदेशों के तहत श्री कृष्ण जन्मभूमि और आसपास के क्षेत्र में किसी भी नई धार्मिक परंपरा शुरू करने, कार सेवा, शंखनाद या भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रम की अनुमति नहीं है।


पुलिस के अनुसार, 9 अगस्त को कार सेवा के लिए सोशल मीडिया पर पोस्टर और अपीलें वायरल हुईं, जिसके बाद कुछ लोग श्री कृष्ण जन्मभूमि की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे। एसपी सिटी राजीव कुमार ने बताया कि जिन लोगों को कार सेवा के नाम पर जन्मभूमि की तरफ जाते देखा गया, उन्हें रोककर उनके संबंधित थाना क्षेत्रों में वापस भेज दिया गया। आगरा से आई मीरा ठाकुर नामक महिला को भी जन्मभूमि की ओर जाते वक्त पुलिस ने रोककर प्रतिबंधों की जानकारी दी और लौटने को कहा।


प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट की रिट संख्या 4/23 और सुप्रीम कोर्ट की मूल रिट 611/93 के तहत विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि रोकने के निर्देश हैं। इन आदेशों के अनुसार, बिना अनुमति किसी प्रकार की कार सेवा, धार्मिक जमावड़ा या नई परंपरा शुरू करना कानून-व्यवस्था के लिए खतरा माना जाएगा और उस पर रोक लगाई जाएगी।


ब्रज के साधु-संतों में भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं। कुछ संत अदालत के आदेशों और प्रशासनिक प्रतिबंधों का सम्मान करने की बात कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे धार्मिक आंदोलन के रूप में देखते हुए कार सेवा के आह्वान का समर्थन कर रहे थे। बाद में आयोजकों ने कांवड़ यात्रा और सावन मास का हवाला देकर आधिकारिक रूप से 9 अगस्त का कार सेवा कार्यक्रम रद्द करने की घोषणा कर दी। कानून-व्यवस्था के मद्देनज़र प्रशासन ने सभी संबंधित संगठनों और संतों को अदालत के निर्देशों की जानकारी दे दी है और उनसे लिखित रूप में आश्वासन लिया है कि वे किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या बिना अनुमति कार्यक्रम नहीं करेंगे। फिलहाल, श्री कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद पर अंतिम निर्णय न्यायालय से ही अपेक्षित है।