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सुप्रीम कोर्ट में अब 38 जजों की मंजूर संख्या, राष्ट्रपति ने 11 अगस्त को दी मंजूरी; Constitution Bench के बढ़ते दबाव के बीच बड़ा बदलाव

सुप्रीम कोर्ट की ताकत बढ़ाने वाले ऐतिहासिक फैसले पर अब राष्ट्रपति की मुहर लग गई है। 11 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट में CJI समेत जजों की स्वीकृत संख्या 38 हो गई है। लंबे समय से बढ़ते मुकदमों के बोझ और Constitution Benches के कारण नियमित सुनवाई पर पड़ रहे दबाव के बीच यह बदलाव न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस पूरी कवायद की शुरुआत CJI Surya Kant की पहल से हुई थी, जिन्होंने मई में प्रधानमंत्री से सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक क्षमता बढ़ाने का अनुरोध किया था।

Sonali12 अग. 2026, 07:33 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट में अब 38 जजों की मंजूर संख्या, राष्ट्रपति ने 11 अगस्त को दी मंजूरी; Constitution Bench के बढ़ते दबाव के बीच बड़ा बदलाव

नई दिल्ली: 

सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 अगस्त 2026 को Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही यह Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 2026 बन गया है। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक सूची में भी इस बिल की assent की तारीख 11 अगस्त 2026 दर्ज है। नए कानून के बाद सुप्रीम कोर्ट की sanctioned strength CJI समेत 38 हो गई है। हालांकि तकनीकी रूप से कानून Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956 की Section 2 में “thirty-three” की जगह “thirty-seven” करता है। यानी CJI को छोड़कर न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़कर 37 हुई है। CJI को जोड़ने पर कुल sanctioned strength 38 होती है।

11 अगस्त को जारी Gazette में क्या साफ हुआ?

इस मामले में 11 अगस्त की Gazette notification सबसे महत्वपूर्ण नई जानकारी है। Ministry of Law and Justice के Legislative Department ने 11 अगस्त 2026 को Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 2026 को प्रकाशित किया। Gazette के अनुसार यह Act Parliament के दोनों सदनों से पारित Bill के रूप में प्रकाशित हुआ और राष्ट्रपति ने इसी दिन यानी 11 अगस्त को इसे assent दिया। Act को “No. 14 of 2026” के रूप में दर्ज किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Act को 16 मई 2026 से प्रभावी माना गया है। यानी कानून की commencement date 16 मई 2026 होगी, जिस दिन संबंधित Ordinance लागू हुआ था।

Ordinance भी अब औपचारिक रूप से repeal

11 अगस्त के Gazette में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान सामने आया है। नए Act के Section 3 के तहत Supreme Court (Number of Judges) Amendment Ordinance, 2026 को repeal कर दिया गया है। हालांकि Ordinance के तहत पहले किए गए कार्यों या उठाए गए कदमों को सुरक्षित रखा गया है। Gazette में स्पष्ट किया गया है कि Ordinance के तहत की गई कार्रवाई को अब amended Act के तहत की गई कार्रवाई माना जाएगा। इसका मतलब है कि मई में शुरू हुई अस्थायी व्यवस्था अब स्थायी कानून में बदल गई है।

राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड से भी पुष्टि

इस खबर की सबसे महत्वपूर्ण स्वतंत्र पुष्टि अब राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट से होती है। Central Bills की सूची में “The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026” के सामने assent की तारीख 11-08-2026 और संबंधित मंत्रालय Ministry of Law and Justice दर्ज है।

इसलिए अब यह कहना पूरी तरह आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित है कि राष्ट्रपति ने 11 अगस्त 2026 को इस कानून को मंजूरी दी।

CJI Surya Kant ने PM को लिखा था पत्र

न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया के पीछे Chief Justice of India Surya Kant की पहल भी महत्वपूर्ण रही। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में बताया था कि CJI Surya Kant ने 11 मई 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की sanctioned strength बढ़ाने का अनुरोध किया था। CJI की चिंता थी कि मामलों की बढ़ती संख्या के बीच अदालत को लगातार उच्च disposal rate बनाए रखना पड़ता है। वहीं Constitution Benches के गठन से कई न्यायाधीश नियमित मामलों की सुनवाई से अलग हो जाते हैं। Sabarimala reference की सुनवाई के लिए गठित नौ न्यायाधीशों की Constitution Bench को भी इसी संदर्भ में उदाहरण के तौर पर बताया गया था।

मई में Cabinet ने दी थी मंजूरी

इस फैसले की पृष्ठभूमि 5 मई 2026 को तैयार हुई थी। केंद्र सरकार ने उस दिन बताया था कि Union Cabinet ने Supreme Court में CJI को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यानी चार अतिरिक्त न्यायाधीशों के पद बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। सरकार ने उस समय कहा था कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से सुप्रीम कोर्ट अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा और speedy justice में मदद मिलेगी। नए न्यायाधीशों के वेतन, supporting staff और अन्य सुविधाओं पर होने वाला खर्च Consolidated Fund of India से पूरा किया जाएगा।

