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आयुष मेडिकल कॉलेजों के विस्तार की तैयारी, 17 राज्यों में नए संस्थानों को मिला समर्थन
देश में आयुष चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए आयुष शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है, जहां सरकारी क्षेत्र में आयुष शिक्षण संस्थानों की उपलब्धता कम है। इसी पहल के तहत ओडिशा के मयूरभंज में सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना को मंजूरी दी गई है।

केंद्र सरकार ने 11 अगस्त 2026 को जारी जानकारी में बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय है। इसलिए नए आयुष शिक्षण संस्थानों की स्थापना की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की होती है। हालांकि, राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत केंद्र सरकार ऐसे क्षेत्रों में राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है, जहां सरकारी क्षेत्र में आयुष शिक्षा संस्थानों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है।
मयूरभंज में सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को मंजूरी
ओडिशा सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 में मयूरभंज के लिए एक नए आयुष शिक्षण संस्थान, सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत मंजूरी दी गई है। इस मंजूरी का उद्देश्य राज्य में आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा के सरकारी ढांचे को मजबूत करना और ऐसे क्षेत्र में आयुष शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना है, जहां सरकारी आयुष शिक्षण संस्थानों की जरूरत है। हालांकि, केंद्र सरकार की इस घोषणा में कॉलेज में प्रस्तावित सीटों की संख्या, निर्माण पूरा होने की समयसीमा, प्रवेश प्रक्रिया या शैक्षणिक सत्र शुरू होने की तारीख की जानकारी नहीं दी गई है।
नए कॉलेजों के लिए राज्यों को देनी होगी वार्षिक कार्ययोजना
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत किसी नए आयुष शिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को अपनी जरूरत के अनुसार प्रस्ताव तैयार करना होता है। यह प्रस्ताव राज्य की वार्षिक कार्ययोजना के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाता है। प्रस्ताव राष्ट्रीय आयुष मिशन की निर्धारित गाइडलाइंस के अनुरूप होना चाहिए। इसके बाद उपलब्ध प्रावधानों और प्रस्ताव की जरूरत के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस व्यवस्था में राज्य सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और नए स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों की है।
वर्ष 2014-15 से 2026-27 तक कई राज्यों को मिला समर्थन
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत वर्ष 2014-15 से 2026-27 तक समर्थित नए आयुष शिक्षण संस्थानों की सूची भी जारी की है। इस सूची में 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इन क्षेत्रों में आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा रिग्पा जैसी अलग-अलग आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े शिक्षण संस्थानों को समर्थन दिया गया है। इससे साफ है कि आयुष शिक्षा के विस्तार को केवल आयुर्वेद तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि विभिन्न भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के लिए संस्थागत शिक्षा का ढांचा विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
- आंध्र प्रदेश में योग और प्राकृतिक चिकित्सा
आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम स्थित सरकारी प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग मेडिकल कॉलेज को समर्थन दिया गया है। इस संस्थान के माध्यम से योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में औपचारिक चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
- असम में सरकारी आयुर्वेद कॉलेज
असम के दुधनोई में सरकारी आयुर्वेद कॉलेज को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत समर्थन दिया गया है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में आयुष संस्थानों का विस्तार स्थानीय छात्रों के लिए चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ाने के साथ क्षेत्र में प्रशिक्षित आयुष मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
- चंडीगढ़ और गुजरात में आयुर्वेद शिक्षा का विस्तार
चंडीगढ़ के मनीमाजरा में सरकारी आयुर्वेद कॉलेज को समर्थन दिया गया है। गुजरात में सुरेंद्रनगर में सरकारी आयुर्वेद कॉलेज की स्थापना के लिए सहायता का प्रावधान किया गया है। इन दोनों संस्थानों के जरिए सरकारी क्षेत्र में आयुर्वेदिक शिक्षा की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य है।
- जम्मू-कश्मीर में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के राख होशियारी में सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत समर्थन दिया गया है। इससे जम्मू-कश्मीर में होम्योपैथिक चिकित्सा शिक्षा के लिए सरकारी संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
- कर्नाटक में योग, प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा रिग्पा
कर्नाटक में मैसूर स्थित सरकारी प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग कॉलेज को समर्थन दिया गया है। इसके अलावा रामनगर जिले के बिदादी होबली के शेषागिरिहल्ली स्थित दलाई लामा इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन में सोवा रिग्पा कॉलेज को भी सूची में शामिल किया गया है। इस तरह कर्नाटक में अलग-अलग आयुष चिकित्सा पद्धतियों की शिक्षा के लिए संस्थागत अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
- मध्य प्रदेश में छह सरकारी आयुर्वेद कॉलेज
मध्य प्रदेश को आयुष शिक्षा के विस्तार के मामले में उल्लेखनीय समर्थन मिला है। राज्य में छह सरकारी आयुर्वेद कॉलेजों को सूची में शामिल किया गया है। इनमें शाहडोल, नर्मदापुरम, बालाघाट, मुरैना, सागर और झाबुआ के सरकारी आयुर्वेद कॉलेज शामिल हैं। एक ही राज्य के कई जिलों में आयुर्वेदिक शिक्षण संस्थानों को समर्थन मिलने से चिकित्सा शिक्षा के अवसर बड़े शहरों के बाहर भी बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है।
- मणिपुर में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज
मणिपुर के केइराओ में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत समर्थन दिया गया है। पूर्वोत्तर राज्यों में इस तरह के संस्थानों का विस्तार क्षेत्रीय स्तर पर आयुष शिक्षा की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
- राजस्थान में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा
