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रेलवे का ‘कवच’ और मजबूत, 660 किमी ट्रैक पर लगेगा Kavach 4.0 l
भारतीय रेलवे ने उत्तर पूर्वी रेलवे के इज्जतनगर मंडल में 660 रूट किलोमीटर पर स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच वर्जन 4.0’ लगाने को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब 295 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कवच एक स्वदेशी Automatic Train Protection (ATP) सिस्टम है, जिसे ट्रेनों के बीच टक्कर रोकने और Signal Passed at Danger यानी SPAD जैसी घटनाओं से बचाव के लिए विकसित किया गया है। यह ट्रेन की गति और गतिविधियों की लगातार निगरानी करता है और जरूरत पड़ने पर अपने आप ब्रेक लागू कर सकता है। घने कोहरे और खराब मौसम जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित ट्रेन संचालन में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इज्जतनगर मंडल के बचे हुए हिस्सों में कवच 4.0 की तैनाती से रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।

भारतीय रेलवे ने ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर पूर्वी रेलवे के इज्जतनगर मंडल के 660 रूट किलोमीटर पर Kavach Version 4.0 लगाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस काम की अनुमानित लागत 295 करोड़ रुपये है। रेलवे के अनुसार, यह कार्य ‘भारतीय रेलवे के शेष हिस्सों में LTE कम्युनिकेशन बैकबोन के साथ कवच उपलब्ध कराने’ वाली व्यापक परियोजना के तहत किया जाएगा।
कवच भारत में विकसित की गई एक स्वदेशी Automatic Train Protection (ATP) प्रणाली है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को दुर्घटनाओं से बचाना और सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करना है। यह तकनीक खास तौर पर Signal Passed at Danger यानी SPAD जैसी स्थितियों को रोकने में मदद करती है, जब कोई ट्रेन निर्धारित लाल सिग्नल को पार कर जाती है। कवच प्रणाली ट्रेन की गतिविधियों और गति की लगातार निगरानी करती है। यदि सिस्टम को लगता है कि किसी स्थिति में ट्रेन को रोकना जरूरी है, तो यह आवश्यकता के अनुसार स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकता है। इससे लोको पायलट को सुरक्षा के लिए अतिरिक्त तकनीकी सहायता मिलती है और मानवीय चूक से होने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
कवच का एक महत्वपूर्ण फायदा यह है कि यह ट्रेनों के बीच संभावित टक्कर के जोखिम को कम करने में सहायता करता है। रेलवे नेटवर्क पर बड़ी संख्या में ट्रेनें अलग-अलग गति और समय पर चलती हैं। ऐसे में आधुनिक Automatic Train Protection सिस्टम ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कवच प्रणाली का उपयोग ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने के साथ-साथ ट्रेनों को उनकी अनुमत अधिकतम गति पर सुरक्षित रूप से चलाने में भी सहायता करता है। इससे रेलवे के संचालन में सुरक्षा और दक्षता दोनों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
खराब मौसम और विशेष रूप से घने कोहरे जैसी परिस्थितियों में भी कवच की भूमिका महत्वपूर्ण है। कम दृश्यता के दौरान लोको पायलट के लिए सिग्नल और ट्रैक की स्थिति को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे समय में तकनीकी निगरानी और स्वचालित सुरक्षा प्रणाली ट्रेन संचालन में अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। इज्जतनगर मंडल में स्वीकृत परियोजना के तहत मंडल के बचे हुए चिन्हित रेलवे सेक्शनों को कवच 4.0 से लैस किया जाएगा। इससे इस क्षेत्र में ट्रेन संचालन की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी और आधुनिक सुरक्षा तकनीक का दायरा बढ़ेगा।
यह परियोजना भारतीय रेलवे की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश के अधिक से अधिक रेल मार्गों पर स्वदेशी Automatic Train Protection तकनीक को लागू किया जा रहा है। इसके साथ LTE आधारित संचार नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि ट्रेन और सुरक्षा प्रणालियों के बीच जरूरी संचार को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। कवच 4.0 की तैनाती से इज्जतनगर मंडल के इन 660 रूट किलोमीटर पर यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। रेलवे के लिए यह परियोजना केवल तकनीकी विस्तार नहीं बल्कि सुरक्षित, विश्वसनीय और आधुनिक रेल संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कुल मिलाकर, 295 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना भारतीय रेलवे के स्वदेशी सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करेगी। 660 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 की तैनाती से संभावित टक्कर, SPAD और अन्य परिचालन जोखिमों को कम करने में सहायता मिलेगी और सुरक्षित ट्रेन संचालन को बढ़ावा मिलेगा।
