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नदी जोड़ो परियोजना पर बड़ा अपडेट, Ken-Betwa से बुंदेलखंड को सिंचाई और पेयजल का लाभ

केंद्र सरकार के National Perspective Plan के तहत 30 नदी जोड़ो परियोजनाओं की पहचान की गई है। इनमें Ken-Betwa Link Project सबसे प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना से लगभग 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल तथा 103 MW जलविद्युत और 27 MW सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। बुंदेलखंड में पानी की उपलब्धता और कृषि को मजबूत करने के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Anshuman Mishra11 अग. 2026, 01:40 PM IST
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नदी जोड़ो परियोजना पर बड़ा अपडेट, Ken-Betwa से बुंदेलखंड को सिंचाई और पेयजल का लाभ

नई दिल्ली: देश में पानी की कमी वाले इलाकों तक जल पहुंचाने और अलग-अलग नदी बेसिनों के बीच पानी के संतुलित उपयोग की योजना के तहत केंद्र सरकार के National Perspective Plan में 30 Interlinking of Rivers यानी नदी जोड़ो परियोजनाओं की पहचान की गई है। इनमें 16 परियोजनाएं Peninsular Component और 14 Himalayan Component के तहत हैं। National Water Development Agency यानी NWDA को इन परियोजनाओं का काम सौंपा गया है। इन 30 परियोजनाओं में Ken-Betwa Link Project फिलहाल implementation stage में पहुंचने वाली प्राथमिक परियोजना है। करीब 44,605 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड जैसे पानी की कमी वाले क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्धता बढ़ाना है। परियोजना से लगभग 11.88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल, 103 MW जलविद्युत और 27 MW सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।


नदी जोड़ो योजना क्या है

Interlinking of Rivers का मूल विचार ऐसे नदी बेसिनों के बीच पानी स्थानांतरित करना है जहां उपलब्ध जल और जरूरत में अंतर माना जाता है। National Perspective Plan के तहत केंद्र सरकार ने देश की प्रमुख नदियों को जोड़ने के लिए Himalayan और Peninsular दो components में परियोजनाओं की पहचान की है। हालांकि हर परियोजना अपने आप में अलग है और सभी 30 परियोजनाएं निर्माण के चरण में नहीं हैं। कुछ के Pre-Feasibility Report, कुछ के Feasibility Report और कुछ के Detailed Project Report तैयार हो चुके हैं। कई परियोजनाओं में राज्यों के बीच सहमति, पानी की उपलब्धता, पर्यावरणीय पहलुओं और अन्य तकनीकी विषयों पर आगे की प्रक्रिया जरूरी है। 10 अगस्त 2026 की सरकारी जानकारी में 30 परियोजनाओं की अलग-अलग स्थिति दी गई है।


Ken-Betwa Project सबसे महत्वपूर्ण क्यों

Ken-Betwa Link Project मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं में से एक है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार परियोजना को दिसंबर 2021 में लागू करने की मंजूरी दी गई थी और इसकी अनुमानित लागत 44,605 करोड़ रुपये है। फरवरी 2026 की सरकारी जानकारी में इसे National Perspective Plan के तहत implementation stage में पहुंची पहली priority link project बताया गया था।


परियोजना के तहत Ken नदी के पानी को Betwa basin की ओर ले जाने की योजना है। सरकारी योजना के अनुसार इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। नए आंकड़ों के मुताबिक परियोजना से लगभग 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में annual irrigation की योजना है, जिसमें 8.11 लाख हेक्टेयर मध्य प्रदेश और 2.51 लाख हेक्टेयर उत्तर प्रदेश में है। इसके अलावा करीब 62 लाख लोगों के लिए 194 MCM पेयजल उपलब्ध कराने और 103 MW hydropower तथा 27 MW solar power generation का लक्ष्य है।


बुंदेलखंड के लिए क्यों अहम है परियोजना

बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से पानी की कमी और सूखे की समस्या से प्रभावित रहा है। मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन तथा उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जैसे क्षेत्रों को परियोजना से लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। अगर परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार पूरी होती है तो सिंचाई का क्षेत्र बढ़ने से कृषि उत्पादन और किसानों की जल उपलब्धता में सुधार हो सकता है। पेयजल आपूर्ति बढ़ने से ग्रामीण और शहरी आबादी को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।


