railway
रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा का घेरा, 19,700 किमी फेंसिंग से यात्रियों की सुरक्षा मजबूत l
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे अब तक करीब 19,700 किलोमीटर सेफ्टी फेंसिंग उपलब्ध कराई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि ट्रैक के आसपास अवैध प्रवेश, पशुओं और पैदल यात्रियों के ट्रैक पर आने तथा ट्रेनों पर पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में नियमित अभियान, ट्रेन एस्कॉर्ट टीमों की निगरानी, स्थानीय लोगों के बीच जागरूकता कार्यक्रम और GRP तथा स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय को मजबूत किया गया है। रेलवे का कहना है कि ट्रेन संचालन की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को लेकर रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है। रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि देशभर में रेलवे ट्रैक के किनारे अब तक करीब 19,700 किलोमीटर फेंसिंग उपलब्ध कराई जा चुकी है। रेलवे के अनुसार, यह सेफ्टी फेंसिंग ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश को रोकने के साथ-साथ रेलवे लाइन पर पशुओं, पैदल यात्रियों और छोटे वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने में मदद करती है। जिन स्थानों पर रेलवे लाइन को पार करने की आवश्यकता होती है, वहां पैदल यात्रियों और अन्य लोगों की सुरक्षित आवाजाही के लिए Pedestrian Subways जैसी व्यवस्थाओं को भी सुरक्षा फेंसिंग के साथ विकसित किया जा रहा है।
रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रमुख उद्देश्य ट्रेनों के संचालन में बाधा डालने वाली घटनाओं को कम करना है। इनमें ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश, शरारती तत्वों की गतिविधियां और चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने जैसी घटनाएं शामिल हैं। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की जान को खतरे में डालने या रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे की ओर से संवेदनशील और चिन्हित स्थानों पर नियमित अभियान चलाए जाते हैं। शराब के नशे में रहने वाले लोगों, शरारती तत्वों और अन्य असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। ऐसे अभियानों के दौरान पकड़े गए आरोपियों पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाता है।
रेलवे ने उन क्षेत्रों में ट्रेन एस्कॉर्टिंग पार्टियों को भी विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, जहां पहले ट्रेनों पर पत्थरबाजी या तोड़फोड़ की घटनाएं अधिक सामने आई हैं। संवेदनशील स्थानों और ब्लैक स्पॉट पर निगरानी बढ़ाकर ट्रेन के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। रेलवे की ओर से ‘ऑपरेशन साथी’ (OPERATION SATHI) समेत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम भी नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले लोगों को पत्थरबाजी के खतरों और इसके गंभीर परिणामों के बारे में जागरूक करना है। स्थानीय लोगों को समझाया जाता है कि चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकना यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
रेलवे ने पत्थरबाजी की घटनाओं से निपटने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। घटनाओं का विश्लेषण करने के बाद संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाती है और उसके आधार पर आवश्यक सुरक्षा एवं निगरानी उपाय किए जाते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है। रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF द्वारा Government Railway Police (GRP) और स्थानीय पुलिस के साथ नियमित समन्वय किया जाता है। पत्थरबाजी और अन्य सुरक्षा संबंधी घटनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी संबंधित एजेंसियों के साथ साझा की जाती है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा सके।
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में State Level Security Committee of Railways (SLSCR) का गठन किया गया है। इन समितियों की अध्यक्षता संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के Director General of Police अथवा Police Commissioner करते हैं। इन समितियों के माध्यम से रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और समय-समय पर समीक्षा की जाती है। रेलवे के मुताबिक, ट्रेन संचालन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। ट्रैक के किनारे फेंसिंग उपलब्ध कराने का काम इसी व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। अब तक करीब 19,700 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर फेंसिंग की जा चुकी है, जिसमें बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्से भी शामिल हैं।
रेलवे का प्रयास है कि ट्रैक के आसपास अनधिकृत गतिविधियों को कम किया जाए और यात्रियों के साथ-साथ रेलवे संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। फेंसिंग, निगरानी, कानूनी कार्रवाई, जागरूकता अभियान और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय जैसे उपायों को एक साथ लागू करके रेलवे ट्रैक और ट्रेनों की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी से स्पष्ट है कि भारतीय रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा के साथ-साथ जन-जागरूकता और कानूनी कार्रवाई पर भी समान रूप से जोर दे रहा है, ताकि ट्रेनों का संचालन सुरक्षित रहे और यात्रियों को पत्थरबाजी तथा अन्य असामाजिक गतिविधियों से बचाया जा सके।
