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अब सिर्फ नल नहीं, नल में पानी की गारंटी पर जोर; JJM 2.0 में बदली रणनीति

जल शक्ति मंत्रालय ने 11वें District Collectors’ Peyjal Samvad में Jal Jeevan Mission 2.0 की प्रगति और ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को टिकाऊ बनाने पर जोर दिया। अब सरकार का फोकस केवल घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने के बजाय नियमित जलापूर्ति, पानी की गुणवत्ता, जल स्रोतों की sustainability, शिकायतों के त्वरित समाधान और पंचायतों की भागीदारी पर है।

Anshuman Mishra11 अग. 2026, 06:11 PM IST
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अब सिर्फ नल नहीं, नल में पानी की गारंटी पर जोर; JJM 2.0 में बदली रणनीति
नई दिल्ली: Jal Jeevan Mission 2.0 के तहत अब सरकार का फोकस सिर्फ ग्रामीण घरों तक नल का कनेक्शन पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा। अब जोर इस बात पर है कि घरों में नल से पानी नियमित रूप से पहुंचे, पानी सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण हो, जल स्रोत लंबे समय तक टिके रहें और गांव खुद अपनी जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और निगरानी में भागीदार बनें।

इसी दिशा में जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने मंगलवार को 11वें District Collectors’ Peyjal Samvad का आयोजन किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुए इस संवाद में जिला कलेक्टरों और वरिष्ठ अधिकारियों ने Jal Jeevan Mission (JJM) 2.0 को तेजी से लागू करने और अलग-अलग जिलों में अपनाई जा रही बेहतर व्यवस्थाओं को साझा करने पर चर्चा की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा ने की। बैठक में National Jal Jeevan Mission के Additional Secretary एवं Mission Director कमल किशोर सोन समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

JJM 2.0 में क्या बदला?
Jal Jeevan Mission की शुरुआत 2019 में ग्रामीण परिवारों को नल से पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई थी। उस समय देश के केवल करीब 16.7 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास नल से पानी की सुविधा थी। जनवरी 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 81.57 प्रतिशत यानी करीब 15.79 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक पहुंच गया था। अब सरकार ने JJM को दिसंबर 2028 तक बढ़ाते हुए इसे JJM 2.0 के रूप में restructure और reorient किया है। मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मिशन का कुल वित्तीय परिव्यय बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये किया। इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 3.59 लाख करोड़ रुपये रखी गई है।

सरकार के मुताबिक JJM 2.0 का बड़ा बदलाव यह है कि मिशन को केवल infrastructure बनाने की योजना से आगे ले जाकर service delivery, drinking-water governance और institutional reforms पर केंद्रित किया जा रहा है। यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि गांव में नल लगा है या नहीं। सवाल यह होगा कि नल में नियमित पानी आ रहा है या नहीं, पानी की गुणवत्ता कैसी है और पूरी व्यवस्था लंबे समय तक चल सकती है या नहीं।

11वें Peyjal Samvad में किन मुद्दों पर जोर?
बैठक में जिलों को District Water and Sanitation Mission (DWSM) की नियमित बैठकें करने और उनकी proceedings को JJM IMIS portal पर upload करने को कहा गया। इसके साथ ही Decision Support System (DSS) के जरिए जल स्रोतों की sustainability का वैज्ञानिक आकलन करने पर भी जोर दिया गया।

मानसून को देखते हुए “Catch the Rain – Jal Sanchay Jan Bhagidari” अभियान को भी तेज करने की अपील की गई। इसके तहत Gram Panchayats, Village Water and Sanitation Committees (VWSCs), Self Help Groups, schools, colleges और community institutions को rainwater harvesting तथा groundwater recharge से जोड़ने पर जोर है।

चार जिलों ने पेश किए अलग-अलग मॉडल
इस बैठक में चार जिलों ने अपने अनुभव और best practices साझा किए। इन मॉडलों का उद्देश्य दूसरे जिलों को स्थानीय समस्याओं के हिसाब से प्रभावी तरीके अपनाने में मदद करना है।