परियोजना पर काम कहां तक पहुंचा

सरकार के हालिया अपडेट के मुताबिक Ken-Betwa परियोजना में मुख्य Daudhan Dam component का काम 28 नवंबर 2024 को award किया गया था और preliminary work चल रहा है। Land acquisition भी progress में है और submergence area की 100 फीसदी जमीन मध्य प्रदेश के Water Resources Department को transfer की जा चुकी है। परियोजना को लगभग आठ वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, यानी मार्च 2030 तक completion का target है। मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में PRAGATI की 51वीं बैठक में Ken-Betwa Link Project की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने इसे राज्यों के बीच inter-state water issues को आपसी सहमति से हल करने के लिए model project के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।


Polavaram-Krishna Link भी महत्वपूर्ण

नदी जोड़ो कार्यक्रम के अलावा Andhra Pradesh का Polavaram Irrigation Project भी महत्वपूर्ण है, जिसमें Godavari-Polavaram से Krishna-Vijayawada link शामिल है। सरकार के अनुसार इससे करीब 7.2 लाख acres में सिंचाई और Godavari तथा Krishna delta systems में 23.5 लाख acres की irrigation stabilization का लक्ष्य है। परियोजना के तहत 80 TMC Godavari water को Krishna basin की ओर divert करने, Visakhapatnam समेत drinking और industrial water supply तथा करीब 28.5 लाख लोगों को घरेलू पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। परियोजना से 960 MW hydropower generation भी प्रस्तावित है। इस project को अब तक 20,658 करोड़ रुपये की cumulative Central Assistance मिल चुकी है।


बाकी नदी जोड़ो परियोजनाओं की क्या स्थिति है

सरकार की 10 अगस्त की सूची के अनुसार Peninsular Component में कई परियोजनाओं के Feasibility Reports या DPR तैयार हो चुके हैं। Mahanadi-Godavari link का Feasibility Report पूरा है। Godavari-Krishna के विभिन्न links में भी FR और DPR का काम पूरा हो चुका है। Krishna-Pennar, Krishna-Srisailam-Pennar, Krishna-Almatti-Pennar, Pennar-Cauvery और Cauvery-Vaigai-Gundar जैसी परियोजनाएं भी अलग-अलग planning stages में हैं।


Parbati-Kalisindh-Chambal link के modified version के implementation के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच Memorandum of Agreement पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। वहीं Maharashtra से जुड़ी Damanganga-Pinjal और Gujarat-Maharashtra की Par-Tapi-Narmada link परियोजनाओं के DPR तैयार होने के बावजूद उन्हें priority links की स्थिति से हटा दिया गया है। Himalayan Component में भी कई परियोजनाओं के Feasibility Reports और DPR तैयार हैं। Kosi-Ghaghra, Gandak-Ganga, Ghaghra-Yamuna, Sarda-Yamuna, Yamuna-Rajasthan और Rajasthan-Sabarmati जैसे links अलग-अलग planning stages में हैं। Kosi-Mechi inter-state link का proposal international dimensions के कारण drop किया गया, जबकि बिहार सरकार के अनुरोध पर intra-state Kosi-Mechi link का अध्ययन किया गया और DPR राज्य सरकार को सौंपा गया।


पर्यावरण पर कितना ध्यान

नदी जोड़ो परियोजनाओं का सबसे संवेदनशील पहलू environmental impact है। सरकार के अनुसार प्रत्येक ILR project की Feasibility Report और Detailed Project Report की तैयारी में Environmental Impact Assessment यानी EIA शामिल किया जाता है। इसमें environmental और socio-economic impacts का आकलन किया जाता है।


Ken-Betwa के लिए comprehensive EIA के साथ Integrated Landscape Management Plan तैयार किया गया है। इसमें catchment area treatment, ecological management, biodiversity conservation, command-area development और environmental parameters की long-term monitoring जैसे उपाय शामिल हैं।

Panna Tiger Reserve को लेकर भी विशेष environmental safeguards विकसित किए गए हैं। सरकार ने Greater Panna Landscape के लिए Integrated Landscape Management Plan तैयार किया है, जिसका उद्देश्य project implementation के साथ wildlife और biodiversity conservation को जोड़ना है। इसमें tiger, vulture और gharial जैसी species के habitat और landscape conservation पर भी ध्यान दिया गया है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Ken-Betwa project के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर पहले विशेषज्ञ और statutory authorities के स्तर पर भी concerns उठे थे। परियोजना को environmental और wildlife clearances निर्धारित शर्तों के साथ मिली हैं और बाद में mitigation तथा landscape-management measures को project framework में शामिल किया गया।


