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समग्र शिक्षा योजना के तहत 3 साल में करीब 30 हजार करोड़ रुपये, स्कूलों की बदलेगी तस्वीर
केंद्र सरकार ने आकांक्षी जिलों में स्कूली शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत 2024-25 से जुलाई 2026 तक 29,882.84 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस फंड का इस्तेमाल स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल लर्निंग, शिक्षक प्रशिक्षण, स्मार्ट क्लासरूम, पेयजल, शौचालय और समावेशी शिक्षा जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा रहा है। योजना के तहत KGBV, आवासीय विद्यालय, PM SHRI, PM POSHAN और छात्रवृत्ति जैसी पहलों पर भी जोर दिया जा रहा है।
Anshuman Mishra12 अग. 2026, 08:29 PM IST

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के आकांक्षी जिलों में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत बड़े स्तर पर फंड आवंटित किया है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, 2024-25 से जुलाई 2026 तक आकांक्षी जिलों के लिए समग्र शिक्षा के तहत कुल 29,882.84 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य स्कूलों में बुनियादी ढांचे, डिजिटल लर्निंग, शिक्षक सहयोग और समावेशी शिक्षा को मजबूत करना है। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में दी है। मंत्रालय के अनुसार, समग्र शिक्षा योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूल शिक्षा के अलग-अलग स्तरों को एकीकृत तरीके से मजबूत करने पर केंद्रित है।
तीन साल में कितना फंड आवंटित हुआ?
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आकांक्षी जिलों के लिए समग्र शिक्षा के तहत वित्तीय आवंटन में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ोतरी हुई है। 2024-25 में 11,512.28 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें से 8,318.14 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2025-26 में आवंटन बढ़कर 12,221.22 करोड़ रुपये हुआ और इसमें से 8,343.08 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं 2026-27 में जुलाई 2026 तक 6,149.34 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं, जबकि 1,190.01 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस तरह जुलाई 2026 तक तीन वित्तीय वर्षों में कुल 29,882.84 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में करीब 17,851.23 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
स्कूलों में किन सुविधाओं पर होगा फोकस?
समग्र शिक्षा के तहत सिर्फ स्कूल भवन बनाने तक सीमित नहीं रखा गया है। योजना के तहत अतिरिक्त कक्षाओं, पेयजल, शौचालय, बिजली, इंटरनेट कनेक्टिविटी, ICT लैब और स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर है। इसका खास महत्व उन जिलों में है जहां बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। समग्र शिक्षा के दिशा-निर्देशों में भी शैक्षणिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।
DIKSHA के जरिए डिजिटल शिक्षा पर जोर
सरकार ने स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए DIKSHA प्लेटफॉर्म को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए डिजिटल सामग्री, ई-कंटेंट और प्रशिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य खास तौर पर उन क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री पहुंचाना है, जहां स्कूलों में संसाधनों की कमी है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण और सहयोग पर भी फोकस
समग्र शिक्षा के तहत शिक्षक सहायता और प्रोफेशनल डेवलपमेंट को भी प्रमुख हस्तक्षेपों में शामिल किया गया है। शिक्षक प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और pupil-teacher ratio को बेहतर बनाए रखने के लिए सहायता का प्रावधान है। हालांकि शिक्षकों की भर्ती और नियुक्ति राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आती है। केंद्र सरकार की भूमिका मुख्य रूप से योजना के तहत वित्तीय और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने की है।
लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए विशेष योजनाएं
समग्र शिक्षा के तहत सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए कई विशेष पहल भी संचालित की जा रही हैं। इनमें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV), नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, PM-JANMAN के तहत हॉस्टल और धर्ती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आवासीय सुविधाएं शामिल हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 5,307 KGBV और 1,238 नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय/हॉस्टल स्वीकृत हैं। इसके अलावा PM-JANMAN के तहत 500 और धर्ती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 692 हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं।
PM SHRI, PM POSHAN और छात्रवृत्ति योजनाएं भी शामिल
स्कूल शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने के लिए समग्र शिक्षा के साथ PM SHRI स्कूल, PM POSHAN, राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) और ULLAS जैसी पहलों पर भी जोर दिया जा रहा है। PM SHRI योजना का उद्देश्य ऐसे स्कूलों को विकसित करना है जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे, बेहतर शिक्षण वातावरण और NEP 2020 के अनुरूप सीखने के अवसर उपलब्ध हों।
क्या है आकांक्षी जिलों का उद्देश्य?
आकांक्षी जिला कार्यक्रम का उद्देश्य देश के सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों में तेजी से विकास सुनिश्चित करना है। शिक्षा इसके प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। सरकार इन जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों के संकेतकों में सुधार पर ध्यान देती है। समग्र शिक्षा के तहत इन जिलों में शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे और सीखने के माहौल को बेहतर बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।
सरकार के सामने चुनौती सिर्फ फंड खर्च करने की नहीं
करीब 30 हजार करोड़ रुपये का आवंटन स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि पैसा जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से खर्च होता है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सिर्फ स्मार्ट क्लासरूम या नई इमारतें बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इन सुविधाओं के साथ प्रशिक्षित शिक्षक, इंटरनेट कनेक्टिविटी, नियमित रखरखाव और बच्चों की वास्तविक सीखने की क्षमता में सुधार भी जरूरी है। समग्र शिक्षा का लक्ष्य इसी व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ना है—यानी स्कूलों को सिर्फ भवन नहीं, बल्कि बेहतर बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों, प्रशिक्षित शिक्षकों और समान अवसरों से लैस करना।
