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बोधगया मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा अपडेट, 6 अक्टूबर तक टली सुनवाई; Sabarimala के 9-जजों के फैसले पर टिकी नजर

महाबोधि मंदिर से जुड़े दशकों पुराने कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बड़ा फैसला टाल दिया है। बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अब 6 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों वाली Sabarimala Constitution Bench के फैसले पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि उसी के बाद बोधगया मामले में आगे की सुनवाई की दिशा और कानूनी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि Sabarimala का फैसला 6 अक्टूबर को ही आएगा।

Sonali12 अग. 2026, 07:33 PM IST
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बोधगया मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा अपडेट, 6 अक्टूबर तक टली सुनवाई; Sabarimala के 9-जजों के फैसले पर टिकी नजर

नई दिल्ली:

 बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन और धार्मिक अधिकारों से जुड़े एक पुराने संवैधानिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अपडेट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने Bodh Gaya Temple Act, 1949 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 तक टाल दी है। इस दौरान अदालत में Sabarimala reference पर सुनवाई कर चुकी 9-जजों की Constitution Bench के फैसले का इंतजार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में अगली तारीख 6 अक्टूबर तय की गई है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने Sabarimala मामले में फैसला 6 अक्टूबर को देने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। अदालत ने संकेत दिया है कि 9-जजों की Bench का फैसला तब तक आ सकता है। इसलिए इसे “फैसला 6 अक्टूबर को ही आएगा” के रूप में लिखना सही नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला?

मामला Writ Petition (Civil) No. 380/2012, Bhante Arya Nagarjun Shurai Sasai and Anr. v. Union of India and Ors. से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक याचिकाओं में Bodh Gaya Temple Act, 1949 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। 17 फरवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया था कि याचिकाओं का मुख्य मुद्दा 1949 के Bodh Gaya Temple Act के कुछ प्रावधानों की constitutionality है। उस आदेश में बिहार सरकार और केंद्र सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था और अंतिम सुनवाई 28 अप्रैल 2026 के लिए तय की गई थी। अब 11 अगस्त की सुनवाई में यह मामला आगे बढ़ने के बजाय 6 अक्टूबर तक टाल दिया गया है।

6 अक्टूबर को क्यों टाला गया मामला?

11 अगस्त 2026 को मामला CJI Surya Kant की अगुवाई वाली बेंच के सामने सूचीबद्ध था।  उस दिन मामले की तत्काल सुनवाई की संभावना कम थी क्योंकि अदालत में Shiv Sena से संबंधित एक part-heard matter भी चल रहा था। इसी दौरान वकीलों की ओर से सुझाव दिया गया कि बोधगया मामले को Sabarimala reference में 9-जजों के फैसले के बाद सुना जाए। CJI की बेंच ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को 6 अक्टूबर के लिए पोस्ट कर दिया। इस वजह से अब Sabarimala reference का फैसला बोधगया मामले की आगे की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

Sabarimala का फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

Sabarimala reference में सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की Constitution Bench ने 16 दिनों तक सुनवाई की थी और 14 मई 2026 को फैसला सुरक्षित रखा था। इस Bench में CJI Surya Kant के साथ Justice B.V. Nagarathna, Justice M.M. Sundresh, Justice Ahsanuddin Amanullah, Justice Aravind Kumar, Justice Augustine George Masih, Justice Prasanna B. Varale, Justice R. Mahadevan और Justice Joymalya Bagchi शामिल थे। Sabarimala reference केवल मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के पुराने विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें धार्मिक स्वतंत्रता, Articles 25 और 26, धार्मिक संप्रदायों के अधिकार और अदालतों द्वारा धार्मिक प्रथाओं की समीक्षा जैसे व्यापक संवैधानिक सवाल जुड़े हुए हैं। 14 मई को 16 दिनों की सुनवाई के बाद 9-जजों की Bench ने फैसला सुरक्षित रखा था। यही कारण है कि बोधगया मामले में भी पक्षकारों ने Sabarimala फैसले का इंतजार करने की बात रखी।

बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 में क्या व्यवस्था है?

