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World Lion Day: भारत में एशियाई शेरों की दहाड़ मजबूत, 10 साल में आबादी बढ़ी

विश्व शेर दिवस 2026 पर भारत के लिए बड़ी conservation success सामने आई है। एशियाई शेरों की आबादी 2015 में 523 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है। सरकार के अनुसार Project Lion के तहत habitat protection, disease monitoring, veterinary support, scientific tracking और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। शेरों का habitat range भी 2020 के करीब 30,000 वर्ग किमी से बढ़कर लगभग 35,000 वर्ग किमी हो गया है।

Anshuman Mishra11 अग. 2026, 01:40 PM IST
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World Lion Day: भारत में एशियाई शेरों की दहाड़ मजबूत, 10 साल में आबादी बढ़ी


नई दिल्ली:  विश्व शेर दिवस के मौके पर भारत के लिए वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी बड़ी उपलब्धि सामने आई है। गुजरात के गिर और Greater Gir Landscape में एशियाई शेरों की आबादी 2015 में 523 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है। यानी एक दशक में आबादी में 70 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार यह उपलब्धि वन अधिकारियों, संरक्षणवादियों, स्थानीय समुदायों और शेरों के habitat की सुरक्षा में जुटे लोगों के लगातार प्रयासों का परिणाम है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2020 में एशियाई शेरों की संख्या 674 थी, जो 2025 में 891 तक पहुंची। 2025 का आंकड़ा गुजरात में हुए 16वें Lion Population Estimation पर आधारित है।


भारत के लिए क्यों खास है एशियाई शेर

एशियाई शेर भारत की सबसे महत्वपूर्ण और दुर्लभ बड़ी बिल्ली प्रजातियों में शामिल है। आज जंगली एशियाई शेरों की एकमात्र आबादी भारत के Greater Gir Landscape में मौजूद है। इसलिए इन शेरों का संरक्षण केवल गुजरात या भारत की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वैश्विक जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। सरकार के अनुसार शेर apex predator होने के कारण herbivore populations को नियंत्रित करने, ecosystem balance बनाए रखने और biodiversity को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


एशियाई शेर को Wildlife Protection Act, 1972 की Schedule I में उच्चतम कानूनी संरक्षण प्राप्त है और यह CITES Appendix I में भी सूचीबद्ध है। शेरों की संख्या बढ़ने की कहानी एशियाई शेरों की आबादी 2010 में 411, 2015 में 523 और 2020 में 674 थी। 2025 में यह संख्या 891 तक पहुंच गई। सरकार ने इसे लंबे समय से चल रहे habitat protection और conservation efforts की सफलता से जोड़ा है।


2025 की Lion Population Estimation में केवल संख्या बढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार शेरों ने अपने पारंपरिक core habitat से बाहर कई satellite populations भी स्थापित की हैं। Barda Wildlife Sanctuary में एक नई satellite population सामने आई है, जिसे शेरों के लिए गुजरात में दूसरे home के रूप में विकसित होने वाली महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। इसके अलावा Jetpur, Babra-Jasdan और corridor areas में भी नई populations दर्ज की गईं। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि किसी एक इलाके में पूरी आबादी का केंद्रित रहना किसी बड़े रोग, प्राकृतिक आपदा या अन्य ecological threat की स्थिति में जोखिम बढ़ा सकता है। अलग-अलग क्षेत्रों में population का फैलाव species की long-term resilience को मजबूत करने में मदद कर सकता है।


Project Lion ने क्या बदला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को Project Lion की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य केवल शेरों की संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि पूरे lion landscape को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित करना है। Project Lion के तहत habitat enhancement, disease monitoring, veterinary support, scientific population tracking, technology-based interventions, biodiversity protection और local communities की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार 2020 के आसपास लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर का lion range अब करीब 35,000 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है। इस विस्तार का अर्थ केवल शेरों के लिए अधिक क्षेत्र उपलब्ध होना नहीं है। इससे wildlife corridors, prey base और habitat connectivity को बनाए रखने की जरूरत भी बढ़ती है।