राजस्थान के जयपुर जिले के चाकसू में सरकारी आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा कॉलेज को समर्थन दिया गया है। यह संस्थान आयुर्वेद के साथ योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े शैक्षणिक क्षेत्रों को भी एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा।
- सिक्किम में सोवा रिग्पा शिक्षा
सिक्किम के गंगटोक स्थित देवराली में नामग्याल इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बतोलॉजी में सोवा रिग्पा से जुड़े संस्थान को भी समर्थन दिया गया है। सोवा रिग्पा हिमालयी क्षेत्र की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है और इसे आयुष व्यवस्था के अंतर्गत बढ़ावा दिया जा रहा है।
- हरियाणा में यूनानी और होम्योपैथी संस्थान
हरियाणा में नूंह जिले के अकरा में यूनानी कॉलेज एवं अस्पताल को समर्थन दिया गया है। इसके अलावा अंबाला कैंट के चंदपुरा गांव में होम्योपैथिक कॉलेज एवं अस्पताल को भी सूची में शामिल किया गया है। इससे हरियाणा में यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सा शिक्षा के लिए सरकारी संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
- पश्चिम बंगाल में योग और प्राकृतिक चिकित्सा कॉलेज
पश्चिम बंगाल में हावड़ा के बेलूर स्थित राज्य सामान्य अस्पताल में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा डिग्री कॉलेज को समर्थन दिया गया है। इसका उद्देश्य योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में डिग्री स्तर की शिक्षा के लिए संस्थागत अवसर बढ़ाना है।
- उत्तर प्रदेश में वाराणसी और अयोध्या को समर्थन
उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित राज्य होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और अयोध्या स्थित राज्य आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत समर्थन दिया गया है। अयोध्या में सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को समर्थन मिलने से राज्य में सरकारी आयुर्वेदिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में मदद मिल सकती है।
- तमिलनाडु में सिद्ध चिकित्सा शिक्षा
तमिलनाडु में सरकारी सिद्ध कॉलेज एवं अस्पताल को सूची में शामिल किया गया है। सिद्ध चिकित्सा दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में महत्वपूर्ण पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है। इसके लिए सरकारी शिक्षण संस्थानों को समर्थन मिलने से इस क्षेत्र में प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
- त्रिपुरा में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज
त्रिपुरा के पश्चिमी त्रिपुरा क्षेत्र में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत समर्थन दिया गया है। इससे राज्य में होम्योपैथी की औपचारिक शिक्षा के लिए संस्थागत आधार मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
- उत्तराखंड में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और शोध केंद्र
उत्तराखंड के देहरादून जिले के डोईवाला में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, अस्पताल एवं शोध केंद्र को भी सूची में शामिल किया गया है। कॉलेज के साथ अस्पताल और शोध केंद्र का जुड़ाव चिकित्सा शिक्षा को क्लिनिकल प्रशिक्षण और अनुसंधान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
आयुष शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी मिल सकता है लाभ
नए आयुष मेडिकल कॉलेज केवल छात्रों के लिए शिक्षा का केंद्र नहीं होते। मेडिकल कॉलेजों के साथ अस्पताल और क्लिनिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था होने पर स्थानीय लोगों को आयुष चिकित्सा सेवाओं का लाभ भी मिल सकता है। इसके अलावा ऐसे संस्थानों से भविष्य में आयुष क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्यकर्मी तैयार हो सकते हैं। हालांकि, किसी संस्थान की वास्तविक क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां पर्याप्त शिक्षक, अस्पताल, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शोध सुविधाएं और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचा किस स्तर पर उपलब्ध कराया जाता है।
आयुष की अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ बढ़ावा
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत जारी सूची में आयुर्वेद के साथ होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा रिग्पा से जुड़े संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इससे सरकार की ओर से आयुष शिक्षा के व्यापक विस्तार की नीति सामने आती है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अलग-अलग आयुष पद्धतियों के शिक्षण संस्थानों को समर्थन दिया गया है।
केंद्र और राज्यों की साझा जिम्मेदारी
नए आयुष मेडिकल कॉलेजों की स्थापना में केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय होने के कारण संस्थानों की स्थापना और संचालन की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है। वहीं केंद्र सरकार राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। राज्यों को अपनी जरूरत के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर राज्य वार्षिक कार्ययोजना के जरिए केंद्र के सामने रखना होता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है जहां सरकारी आयुष शिक्षण संस्थानों की कमी है।
मयूरभंज की मंजूरी क्यों महत्वपूर्ण?
ओडिशा के मयूरभंज में सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की मंजूरी राज्य में आयुर्वेदिक शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों के छात्रों को आयुर्वेद की औपचारिक शिक्षा के नए अवसर मिल सकते हैं। भविष्य में यह संस्थान आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं और शोध गतिविधियों के लिए भी आधार बन सकता है। हालांकि, कॉलेज की स्थापना के बाद उसकी शैक्षणिक मान्यता, आधारभूत ढांचा, शिक्षकों की नियुक्ति, अस्पताल की उपलब्धता और प्रवेश क्षमता जैसे पहलू इसकी प्रभावशीलता तय करेंगे। कुल मिलाकर, राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत नए आयुष शिक्षण संस्थानों को वित्तीय सहायता देने की पहल देश में आयुष चिकित्सा शिक्षा के सरकारी नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 2014-15 से 2026-27 तक जारी सूची में देश के अलग-अलग हिस्सों में आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा रिग्पा से जुड़े संस्थानों को समर्थन दिया गया है। ओडिशा के मयूरभंज में सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की नई मंजूरी इसी विस्तार की ताजा कड़ी है।
