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भयंकर ट्रैफिक जाम से बेहाल चाकण एमआईडीसी, 20 कंपनियों ने दिया पलायन का अल्टीमेटम

मुख्य समस्या: पुणे के चाकण एमआईडीसी में भीषण ट्रैफिक जाम, जर्जर सड़कों, बिजली-पानी की किल्लत और कचरा प्रबंधन के अभाव से उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।पलायन का निर्णय: इस स्थिति से तंग आकर 20 लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) ने सतारा जिले के खंडाला एमआईडीसी में स्थानांतरित होने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।अर्थव्यवस्था और रोजगार पर प्रभाव: इन 20 कंपनियों का कुल सालाना कारोबार लगभग 1,000 करोड़ रुपये है। इनके पलायन से 2,000 से 4,000 कर्मचारियों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। उद्यमियों का पक्ष: उद्यमियों के अनुसार भोसरी से चाकण (आंबेठाण चौक) के बीच कुछ ही किलोमीटर तय करने में 3 घंटे से अधिक का समय लगता है। मुख्यमंत्री को 3 बार ईमेल भेजने के बावजूद समाधान न मिलने पर उन्होंने खंडाला जाने का फैसला लिया। प्रशासनिक हलचल: मामले के तूल पकड़ने के बाद MIDC के सीईओ दीपेंद्रसिंह कुशवाह ने आपात समीक्षा बैठक बुलाई है। वहीं स्थानीय विधायक बाबाजी काले ने उद्यमियों को चाकण में ही रोकने और मामला मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया है।

Khushi12 अग. 2026, 07:39 PM IST
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भयंकर ट्रैफिक जाम से बेहाल चाकण एमआईडीसी, 20 कंपनियों ने दिया पलायन का अल्टीमेटम
पुणे: पुणे के प्रमुख ऑटोमोबाइल औद्योगिक केंद्र चाकण एमआईडीसी में भीषण ट्रैफिक जाम, गड्ढों से भरी सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से तंग आकर 20 लघु एवं मध्यम उद्योगों ने सतारा जिले के खंडाला में स्थानांतरित होने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे करीब 2 हजार से 4 हजार कर्मचारियों का रोजगार दांव पर लग गया है। सालाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का व्यापार करने वाली इन 20 कंपनियों के पलायन का निर्णय महाराष्ट्र सरकार के औद्योगिक विकास और व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यदि यह स्थानांतरण पूरा होता है, तो इससे न केवल स्थानीय स्तर पर बेरोजगारी बढ़ेगी, बल्कि राज्य के औद्योगिक राजस्व, स्थानीय अर्थव्यवस्था और ऑटोमोबाइल आपूर्ति श्रृंखला को भी बड़ा झटका लगेगा।चाकण औद्योगिक क्षेत्र में मर्सिडीज-बेंज, फॉक्सवैगन और हुंडई जैसी वैश्विक ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ-साथ करीब 750 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) कार्यरत हैं, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 32 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। हालांकि, भोसरी से चाकण (आंबेठाण चौक) मार्ग पर रोजाना लगने वाले 3 घंटे से अधिक के भीषण ट्रैफिक जाम और जर्जर सड़कों के कारण माल ढुलाई में भारी देरी हो रही है।
समय पर कच्चा माल न मिलने और तैयार माल बाजार तक न पहुँचने से उद्योगों को रोजाना लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।समस्या के समाधान हेतु उद्यमियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय को तीन बार ईमेल भेजे और विभागीय आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों से पत्राचार किया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसके बाद चाकण के 20 उद्यमियों ने मिलकर एक समिति का गठन किया और खंडाला एमआईडीसी में भूखंड एवं बुनियादी ढांचे की स्थिति का निरीक्षण कर वहां शिफ्ट होने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उद्यमियों का स्पष्ट कहना है कि वे महाराष्ट्र राज्य से बाहर नहीं जाना चाहते, लेकिन चाकण में काम करने की स्थितियां आईसीयू के मरीज जैसी चिंताजनक हो गई हैं।मामला तूल पकड़ने के बाद सरकारी तंत्र में हलचल तेज हो गई है।
एमआईडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपेंद्रसिंह कुशवाह ने संबंधित सरकारी विभागों के साथ एक आपात समीक्षा बैठक आयोजित की। उन्होंने बताया कि हालिया बारिश के कारण हुए जलभराव और गड्ढों की वजह से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिसे सुधारने के लिए लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर तत्काल मरम्मत योजना बनाई जा रही है।
वहीं स्थानीय विधायक बाबाजी काले ने भी उद्यमियों से मुलाकात कर उन्हें चाकण में ही रोकने का भरोसा दिया है और मामले को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने की घोषणा की है।दिशा एक्सपोर्ट्स के मालिक धनंजय शेडबाले ने मीडिया से बात करते हुए कहा, हमारी कंपनी में करीब 140 लोग कार्यरत हैं और हम 19 साल से चाकण में काम कर रहे हैं। पिछले 14 महीनों से खराब सड़कों, ट्रैफिक और कचरा प्रबंधन पर कई पत्र लिखे गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।लघु उद्योग संघ के प्रतिनिधि और मैट्रिक्स पुलिंग के मालिक शांतनु कुलकर्णी ने कहा, हम महाराष्ट्र नहीं छोड़ रहे हैं, लेकिन चाकण में हमारी हालत आईसीयू के मरीज जैसी हो गई है। बिना सड़क, पानी और बिजली के काम करना असंभव हो चुका है।एमआईडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपेंद्रसिंह कुशवाह ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा, चाकण एवं तलेगांव में बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया गया है। हालिया बारिश से हुए जलभराव और गड्ढों के कारण ट्रैफिक की समस्या बढ़ी है। सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर समस्याओं के निवारण हेतु योजना बनाई जा रही है।स्थानीय विधायक बाबाजी काले ने कहा, उद्योगों की समस्याओं का समय पर समाधान न होना चिंताजनक है। हम कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनसे चाकण न छोड़ने का अनुरोध करेंगे और मुख्यमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की मांग करेंगे।