उत्तर कन्नड़: जल स्रोतों की पहले से होगी mapping
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में coastal, forest और hilly क्षेत्रों की वजह से ग्रामीण जलापूर्ति एक बड़ी चुनौती है। जिले ने lakes, open wells और borewells की mapping के साथ geospatial data और groundwater assessments का इस्तेमाल करके अलग-अलग Gram Panchayats के लिए source sustainability plans तैयार किए हैं।

इंजीनियरों और पंचायत अधिकारियों की joint inspections, नियमित VWSC meetings और Gram Sabha के जरिए community participation को भी मजबूत किया जा रहा है। इस मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आज जिस जल स्रोत से गांव को पानी मिल रहा है, वह भविष्य में भी उपलब्ध रहे।

खोवाई: पानी की जांच में स्कूल और महिलाएं भी शामिल
त्रिपुरा के खोवाई जिले ने water quality monitoring में community participation का मॉडल पेश किया। यहां School Water Clubs के जरिए छात्रों को Field Testing Kits यानी FTKs से पानी की गुणवत्ता जांचने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

जिले में 6,000 से ज्यादा Self Help Group women को community mobilisation से जोड़ा गया है। साथ ही catchment protection, afforestation, groundwater recharge और greywater management पर भी काम किया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले के सभी 860 Anganwadi Centres में rainwater harvesting structures बनाए गए हैं।

डीडवाना-कुचामन: फ्लोराइड प्रभावित इलाकों के लिए अलग रणनीति
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में groundwater में fluoride और salinity की समस्या लंबे समय से चुनौती रही है। आधिकारिक प्रस्तुति के मुताबिक इसके कारण dental और skeletal fluorosis के मामले भी सामने आए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए जिले ने surface-water based regional water supply systems को मजबूत करने के साथ traditional water conservation और groundwater recharge पर जोर दिया है।

Tankas का निर्माण और rejuvenation, water bodies की restoration तथा rainwater harvesting जैसे उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा SCADA-enabled monitoring system के जरिए reservoirs, water treatment facilities, pump houses और village-level distribution networks की real-time monitoring की जा रही है।

चतरा: पानी की शिकायतों के लिए “समस्या निवारण पखवाड़ा”
झारखंड के चतरा जिले ने “Peyjal Samasya Nivaaran Pakhwada” नाम से विशेष अभियान चलाया है। इसके तहत handpumps, village water supply schemes, पानी की कमी और जल स्रोतों से जुड़ी शिकायतों की पहचान कर district administration, technical departments, Panchayati Raj Institutions और स्थानीय समुदाय के सहयोग से उनका समाधान किया जाता है।

जिले में IoT-based remote monitoring, पंचायत स्तर पर समीक्षा और युवाओं को pump operators तथा plumbers के रूप में training देने की पहल भी की गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार विभिन्न योजनाओं के convergence से जिले में 5,300 से अधिक soak pits और rainwater harvesting structures बनाए गए हैं, जबकि ponds और reservoirs के rejuvenation पर भी काम हुआ है।

Sujalam Shakti: जल प्रबंधन में महिलाओं की बढ़ेगी भूमिका
Peyjal Samvad के दौरान Sujalam Shakti के implementation roadmap पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य women-led village support groups के जरिए water quality monitoring, community participation और water-source sustainability को मजबूत करना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका केवल पानी के उपयोग तक सीमित रहने के बजाय पानी की monitoring और local governance तक बढ़ सकती है।

क्यों महत्वपूर्ण है JJM 2.0?
JJM 2.0 का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि किसी गांव में पाइपलाइन और नल लग जाना ही लगातार पेयजल आपूर्ति की गारंटी नहीं है। अगर groundwater का स्तर गिर जाए, जल स्रोत सूख जाए, पाइपलाइन या pump खराब हो जाए या पानी की quality खराब हो जाए, तो नल कनेक्शन होने के बावजूद ग्रामीण परिवारों को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।

