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साजिश, सबूत मिटाने की कोशिश और पुलिस की कार्रवाई... आरजी कर केस में पूर्व TMC विधायक समेत 3 पर FIR l
आरजी कर मेडिकल कॉलेज की महिला डॉक्टर के रेप और हत्या के मामले में अब उसके अंतिम संस्कार को लेकर भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। Barrackpore Police ने पीड़िता के अंतिम संस्कार में कथित जल्दबाजी और परिवार की सहमति को लेकर उठे सवालों के बाद FIR दर्ज की है। FIR में पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन सोमनाथ डे और पीड़िता के पड़ोसी संजिब मुखर्जी को नामजद किया गया है। मामले में केवल जल्दबाजी में cremation कराने का आरोप नहीं है, बल्कि आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने की कोशिश जैसे गंभीर आरोपों की भी जांच होगी। यह शिकायत पीड़िता के पिता द्वारा 10 अगस्त को Barrackpore Police Commissionerate में दिए जाने के बाद दर्ज की गई।

मामले की शुरुआत अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों से हुई। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने 9 अगस्त को आरोप लगाया था कि पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार तय प्रक्रिया के अनुसार नहीं हुआ। उनका कहना था कि cremation को तीसरे स्लॉट से बदलकर पहले स्लॉट में कर दिया गया, जिसके कारण शव का अंतिम संस्कार जल्दबाजी में कराया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पीड़िता के परिवार के किसी सदस्य ने crematorium के register पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इसके बाद पीड़िता के पिता ने 10 अगस्त को Barrackpore Police Commissionerate में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और कथित जल्दबाजी को लेकर सवाल उठाए गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की और अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
FIR में पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन सोमनाथ डे और पीड़िता के पड़ोसी संजिब मुखर्जी के नाम शामिल हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में इन तीनों की क्या भूमिका थी और क्या इन लोगों के बीच किसी तरह का coordination या आपसी संपर्क था। मामले में criminal conspiracy का आरोप भी शामिल है। इसका मतलब है कि पुलिस यह जांच करेगी कि क्या अंतिम संस्कार में कथित जल्दबाजी किसी सामान्य प्रशासनिक फैसले का परिणाम थी या इसके पीछे पहले से कोई योजना थी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि अंतिम संस्कार का समय किसने बदला और ऐसा करने का वास्तविक कारण क्या था।
इसके अलावा destruction of evidence के आरोप की भी जांच होगी। पुलिस यह जानना चाहती है कि क्या जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने से किसी महत्वपूर्ण forensic या अन्य सबूत को नुकसान पहुंचा या किसी ने जानबूझकर evidence को नष्ट करने या छिपाने की कोशिश की। इसके लिए crematorium के records, register, उपलब्ध CCTV footage और उस समय मौजूद लोगों के बयानों की जांच की जा सकती है। पुलिस यह भी verify करेगी कि पीड़िता के परिवार को अंतिम संस्कार के समय और प्रक्रिया के बारे में क्या जानकारी दी गई थी और क्या उनकी सहमति ली गई थी। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि शव crematorium कब पहुंचा, अंतिम संस्कार किस समय हुआ और तय तीसरे स्लॉट की जगह पहले स्लॉट में कराने का निर्णय किसने लिया।
फिलहाल FIR में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि तीनों व्यक्ति दोषी साबित हो गए हैं। पुलिस को जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि करने के लिए ठोस evidence जुटाना होगा। आगे की कार्रवाई इसी जांच के परिणाम पर निर्भर करेगी। इस नई FIR से आरजी कर मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब पुलिस मुख्य रेप-मर्डर केस के साथ-साथ मौत के बाद शव के अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वास्तव में जल्दबाजी हुई थी और यदि हुई थी तो उसके पीछे कौन था और उसका उद्देश्य क्या था।
