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राम मंदिर CEO की कुर्सी के लिए ‘अग्निपरीक्षा’: आस्था से लेकर भीड़ प्रबंधन तक 34 सवाल, 18 दावेदारों में से चुने जाएंगे 3 नाम

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन की प्रक्रिया अब अहम दौर में पहुंच गई है। करीब 5,200 आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इंटरव्यू में उम्मीदवारों की प्रशासनिक दक्षता के साथ नेतृत्व क्षमता, बड़े आयोजनों के प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, धार्मिक-सामाजिक अनुभव और भगवान राम के प्रति आस्था व मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर उनकी सोच को परखा जा रहा है। चयन समिति 18 उम्मीदवारों में से तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपेगी। ट्रस्ट की अगली महत्वपूर्ण बैठक 2 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है।

sd12 अग. 2026, 07:33 PM IST
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राम मंदिर CEO की कुर्सी के लिए ‘अग्निपरीक्षा’: आस्था से लेकर भीड़ प्रबंधन तक 34 सवाल, 18 दावेदारों में से चुने जाएंगे 3 नाम
पूर्व DM-IPS से लेकर सैन्य और शिक्षा क्षेत्र के अफसर मैदान में
राम मंदिर CEO पद के लिए मंगलवार से इंटरव्यू शुरू हुए। पहले चरण में पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों समेत विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी उम्मीदवार चयन समिति के सामने पहुंचे। इनमें पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय, जौनपुर के पूर्व DM दिनेश चंद्र और अयोध्या के पूर्व DM योगेश्वर राम मिश्रा के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार उम्मीदवारों में प्रशासनिक सेवा के अलावा सैन्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी लोग भी शामिल हैं। चयन प्रक्रिया में महिला अधिकारी की दावेदारी भी सामने आई है। पूर्व IPS राजेश पांडेय की दावेदारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने पुलिस सेवा में लंबा अनुभव हासिल किया है और उनके प्रशासनिक-सुरक्षा अनुभव को इस पद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिर्फ अफसरी का अनुभव नहीं, राम मंदिर की समझ भी जरूरी
इस चयन प्रक्रिया की खास बात यह है कि उम्मीदवारों से केवल उनकी सरकारी सेवा या प्रशासनिक उपलब्धियों के बारे में सवाल नहीं किए जा रहे। इंटरव्यू में यह भी समझने की कोशिश की जा रही है कि उम्मीदवार राम मंदिर की धार्मिक संवेदनशीलता, परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं को किस तरह समझता है। उम्मीदवारों से उनके धार्मिक और सामाजिक अनुभव, मंदिर की व्यवस्था को बेहतर बनाने की सोच और भविष्य के विजन से जुड़े सवाल भी पूछे जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में उम्मीदवारों से उनकी व्यक्तिगत जीवनशैली और धार्मिक जुड़ाव से जुड़े सवाल पूछे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
34 सवालों का इंटरव्यू फॉर्मेट, नेतृत्व क्षमता पर खास जोर
CEO चयन के लिए तैयार इंटरव्यू फॉर्मेट में 34 सवालों को शामिल किया गया है। इनमें उम्मीदवार के प्रशासनिक अनुभव के साथ यह जानने पर जोर है कि उसने बड़े स्तर पर कितनी जिम्मेदारियां संभाली हैं।
उम्मीदवारों से पूछा जा रहा है कि क्या उन्होंने अपने कार्यकाल में 1,000 से 5,000 या उससे अधिक कर्मचारियों की टीम का नेतृत्व किया है। इसके अलावा बड़े धार्मिक, सामाजिक या सार्वजनिक आयोजनों के संचालन से जुड़े अनुभव को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इंटरव्यू में उम्मीदवारों से यह बताने को कहा जा रहा है कि उन्होंने कौन-कौन से बड़े आयोजन संभाले, उनमें कितने लोग शामिल हुए, आयोजन कितने दिनों तक चला, किस वर्ष हुआ और उसमें उनकी व्यक्तिगत भूमिका क्या थी। गौरतलब है कि CEO पद के लिए आवेदन की योग्यता में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव मांगा गया था और नियुक्ति तीन साल के लिए प्रस्तावित है।
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ बनी सबसे बड़ी कसौटी
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पर्व और विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ सकती है। ऐसे में CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्राउड मैनेजमेंट की होगी। इसी वजह से चयन समिति उम्मीदवारों के पुराने अनुभवों को बारीकी से परख रही है—उन्होंने कितनी बड़ी भीड़ संभाली, कितने कर्मचारियों की टीम के साथ काम किया और किसी बड़े आयोजन के दौरान अचानक पैदा हुई चुनौती का किस तरह समाधान किया। CEO के स्तर पर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, कर्मचारी प्रबंधन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और प्रशासनिक व्यवस्था को एक साथ संभालने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
18 उम्मीदवारों में से बनेंगे तीन नाम
इस पद के लिए देशभर से करीब 5,200 आवेदन आने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक छंटनी के बाद 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। तीन सदस्यीय चयन समिति इन 18 उम्मीदवारों के इंटरव्यू और उनके अनुभव का मूल्यांकन करने के बाद तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। यह पैनल ट्रस्ट के सामने रखा जाएगा और अंतिम निर्णय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करेगा।
तीन सदस्यीय समिति कर रही चयन
CEO चयन के लिए बनाई गई समिति में:
सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली
पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावड़े
सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी
शामिल हैं।
समिति को उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता के साथ उनके नेतृत्व, धार्मिक-सामाजिक समझ और मंदिर के भविष्य के प्रबंधन को लेकर विजन का मूल्यांकन करना है।
2 सितंबर को हो सकता है बड़ा फैसला
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली महत्वपूर्ण बैठक 2 सितंबर को प्रस्तावित है। इससे पहले चयन समिति को तीन नामों का पैनल तैयार करना है। इसके बाद ट्रस्ट स्तर पर अंतिम विचार-विमर्श के बाद CEO के नाम पर फैसला हो सकता है। CEO की नियुक्ति में देरी को देखते हुए ट्रस्ट ने अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था के लिए सचिव की नियुक्ति भी की है। जुलाई में ट्रस्ट ने IIT से जुड़े इंजीनियर और मंदिर निर्माण परियोजना में प्रोजेक्ट मैनेजर रहे जगदीश आफले को सचिव नियुक्त किया था।
संघ की पसंद को लेकर भी चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
CEO चयन को लेकर सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी सामने आई है कि अंतिम चयन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े पदाधिकारियों की राय पर भी विचार किया जा सकता है। कुछ रिपोर्टों में संघ की पृष्ठभूमि वाले किसी सेवानिवृत्त अधिकारी के नाम की संभावना का भी उल्लेख है। हालांकि, इस संबंध में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित समीकरण या सूत्रों की जानकारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
पारदर्शिता पर भी उठे सवाल
CEO चयन की प्रक्रिया के बीच पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने ट्रस्ट से शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण पद की चयन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।
आखिर किसे मिलेगी राम मंदिर की प्रशासनिक कमान?
अब मुकाबला केवल प्रशासनिक अनुभव का नहीं रह गया है। उम्मीदवार को बड़े स्तर की टीम संभालने, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रबंधन करने, धार्मिक-सामाजिक संवेदनशीलता समझने और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की क्षमता भी साबित करनी होगी।
18 दावेदारों में से तीन नामों का पैनल और फिर ट्रस्ट का अंतिम फैसला—अब सबकी नजरें 2 सितंबर की बैठक पर टिकी हैं। यही तय करेगा कि अयोध्या के राम मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं की कमान किस अनुभवी अधिकारी के हाथों में जाएगी।