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योग और नेचुरोपैथी के प्रचार पर सरकार का जोर, 2025-26 में योग दिवस पर ₹57.38 करोड़ खर्च
केंद्र सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में योग और प्राकृतिक चिकित्सा यानी नेचुरोपैथी को बढ़ावा देने के लिए देशभर में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। आयुष मंत्रालय की ओर से सूचना, शिक्षा एवं संचार यानी IEC योजना के तहत राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आरोग्य मेले, योग उत्सव, योग पर्व और विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इन अभियानों का उद्देश्य आयुष चिकित्सा पद्धतियों के बारे में लोगों को जानकारी देना और योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा को स्वस्थ जीवनशैली, वेलनेस और स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ना है।

मंत्रालय के अनुसार, इन कार्यक्रमों की पहुंच केवल आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों तक सीमित नहीं है। प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ-साथ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुष से जुड़े संदेशों को आम जनता तक पहुंचाया जा रहा है। इससे सरकार व्यापक स्तर पर लोगों को स्वास्थ्य और वेलनेस के प्रति जागरूक करने की कोशिश कर रही है।
IEC योजना के जरिए आयुष का प्रचार-प्रसार
आयुष मंत्रालय की सूचना, शिक्षा एवं संचार योजना का प्रमुख उद्देश्य आयुष चिकित्सा प्रणालियों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। इसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें आयुष की विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों का प्रतिनिधित्व किया जाता है। योग और प्राकृतिक चिकित्सा इन गतिविधियों के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल हैं। मंत्रालय राष्ट्रीय और राज्य स्तर के आरोग्य मेलों के अलावा योग फेस्ट और योग उत्सव आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को आयुष प्रणालियों के सिद्धांतों और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े पहलुओं की जानकारी देने का प्रयास किया जाता है। आरोग्य मेलों में आयुष की विभिन्न प्रणालियों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। इससे लोगों को आयुष से संबंधित विभिन्न स्वास्थ्य एवं वेलनेस गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल करने का अवसर मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बना बड़ा जन-जागरूकता मंच
योग के प्रचार-प्रसार के लिए हर वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह दिन अब देशभर में बड़े पैमाने पर योग और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन का अवसर बन चुका है। आयुष मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के तहत विभिन्न स्तरों पर गतिविधियां आयोजित करता है। इनमें लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया आउटरीच भी शामिल है। मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से संबंधित कार्यक्रमों पर वित्त वर्ष 2023-24 में 24.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। 2024-25 में यह खर्च 16.45 करोड़ रुपये रहा। इसके बाद 2025-26 में खर्च बढ़कर 57.38 करोड़ रुपये हो गया। इस आंकड़े से पता चलता है कि 2025-26 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से संबंधित गतिविधियों पर खर्च में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
2025-26 में योग दिवस पर खर्च 57.38 करोड़ रुपये
वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर खर्च में उतार-चढ़ाव दिखाई देता है।
- 2023-24: 24.16 करोड़ रुपये
- 2024-25: 16.45 करोड़ रुपये
- 2025-26: 57.38 करोड़ रुपये
यानी 2025-26 में खर्च 2024-25 की तुलना में लगभग 3.5 गुना रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, तीन वर्षों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से संबंधित कार्यक्रमों पर कुल 97.99 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह खर्च देशभर में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विभिन्न जनसंपर्क एवं प्रचार गतिविधियों से जुड़ा है।
राष्ट्रीय आरोग्य मेले पर भी खर्च
आयुष मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर आरोग्य मेले आयोजित किए जाते हैं। इनका उद्देश्य आयुष की विभिन्न प्रणालियों के बारे में आम लोगों तक जानकारी पहुंचाना और स्वास्थ्य एवं वेलनेस से संबंधित जागरूकता पैदा करना है। राष्ट्रीय स्तर के आरोग्य मेले पर वित्त वर्ष 2023-24 में 3.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2024-25 में खर्च 0.90 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 1.80 करोड़ रुपये हो गया। तीन वित्त वर्षों में राष्ट्रीय स्तर के आरोग्य मेलों पर कुल 6.30 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
राज्य स्तर के आरोग्य मेलों पर कितना खर्च?
केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी आरोग्य मेलों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के लिए 2023-24 में 0.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2024-25 में यह राशि बढ़कर 1.02 करोड़ रुपये हो गई। इसके बाद 2025-26 में राज्य स्तर के आरोग्य मेलों पर 0.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए। तीन वर्षों में राज्य स्तर के आरोग्य मेलों पर कुल 2.07 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे स्पष्ट है कि आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयोजनों के साथ-साथ राज्य स्तर पर भी जन-जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है।
योग पर्व और योग उत्सव भी अभियान का हिस्सा
योग फेस्ट और योग पर्व के जरिए भी लोगों को योग से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योग पर्व और उत्सव पर 2024-25 में 0.29 करोड़ रुपये और 2025-26 में 0.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2023-24 के लिए इस मद में खर्च की राशि उपलब्ध विवरण में दर्ज नहीं है। योग से जुड़े इन आयोजनों का उद्देश्य योग को केवल एक दिन की गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय इसे नियमित स्वस्थ जीवनशैली और वेलनेस से जोड़कर लोगों तक पहुंचाना है।
प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के जरिए नेचुरोपैथी पर फोकस
प्राकृतिक चिकित्सा यानी नेचुरोपैथी को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 18 नवंबर को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों और प्रथाओं के बारे में जनता को जानकारी देना तथा स्वस्थ जीवनशैली और वेलनेस में इसकी भूमिका को लेकर जागरूकता पैदा करना है। प्राकृतिक चिकित्सा दिवस से जुड़े कार्यक्रमों पर वित्त वर्ष 2023-24 में 1.33 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2024-25 में यह खर्च 0.23 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2025-26 में 0.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
तीन वर्षों में इस मद में कुल 2.16 करोड़ रुपये खर्च हुए।
तीन साल में प्रमुख कार्यक्रमों पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च
आयुष मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, राष्ट्रीय आरोग्य मेले, राज्य स्तर के आरोग्य मेले, योग पर्व और प्राकृतिक चिकित्सा दिवस को मिलाकर 2023-24 से 2025-26 के दौरान उपलब्ध खर्च लगभग 108.72 करोड़ रुपये बैठता है। यह योग और प्राकृतिक चिकित्सा सहित विभिन्न जन-जागरूकता कार्यक्रमों पर हुए खर्च का मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराया गया विवरण है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े कार्यक्रमों का रहा। कुल उपलब्ध खर्च में योग दिवस से संबंधित गतिविधियों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।
केवल कार्यक्रम नहीं, डिजिटल आउटरीच पर भी जोर
सरकार के इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल पहुंच है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, किसी कार्यक्रम में शारीरिक रूप से शामिल होने वाले लोगों को ही लाभार्थी नहीं माना जाता। सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी जागरूकता संदेश लोगों तक पहुंचाए जाते हैं। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि डिजिटल माध्यमों के जरिए एक आयोजन की जानकारी और स्वास्थ्य संदेश को देश के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से पहुंचाया जा सकता है। इस रणनीति में प्रत्यक्ष कार्यक्रमों और डिजिटल आउटरीच दोनों को शामिल किया गया है, जिससे आयुष से जुड़ी जागरूकता गतिविधियों की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य में वेलनेस पर बढ़ता जोर
सरकार की ओर से योग और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य में बीमारी के इलाज के साथ-साथ स्वास्थ्य संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली पर जोर देने की व्यापक सोच से जुड़ी है। योग को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों में नियमित अभ्यास, शारीरिक सक्रियता और मानसिक एवं समग्र वेलनेस जैसे विषयों को प्रमुखता दी जाती है। वहीं प्राकृतिक चिकित्सा दिवस और इससे संबंधित गतिविधियों के जरिए नेचुरोपैथी के सिद्धांतों और प्रथाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित किसी भी स्वास्थ्य समस्या के इलाज या चिकित्सा निर्णय के लिए व्यक्ति को योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य जानकारी और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है, न कि आवश्यक चिकित्सा उपचार का विकल्प प्रस्तुत करना।
सरकार का फोकस, आयुष को जन-जन तक पहुंचाना
आयुष मंत्रालय की ओर से जारी विवरण से स्पष्ट है कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए सरकार केवल बड़े राष्ट्रीय आयोजनों तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय आरोग्य मेले, राज्य स्तरीय मेले, योग पर्व, योग उत्सव, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और प्राकृतिक चिकित्सा दिवस जैसे कई माध्यमों के जरिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। 2025-26 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए 57.38 करोड़ रुपये का खर्च इस अभियान के पैमाने को दर्शाता है। इसके साथ राष्ट्रीय और राज्य स्तर के आरोग्य मेलों तथा प्राकृतिक चिकित्सा दिवस जैसे कार्यक्रमों पर भी खर्च किया गया है। सरकार की रणनीति का एक अहम हिस्सा यह है कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित संदेशों को कार्यक्रमों में प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी व्यापक आबादी तक पहुंचाया जाए। इस तरह आयुष मंत्रालय सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली और वेलनेस को बढ़ावा देने के लिए बहुस्तरीय अभियान चला रहा है।
