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Old Monk-McDowell’s पर FSSAI का शिकंजा! Bombay HC में पहुंचा मामला, निर्माता बोला- रोजाना ₹1 करोड़ का नुकसान
देश की सबसे चर्चित रम ब्रांड्स में शामिल Old Monk और McDowell’s No. 1 Celebration Matured Rum को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। FSSAI की regulatory कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 10 अगस्त को सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने खाद्य नियामक से जवाब मांगा है। सबसे बड़ा दावा Old Monk के निर्माता की ओर से सामने आया, जिसने कार्रवाई के चलते करीब ₹1 करोड़ रोजाना नुकसान होने की बात अदालत के सामने रखी।

मुंबई:
देश में लोकप्रिय Old Monk और McDowell’s No. 1 Celebration Matured Rum से जुड़े एक महत्वपूर्ण regulatory विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) से जवाब मांगा है। सोमवार, 10 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई में अदालत ने FSSAI को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 24 अगस्त तक का समय दिया। फिलहाल कोर्ट ने शराब निर्माताओं को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। यह मामला इसलिए खास है क्योंकि इसे केवल Old Monk या McDowell’s की बिक्री पर कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जा रहा। विवाद alcoholic beverages में flavouring substances के इस्तेमाल, manufacturing standards, product classification और labelling से जुड़े नियमों की व्याख्या को लेकर है। यदि FSSAI की regulatory interpretation कायम रहती है, तो इसका असर समान manufacturing practices अपनाने वाले दूसरे liquor manufacturers पर भी पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
FSSAI ने कुछ alcoholic beverage products के निर्माण और fresh stocks की बिक्री के खिलाफ regulatory कार्रवाई की। इसके बाद संबंधित निर्माताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और FSSAI के आदेशों को चुनौती दी। Old Monk के निर्माता Mohan Rocky Springwater Breweries और McDowell’s से जुड़े United Spirits ने अपनी-अपनी याचिकाओं के जरिए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। 10 अगस्त की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई, जिसमें Acting Chief Justice Ravindra V. Ghuge और Justice Gautam A. Ankhad शामिल हैं। अदालत ने तत्काल अंतरिम राहत देने के बजाय FSSAI को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
निर्माता ने कहा- रोजाना करीब ₹1 करोड़ का नुकसान
सुनवाई के दौरान Old Monk के निर्माता Mohan Rocky Springwater Breweries की ओर से अदालत के सामने दावा किया गया कि FSSAI की कार्रवाई के कारण कंपनी को लगभग ₹1 करोड़ प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। यह आंकड़ा कंपनी की ओर से अदालत में रखा गया दावा है, इसलिए इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन यह दावा बताता है कि regulatory action का संबंधित manufacturer के कारोबार पर कितना बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ने का दावा किया जा रहा है।
कंपनियों का क्या कहना है?
निर्माता कंपनियों की ओर से अदालत में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया है कि संबंधित alcoholic beverages लंबे समय से बाजार में मौजूद हैं और उनके labels तथा products मौजूदा regulatory framework के अनुरूप हैं। United Spirits की ओर से भी यह रुख सामने आया कि संबंधित products की labelling लागू कानूनों और regulations के अनुरूप है। कंपनी ने इस विवाद को केवल एक-दो products का मामला न मानकर पूरे industry के लिए महत्वपूर्ण regulatory concern बताया है।
यही कारण है कि अब अदालत की कार्यवाही का असर केवल Old Monk और McDowell’s तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।
असल विवाद flavouring को लेकर क्या है?
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी शराब में इस्तेमाल होने वाले flavouring substances हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार FSSAI की आपत्ति कुछ alcoholic beverages में artificial या nature-identical flavouring substances के इस्तेमाल को लेकर है। नियामक का सवाल यह है कि क्या निर्धारित category के alcoholic beverages में ऐसे flavouring agents का इस्तेमाल संबंधित food safety standards और prescribed characteristics के अनुरूप है। यानी यह मामला “शराब जहरीली है” या किसी बड़े contamination scandal का मामला नहीं बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर विवाद मुख्य रूप से regulatory compliance, composition, flavouring और labelling standards से जुड़ा है।
FSSAI की आपत्ति क्यों महत्वपूर्ण है?
