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PM-RAHAT योजना से 22,481 सड़क हादसा पीड़ितों को मिला इलाज l

केंद्र सरकार की PM-RAHAT (Road Accident Victims’ Hospitalisation and Assured Treatment) योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। 13 फरवरी 2026 से देशभर में लागू इस योजना के तहत 31 जुलाई 2026 तक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 22,481 लोगों को लाभ मिला है। योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का इलाज कवर, अधिकतम 7 दिनों तक दिया जाता है। इसका सबसे अहम उद्देश्य दुर्घटना के बाद Golden Hour यानी शुरुआती एक घंटे में बिना देरी के चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर जान बचाना है। अब तक अस्पतालों द्वारा उठाए गए दावों में से 12.59 करोड़ रुपये के दावे मंजूर किए गए हैं, जबकि 10.56 करोड़ रुपये अस्पतालों को भुगतान किए जा चुके हैं। योजना को 112 Emergency Response Support System से भी जोड़ा गया है, ताकि पीड़ित या Good Samaritan 112 पर कॉल करके नजदीकी निर्धारित अस्पताल और एंबुलेंस की जानकारी प्राप्त कर सके।

Kashish Rai12 अग. 2026, 08:33 PM IST
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PM-RAHAT योजना से 22,481 सड़क हादसा पीड़ितों को मिला इलाज l

सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की PM-RAHAT योजना तेजी से लागू की जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि योजना के तहत 31 जुलाई 2026 तक 22,481 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को लाभ मिल चुका है। यह लाभ देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिया गया है।


PM-RAHAT योजना को 13 फरवरी 2026 से देशभर में लागू किया गया था। इसका आधार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 में दिए गए कानूनी प्रावधान हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना के बाद पीड़ितों को तुरंत और बिना रुकावट चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है, खासकर दुर्घटना के बाद के उस महत्वपूर्ण समय में जिसे Golden Hour कहा जाता है। Golden Hour दुर्घटना के बाद का शुरुआती एक घंटा होता है। इस अवधि में यदि घायल व्यक्ति को तत्काल और उचित चिकित्सा सहायता मिल जाए, तो गंभीर स्थिति में उसकी जान बचाने की संभावना काफी बढ़ सकती है। इसी वजह से PM-RAHAT योजना में समय पर अस्पताल पहुंचाने और इलाज शुरू कराने पर विशेष जोर दिया गया है।


योजना के तहत प्रत्येक पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को 1.5 लाख रुपये तक का उपचार कवर दिया जाता है। यह सुविधा अधिकतम 7 दिनों तक उपलब्ध रहती है और किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन के कारण हुए सड़क हादसे में घायल लोगों को इसका लाभ दिया जा सकता है। 31 जुलाई 2026 तक योजना के तहत कुल 22,481 मामले सामने आए। इनमें 18,149 मामले स्वीकृत किए गए, जबकि 3,674 मामले निर्धारित समयसीमा में पुलिस की ओर से प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण योजना से बाहर हुए। वहीं 658 गंभीर मामलों में राज्य पुलिस की ओर से पीड़ितों को योजना के लिए पात्र नहीं पाया गया।


राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गुजरात में सबसे अधिक 7,036 मामले दर्ज हुए। इनमें 6,416 मामले स्वीकृत किए गए, 474 मामले पुलिस की निर्धारित समयसीमा में प्रतिक्रिया न मिलने के कारण डिस्चार्ज हुए और 146 मामलों को राज्य पुलिस ने योजना के तहत पात्र नहीं माना। इसके बाद मध्य प्रदेश में 6,761 मामले दर्ज किए गए। इनमें 6,275 मामले स्वीकृत हुए। असम में कुल 2,091 मामले दर्ज हुए, जबकि उत्तर प्रदेश में 887 और जम्मू-कश्मीर में 749 मामले सामने आए।

आंध्र प्रदेश में 677, छत्तीसगढ़ में 644, हरियाणा में 492, ओडिशा में 470 और हिमाचल प्रदेश में 375 मामले दर्ज किए गए। त्रिपुरा में भी 375 मामले दर्ज हुए, जबकि पुडुचेरी में 334 और कर्नाटक में 327 मामलों को योजना के तहत दर्ज किया गया।


महाराष्ट्र में कुल 300 मामले दर्ज हुए, जिनमें 49 मामले स्वीकृत हुए, 197 मामलों में निर्धारित समयसीमा में पुलिस की प्रतिक्रिया नहीं मिली और 54 मामलों को राज्य पुलिस ने पात्र नहीं माना। राजस्थान में कुल 311 मामले दर्ज किए गए। योजना के तहत अस्पतालों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अस्पतालों द्वारा उठाए गए दावों में से राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों यानी State Health Agencies (SHA) ने अब तक 12.59 करोड़ रुपये के दावे मंजूर किए हैं। इनमें से 10.56 करोड़ रुपये अस्पतालों को भुगतान किए जा चुके हैं।


सरकार ने योजना के तहत अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित अस्पतालों के साथ-साथ वे Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (AB PM-JAY) से जुड़े अस्पताल भी निर्धारित अस्पताल माने जा सकते हैं, यदि वे National Health Authority द्वारा जारी PM-RAHAT संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे जरूरत के अनुसार अतिरिक्त अस्पतालों को योजना में शामिल और ऑनबोर्ड करें। इससे दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला समय कम करने और अधिक लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना के तहत इलाज या अस्पताल में भर्ती से इनकार करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। यदि कोई निर्धारित अस्पताल पात्र दुर्घटना पीड़ित को भर्ती करने या उपचार देने से मना करता है, तो संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश उसके खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकता है। ऐसे मामलों में Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 या संबंधित राज्य के कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अस्पतालों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन और empanelment समाप्त करने यानी de-empanelment का भी प्रावधान है।


पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए PM-RAHAT को 112 Emergency Response Support System (ERSS) से भी जोड़ा गया है। दुर्घटना पीड़ित या कोई Good Samaritan 112 नंबर पर कॉल करके नजदीकी निर्धारित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकता है और जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस सहायता भी मांग सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दुर्घटना स्थल से अस्पताल तक पहुंचने में होने वाली देरी को कम करना है। खासकर गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, इसलिए Golden Hour के दौरान चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना योजना की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।


कुल मिलाकर, PM-RAHAT योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ समय पर और सुनिश्चित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब तक 22 हजार से अधिक लोगों को इसका लाभ मिलना बताता है कि योजना का देशभर में व्यापक उपयोग शुरू हो चुका है। सरकार आगे और अस्पतालों को जोड़कर तथा 112 आपातकालीन सेवा के साथ समन्वय मजबूत करके दुर्घटना पीड़ितों तक इलाज की सुविधा तेजी से पहुंचाने पर जोर दे रही है।