स्थानीय लोगों के लिए क्या होगा

बड़े जल परियोजनाओं में केवल पानी और infrastructure ही नहीं, बल्कि जमीन, विस्थापन और rehabilitation भी महत्वपूर्ण विषय होते हैं। सरकार के अनुसार सभी ILR projects में Land Acquisition और Rehabilitation & Resettlement components को sanctioned project structure का हिस्सा बनाया गया है और परियोजनाओं को लागू environmental, forest clearance और R&R provisions के अनुसार आगे बढ़ाया जाना है। Ken-Betwa में भी land acquisition और rehabilitation को project implementation का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। सरकार ने project-affected families के R&R की monitoring के लिए institutional mechanisms पर भी काम किया है।


नदी जोड़ो परियोजनाओं से क्या फायदे हो सकते हैं

इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा संभावित फायदा water security है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की कमी है, वहां अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने से कृषि और घरेलू जल आपूर्ति को मजबूती मिल सकती है। दूसरा फायदा drought-prone क्षेत्रों में खेती की vulnerability कम करना हो सकता है। नियमित सिंचाई उपलब्ध होने पर किसानों की वर्षा पर निर्भरता घट सकती है। तीसरा फायदा drinking water supply से जुड़ा है। Ken-Betwa के मामले में करीब 62 लाख लोगों को पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। चौथा फायदा renewable और hydropower generation है। Ken-Betwa में 103 MW hydropower और 27 MW solar power generation का लक्ष्य है।


लेकिन क्या नदी जोड़ना हर समस्या का समाधान है

नदी जोड़ो परियोजनाओं को लेकर यह समझना जरूरी है कि हर नदी को दूसरी नदी से जोड़ना अपने आप में जल संकट का स्थायी समाधान नहीं है। किसी भी परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि संबंधित basin में वास्तविक surplus water कितना है, downstream ecological requirements क्या हैं, rainfall और climate variability कैसी है और पानी के उपयोग तथा वितरण का management कितना प्रभावी है।


इसीलिए सरकार ने ILR programme में technical, environmental, social और water-sharing aspects को review करने के लिए Special Committee for Interlinking of Rivers, NWDA Governing Body और Task Force for Interlinking of Rivers जैसे institutional mechanisms बनाए हैं। राज्यों से भी reports पर comments लिए जाते हैं। यानी किसी project का DPR तैयार होना और उसका construction शुरू होना दो अलग-अलग चरण हैं। 10 अगस्त 2026 की सरकारी सूची भी दिखाती है कि 30 projects में कई अभी feasibility या DPR stage पर हैं, कुछ proposals drop हो चुके हैं और केवल सीमित projects implementation stage तक पहुंचे हैं।


भारत के जल भविष्य के लिए इसका क्या महत्व

जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून, बढ़ती आबादी, urbanisation और कृषि की पानी की मांग को देखते हुए भारत के लिए water management आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने वाला है। ऐसे में नदी जोड़ो कार्यक्रम के साथ-साथ groundwater recharge, watershed management, rainwater harvesting, efficient irrigation, wastewater reuse और existing irrigation systems की efficiency बढ़ाना भी जरूरी होगा। Ken-Betwa Project इस पूरी नीति का एक बड़ा test case बन चुका है। यदि परियोजना निर्धारित समय, लागत, environmental safeguards और rehabilitation commitments के साथ पूरी होती है और बुंदेलखंड में वास्तविक water security सुधारती है, तो यह भविष्य की inter-basin water transfer projects के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।


फिलहाल तस्वीर यह है कि National Perspective Plan के तहत 30 river-link projects की पहचान की गई है, लेकिन सभी परियोजनाएं निर्माणाधीन नहीं हैं। Ken-Betwa Link Project सबसे आगे है और सरकार इसे बुंदेलखंड की water security के साथ environmental management और inter-state cooperation के मॉडल के रूप में आगे बढ़ा रही है। अंतिम चुनौती यही होगी कि देश को अधिक पानी उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, biodiversity, स्थानीय समुदायों और project-affected families के हितों का संतुलन भी कायम रखा जाए।