इसीलिए JJM 2.0 में चार बड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
1. Functionality: नल और water supply system वास्तव में काम करे।
2. Water Quality: घरों तक सुरक्षित और निर्धारित गुणवत्ता का पानी पहुंचे।
3. Sustainability: जिस source से पानी मिल रहा है, वह लंबे समय तक उपलब्ध रहे।
4. Community Ownership: Gram Panchayat और स्थानीय समुदाय जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और निगरानी में भागीदार बनें।

मार्च 2026 में सरकार ने भी JJM 2.0 के प्रमुख reform areas में digital data governance, utility-based service delivery, Gram Panchayat-led community governance, water-quality monitoring और financial sustainability को शामिल किया था।

Sujalam Bharat से होगी डिजिटल निगरानी
JJM 2.0 के तहत “Sujalam Bharat” नाम से एक national digital framework विकसित करने की योजना है। इसके तहत गांवों को unique Sujal Gaon/Service Area ID दिया जाएगा और source से लेकर tap तक पूरी drinking-water supply system की digital mapping की जाएगी। इसका उद्देश्य water infrastructure की tracking, planning, monitoring और accountability को मजबूत करना है।

ग्रामीण परिवारों को क्या फायदा होगा?
अगर JJM 2.0 की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो इसका असर केवल घर में नल पहुंचने तक सीमित नहीं रहेगा। पानी की नियमित उपलब्धता: ग्रामीण परिवारों को दूर के जल स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। महिलाओं और बच्चों का समय बचेगा: घर तक पानी पहुंचने से पानी लाने में लगने वाला समय और श्रम कम हो सकता है। Jal Jeevan Mission के आधिकारिक backgrounder में भी महिलाओं पर water collection burden कम होने को मिशन के प्रमुख सामाजिक प्रभावों में बताया गया है।

पानी की गुणवत्ता बेहतर तरीके से monitor होगी: Field Testing Kits, laboratories और community-based monitoring के जरिए water quality पर नजर रखने की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। गर्मियों में पानी की समस्या से निपटने में मदद: Rainwater harvesting, groundwater recharge और water-body rejuvenation जैसे उपाय जल स्रोतों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

शिकायतों का तेजी से समाधान: District dashboards, IoT monitoring और grievance redressal mechanisms से खराब pumps, handpumps और supply systems की समस्याओं को जल्दी identify करने की कोशिश होगी।

अब सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
Jal Jeevan Mission ने ग्रामीण tap-water infrastructure के विस्तार में बड़ा बदलाव किया है। लेकिन JJM 2.0 की सफलता अब केवल नए connections की संख्या से तय नहीं होगी। सबसे बड़ी चुनौती होगी कि जिन घरों में connection पहुंच चुका है, वहां नियमित, पर्याप्त, सुरक्षित और टिकाऊ पानी की supply बनी रहे।

सरकार ने इसी वजह से JJM 2.0 को infrastructure-centric approach से service-delivery model की ओर मोड़ने की बात कही है। 11वें Peyjal Samvad में सामने आए चार जिलों के मॉडल इसी बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं—कहीं जल स्रोतों की mapping हो रही है, कहीं स्कूल के बच्चे पानी की quality जांच रहे हैं, कहीं SCADA से पूरी supply chain monitor हो रही है और कहीं शिकायतों के समाधान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

Jal Jeevan Mission का पहला लक्ष्य था—हर ग्रामीण घर तक नल पहुंचाना। JJM 2.0 की अगली बड़ी चुनौती है—उस नल में लगातार सुरक्षित पानी पहुंचाना। इसीलिए आने वाले वर्षों में जल स्रोतों का संरक्षण, groundwater recharge, rainwater harvesting, technology-based monitoring, पंचायतों की भूमिका और community participation इस मिशन की सफलता के सबसे महत्वपूर्ण आधार बनने वाले हैं।