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कल्याण में आवारा कुत्तों का आतंक, दो दिन में 200 से अधिक नागरिकों को काटा
कल्याण-डोंबिवली में आवारा और आक्रामक कुत्तों के हमलों से दो दिनों में 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कल्याण पश्चिम और रेलवे स्टेशन परिसर में हुए इन हमलों के बाद अस्पताल में श्वानदंश के मरीजों की भीड़ बढ़ गई। नगर निगम और पुलिस ने आक्रामक कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया है।
Khushi11 अग. 2026, 06:10 PM IST

ठाणे: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में कल्याण-डोंबिवली नगर निगम क्षेत्र में पिछले दो दिनों के भीतर पागल और आक्रामक आवारा कुत्तों ने 200 से अधिक नागरिकों को काटकर घायल कर दिया है। रविवार दोपहर से कल्याण पश्चिम के संदीप होटल, खड़कपाडा और कल्याण रेलवे स्टेशन परिसर में घूम रहे कुत्तों ने राहगीरों, बच्चों और व्यापारियों को अपना निशाना बनाया।स्थानीय निकाय द्वारा आवारा कुत्तों के बंध्याकरण और रेबीज नियंत्रण अभियानों पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों का शिकार होना जनसुरक्षा और नगर निगम के प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस अप्रत्याशित हमले से पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है और लोग अपने परिवारों तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम संचालित रुक्मिणीबाई अस्पताल के ओपीडी में सोमवार को श्वानदंश से पीड़ित मरीजों की भारी भीड़ देखी गई, जहां हर दस मिनट में कुत्ते के काटने से घायल लोग इलाज के लिए पहुंचते रहे। रविवार को संदीप होटल से खड़कपाड़ा मार्ग के बीच करीब 130 लोग श्वानदंश का शिकार हुए, जबकि सोमवार सुबह से कल्याण स्टेशन परिसर में ही 50 से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा। हमलों में गंभीर रूप से घायल हुई 11 वर्षीय मासूम बच्ची की स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए मुंबई के लोकमान्य तिलक नगर अस्पताल (सियोन अस्पताल) भेजा गया है।कुत्तों के इस जानलेवा हमले का शिकार होने वालों में लातूर के निलंगा से जूते-चप्पल के व्यापार सिलसिले में आए नवाज शेख, छात्रा ज्योति यादव, स्थानीय नागरिक नितिन आमलाणे और सिनेमाघर के पास सब्जी बेचने वाले अक्षयकुमार कुशवाहा प्रमुख रूप से शामिल हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए खड़कपाड़ा पुलिस station, महात्मा फुले पुलिस station और नगर निगम के श्वान नियंत्रण दस्ते ने रविवार रात से ही आक्रामक कुत्तों को पकड़ने के लिए संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया है।
अस्पताल में मरीजों की स्थिति पर जानकारी देते हुए रुक्मिणीबाई अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप पगारे ने बताया, "उपचार के लिए आए सभी मरीजों को रेबीज रोधी वैक्सीन (एंटी-रेबीज) दी गई है और प्राथमिक चिकित्सा के बाद उन्हें घर भेज दिया गया है। घायलों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं और अस्पताल में सभी आवश्यक चिकित्सा व्यवस्थाएं पूरी रखी गई हैं।" दूसरी ओर आक्रोशित स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रविवार की छुट्टी का हवाला देकर नगर निगम के श्वान नियंत्रण कक्ष द्वारा तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई, जिसके कारण आवारा कुत्तों का आतंक शहर के अन्य व्यस्त इलाकों में भी फैल गया।