Alcoholic beverages के लिए FSSAI ने अलग regulatory framework बनाया हुआ है। Food Safety and Standards (Alcoholic Beverages) Regulations, 2018 के साथ समय-समय पर amendments भी किए गए हैं। FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट पर alcoholic beverages से जुड़े regulations में 2020, 2022, 2023 और 2025 के amendments तथा जनवरी 2026 का corrigendum उपलब्ध है। ऐसे में इस मामले में अदालत के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी हो सकता है कि संबंधित products की composition, flavouring और labelling को मौजूदा regulatory standards के तहत किस तरह परखा जाए।
क्या सिर्फ Old Monk और McDowell’s ही निशाने पर हैं?
नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार regulatory action कुछ अन्य popular IMFL products/variants तक भी पहुंचा है। रिपोर्टों में Old Monk और McDowell’s No. 1 Celebration Matured Rum के अलावा Antiquity Blue, Royal Challenge और Bagpiper Deluxe Whisky जैसे products/variants का भी उल्लेख किया गया है।
इसलिए इसे सिर्फ “Old Monk बनाम FSSAI” का मामला समझना अधूरा होगा। यह भारतीय liquor industry में flavouring और product standards को लेकर व्यापक regulatory dispute बन सकता है।
कोर्ट ने अभी क्या फैसला दिया?
10 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले के merits पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत ने FSSAI को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है और फिलहाल manufacturers को interim relief नहीं मिली है। इसका अर्थ यह भी नहीं है कि कोर्ट ने FSSAI की कार्रवाई को अंतिम रूप से सही ठहरा दिया है। अभी अदालत को दोनों पक्षों की दलीलों और regulatory provisions पर विचार करना है।
24 अगस्त को क्या होगा?
अगली महत्वपूर्ण तारीख 24 अगस्त 2026 है। उस दिन FSSAI को अपना जवाब अदालत के सामने रखना है। इसके बाद अदालत manufacturers की मांग पर आगे विचार कर सकती है और यह तय कर सकती है कि संबंधित products को लेकर interim relief दी जाए या नहीं तथा मुख्य petitions पर आगे किस तरह सुनवाई की जाए।
Industry पर पड़ सकता है व्यापक असर
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि अदालत FSSAI की regulatory interpretation को स्वीकार करती है, तो flavouring substances के इस्तेमाल से जुड़े समान products पर भविष्य में regulatory scrutiny बढ़ सकती है। दूसरी तरफ यदि manufacturers की चुनौती सफल होती है, तो industry के लिए मौजूदा manufacturing और labelling practices को लेकर एक महत्वपूर्ण judicial clarification सामने आ सकता है। यानी यह लड़ाई सिर्फ Old Monk या McDowell’s की बिक्री की नहीं है। इसके केंद्र में यह बड़ा सवाल है कि भारतीय alcoholic beverage industry में flavouring, ageing, composition और labelling standards को FSSAI किस तरह लागू कर सकता है।
क्या उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे “जहरीली शराब” या किसी नए health emergency के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। विवाद regulatory compliance से जुड़ा है। उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि specific products और fresh stocks को लेकर regulatory action और पूरे brand पर blanket ban के बीच अंतर समझा जाए। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और अंतिम स्थिति 24 अगस्त की सुनवाई तथा आगे आने वाले न्यायिक आदेशों से स्पष्ट होगी।
Old Monk और McDowell’s से जुड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में देश के alcoholic beverage sector के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। Bombay High Court ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन FSSAI की regulatory कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो चुकी है। अब सबकी नजर 24 अगस्त की सुनवाई पर है, जब FSSAI अपना जवाब दाखिल करेगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत manufacturers को कोई अंतरिम राहत देती है या regulatory action के खिलाफ उनकी चुनौती किस दिशा में आगे बढ़ती है।