16 मई का Ordinance अब Act में तब्दील

Cabinet approval के बाद राष्ट्रपति ने मई में Ordinance जारी किया था, जिसके जरिए CJI को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट की संख्या 33 से 37 करने का रास्ता बनाया गया।

अब 11 अगस्त को राष्ट्रपति की assent और Gazette notification के बाद वही व्यवस्था स्थायी कानून बन गई है। नए Act में साफ तौर पर कहा गया है कि यह 16 मई 2026 से प्रभावी माना जाएगा।

संसद में कैसे आगे बढ़ा मामला?

Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 को जुलाई में संसद में पेश किया गया था। लोकसभा ने 3 अगस्त को इसे पारित किया। इसके बाद राज्यसभा में Bill पर विचार हुआ और इसे लोकसभा को लौटाया गया, क्योंकि इसे Money Bill के रूप में certify किया गया था।

11 अगस्त की Gazette में भी यह महत्वपूर्ण विवरण दर्ज है कि Bill “as passed by the Houses of Parliament” राष्ट्रपति के सामने assent के लिए आया था। Gazette में Speaker द्वारा इसे Constitution के Article 110 के तहत Money Bill certify किए जाने का उल्लेख भी है।

2019 के बाद पहली वैधानिक बढ़ोतरी

सुप्रीम कोर्ट की judge strength में इससे पहले 2019 में बढ़ोतरी हुई थी। उस समय CJI को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। केंद्र सरकार के 5 मई के आधिकारिक रिकॉर्ड में सुप्रीम कोर्ट की sanctioned strength के पुराने बदलावों का पूरा इतिहास भी दिया गया है। 1956 में 10 से शुरुआत के बाद 1960 में 13, 1977 में 17, 1986 में 25, 2008 में 30 और 2019 में 33 न्यायाधीशों तक संख्या बढ़ाई गई थी। अब 2026 में यह संख्या 37 हो गई है।

बड़ी बात: 38 जज तुरंत काम शुरू नहीं करेंगे

कानून ने Supreme Court की sanctioned strength 38 कर दी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत में उसी दिन 38 न्यायाधीश कार्यरत हो गए हैं। 38 कुल स्वीकृत संख्या है, जिसमें CJI शामिल हैं। वास्तविक working strength नियुक्तियों और vacancies पर निर्भर करेगी।  की 12 अगस्त की रिपोर्ट में भी वर्तमान working strength 32, जिसमें CJI शामिल हैं, बताई गई है। इसलिए नए कानून का वास्तविक असर तब दिखाई देगा जब अतिरिक्त पदों पर नियुक्तियां होंगी।

Article 124 बना संवैधानिक आधार

भारत के संविधान का Article 124 संसद को Supreme Court के न्यायाधीशों की संख्या कानून द्वारा निर्धारित करने की अनुमति देता है। इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत Parliament ने Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956 बनाया था और समय-समय पर उसमें संशोधन कर न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई गई।

2026 का नया कानून भी इसी 1956 के Act में संशोधन करता है।

अब आगे क्या होगा?

नए कानून के लागू होने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण अतिरिक्त sanctioned posts को भरना होगा। चार नए पद उपलब्ध होने से Supreme Court के पास भविष्य में अधिक Benches गठित करने की क्षमता होगी। इसका महत्व विशेष रूप से तब बढ़ जाता है जब बड़ी Constitution Benches किसी संवैधानिक या महत्वपूर्ण कानूनी सवाल की सुनवाई कर रही हों। ऐसे मामलों में कई न्यायाधीश एक ही Bench में बैठते हैं और बाकी नियमित मामलों के लिए उपलब्ध judicial capacity प्रभावित हो सकती है।

सरकार का उद्देश्य न्यायिक क्षमता बढ़ाकर अदालत की functioning को अधिक प्रभावी बनाना और speedy justice में मदद करना है।

11 अगस्त 2026 अब सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक संरचना के इतिहास में महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। राष्ट्रपति की assent और Gazette notification के साथ Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 2026 औपचारिक रूप से कानून बन गया है। अब CJI समेत सुप्रीम कोर्ट की sanctioned strength 38 है। तकनीकी रूप से CJI को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हुई है। मई में Cabinet approval से शुरू हुई प्रक्रिया, CJI Surya Kant की पहल, Ordinance, संसद में Bill और दोनों सदनों की मंजूरी के बाद अब राष्ट्रपति की assent के साथ पूरी हो गई है। अगली चुनौती इन अतिरिक्त पदों पर नियुक्तियां कर वास्तविक working strength बढ़ाने की होगी।