स्थानीय समुदायों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण

गिर और Greater Gir landscape में conservation केवल forest department के प्रयासों से संभव नहीं हुआ है। स्थानीय समुदायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। सरकार ने लगातार conservation model में community participation और coexistence को प्रमुख तत्व माना है। शेरों की आबादी बढ़ने के साथ उनका मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों के आसपास जाना भी बढ़ सकता है। ऐसे में wildlife movement की जानकारी, rapid response, veterinary support और स्थानीय लोगों में awareness मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जरूरी हैं। सरकार ने इसके लिए Vanya PraniMitras और trackers को भी लगाया है, जो आसपास के लोगों को wildlife movement के बारे में जागरूक करने में मदद करते हैं। साथ ही grassland restoration, prey-base augmentation और habitat improvement पर भी काम किया जा रहा है।


बढ़ती आबादी के साथ नई चुनौतियां भी

शेरों की संख्या बढ़ना निश्चित रूप से बड़ी conservation success है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आती हैं। सबसे बड़ी जरूरत habitat को सुरक्षित रखने, wildlife corridors बनाए रखने और human-wildlife conflict को नियंत्रित करने की है। दूसरी महत्वपूर्ण चुनौती disease management है। क्योंकि एशियाई शेरों की जंगली आबादी अभी भी एक ही प्रमुख landscape में केंद्रित है, किसी संक्रामक बीमारी का व्यापक असर गंभीर हो सकता है। इसी कारण Project Lion में disease monitoring और veterinary support को विशेष महत्व दिया गया है। भारत सरकार के Project Lion framework में disease diagnostics और treatment को मजबूत करने तथा Gir landscape को big-cat disease knowledge के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य भी शामिल है।


पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा

शेरों के संरक्षण का असर wildlife tourism पर भी पड़ता है। Gir और आसपास के क्षेत्रों में wildlife tourism स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण गतिविधि बन चुका है। गुजरात सरकार के अनुसार Barda landscape में भी lion conservation के साथ ecotourism potential विकसित किया जा रहा है।

हालांकि tourism का विस्तार तभी टिकाऊ होगा जब पर्यटकों की संख्या, safari routes और infrastructure को wildlife carrying capacity के अनुसार नियंत्रित किया जाए। conservation और tourism के बीच संतुलन बनाए रखना लंबे समय के लिए जरूरी होगा।


क्यों महत्वपूर्ण है 523 से 891 का सफर

2015 में 523 से 2025 में 891 तक पहुंचना केवल 368 शेरों की वृद्धि नहीं है। यह भारत में एक endangered big cat species को बचाने के लिए लंबे समय से चल रहे habitat protection, scientific monitoring, veterinary care, community participation और government conservation programmes के संयुक्त प्रभाव का संकेत है।

लेकिन इस उपलब्धि को अंतिम मंजिल नहीं माना जा सकता। एशियाई शेर की वैश्विक स्थिति अभी भी संवेदनशील है और इसकी पूरी wild population एक ही देश तथा मुख्य landscape से जुड़ी है। इसलिए आने वाले वर्षों में population growth के साथ genetic diversity, disease preparedness, habitat connectivity, satellite populations और human-wildlife coexistence पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।


विश्व शेर दिवस का संदेश

10 अगस्त को मनाया जाने वाला World Lion Day दुनिया भर में शेरों के संरक्षण और उनके सामने मौजूद खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। भारत के लिए इस वर्ष का संदेश खास तौर पर महत्वपूर्ण है—एशियाई शेरों की आबादी 891 तक पहुंच चुकी है, लेकिन संरक्षण की जिम्मेदारी अब और बड़ी हो गई है।

भारत की चुनौती अब केवल शेरों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित और connected landscape तैयार करना है जहां शेर, जंगल, prey species और स्थानीय समुदाय लंबे समय तक साथ रह सकें। यही कारण है कि 523 से 891 तक का सफर भारत की conservation success story जरूर है, लेकिन इसकी अगली परीक्षा इस बात से होगी कि बढ़ती lion population को सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ habitat कैसे उपलब्ध कराया जाता है।