Bodh Gaya Temple Act, 1949 का उद्देश्य बोधगया मंदिर और उससे संबंधित संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था करना था। कानून के तहत Bodh Gaya Temple Management Committee का गठन किया गया। कानून की Section 3 के अनुसार समिति में एक Chairman और आठ सदस्य होते हैं। इनमें चार बौद्ध और चार हिंदू सदस्य होने का प्रावधान है। गया के District Magistrate को ex-officio Chairman बनाया गया है, हालांकि कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि District Magistrate हिंदू नहीं है तो राज्य सरकार एक हिंदू को Chairman के रूप में नामित करेगी। Act में समिति को मंदिर, मंदिर की भूमि और उससे संबंधित संपत्तियों के management और control की जिम्मेदारी दी गई है।

Act में धार्मिक पूजा को लेकर भी प्रावधान

Bodh Gaya Temple Act की Section 11 के तहत हिंदू और बौद्ध, दोनों समुदायों के प्रत्येक संप्रदाय के लोगों को मंदिर और मंदिर की भूमि पर पूजा या पिंडदान के लिए प्रवेश का अधिकार दिया गया है। कानून में मंदिर परिसर में पशु बलि, शराब और जूते पहनकर प्रवेश पर भी रोक का प्रावधान है।

यही प्रावधान और मंदिर के प्रबंधन की मौजूदा कानूनी व्यवस्था व्यापक धार्मिक अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े सवालों के संदर्भ में चुनौती के दायरे में हैं।

विवाद की जड़ क्या है?

बोधगया का महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। याचिकाकर्ताओं की ओर से लंबे समय से मंदिर के प्रबंधन और नियंत्रण से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड में फिलहाल इतना स्पष्ट है कि लंबित याचिकाओं में Bodh Gaya Temple Act, 1949 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। इसलिए यह कहना अधिक सटीक है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने “Act की कुछ धाराओं की constitutional validity” का सवाल है, न कि अदालत ने अभी पूरे Act को असंवैधानिक घोषित करने पर कोई फैसला दे दिया है।

2012 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है याचिका

यह विवाद नया नहीं है। मुख्य मामला Writ Petition (Civil) No. 380/2012 है। फरवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक आदेश में यही केस नंबर और Bhante Arya Nagarjun Shurai Sasai तथा अन्य बनाम Union of India एवं अन्य पक्षकार दर्ज हैं। फरवरी के आदेश में अदालत ने केंद्र और बिहार सरकार को व्यापक counter affidavit दाखिल करने का अवसर दिया था और petitioners को उसके बाद rejoinder दाखिल करने के लिए समय दिया गया था। इसके बाद लिखित submissions और relevant statutes तथा case law की compilations भी दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम क्या होगा?

अब बोधगया मंदिर अधिनियम से जुड़े मामले पर अगली महत्वपूर्ण तारीख 6 अक्टूबर 2026 है। उससे पहले Sabarimala reference पर 9-जजों की Bench का फैसला आ सकता है। अगर Sabarimala में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक प्रथाओं की संवैधानिक समीक्षा से जुड़े व्यापक सिद्धांत स्पष्ट होते हैं, तो उनका प्रभाव बोधगया मामले में उठने वाले संवैधानिक सवालों पर भी पड़ सकता है। यह अभी एक संभावित कानूनी प्रभाव है, कोई घोषित judicial finding नहीं।

क्यों महत्वपूर्ण है 6 अक्टूबर?

6 अक्टूबर की तारीख इसलिए महत्वपूर्ण बन गई है क्योंकि अब बोधगया मामले की अगली सुनवाई Sabarimala reference के संभावित फैसले के बाद होगी। दोनों मामलों में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन से जुड़े संवैधानिक प्रश्नों की पृष्ठभूमि है, हालांकि दोनों मामलों के तथ्य और कानूनी मुद्दे अलग हैं। इसलिए आने वाले हफ्तों में Sabarimala verdict पर देशभर की कानूनी नजरें रहेंगी। उसके बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बोधगया मंदिर अधिनियम को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक सवालों पर किस दिशा में आगे बढ़ता है।