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Law Students को बड़ी राहत! कम Attendance पर Semester Exam से नहीं रोक सकेंगे, Bombay HC ने SC के आदेश का खोला पूरा दायरा

कम Attendance की वजह से Exam Hall से बाहर हुए Law Students के लिए बड़ी राहत की खबर है। Bombay High Court ने Supreme Court की One-Time Protection की सीमा साफ करते हुए कहा है कि राहत सिर्फ Final Year तक सीमित नहीं है। 2025-26 में किसी भी Semester की परीक्षा से केवल Attendance Shortage के कारण रोके गए पात्र छात्रों को भी इसका लाभ मिल सकता है। यानी कम Attendance के चलते जिन छात्रों का Academic Year दांव पर लगा था, उनके लिए हाईकोर्ट का यह फैसला बड़ी राहत बनकर सामने आया है।

Sonali12 अग. 2026, 08:33 PM IST
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Law Students को बड़ी राहत! कम Attendance पर Semester Exam से नहीं रोक सकेंगे, Bombay HC ने SC के आदेश का खोला पूरा दायरा

कम Attendance के कारण परीक्षा से वंचित किए गए Law Students को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से 2025-26 Academic Session के लिए दी गई “One-Time Protection” को केवल Final Year या Final Semester के छात्रों तक सीमित नहीं किया जा सकता। यानी इस Academic Session में किसी भी Semester-End Examination से केवल Attendance Shortage के आधार पर रोके गए पात्र Law Students इस राहत का लाभ उठा सकते हैं। यह फैसला खास तौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनका पूरा Academic Session कम Attendance के कारण प्रभावित होने की स्थिति में था।

10 अगस्त 2026 का Bombay HC फैसला, 11 अगस्त को सामने आई रिपोर्ट

यह फैसला 10 अगस्त 2026 को Bombay High Court की Division Bench ने सुनाया। Bench में Justice Riyaz Chagla और Justice Farhan Dubash शामिल थे।  

मामला Indian Law Society (ILS) Law College, Pune के उन छात्रों से जुड़ा था, जिन्हें कम Attendance के कारण Semester-End Examination में बैठने से रोका गया था। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 41 छात्रों की Attendance लगभग 46% से 55% के बीच थी। छात्रों ने दलील दी कि वे Supreme Court की 21 जुलाई 2026 की One-Time Protection के दायरे में आते हैं।

विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ?

पूरे मामले की पृष्ठभूमि Delhi High Court के 3 नवंबर 2025 के फैसले से जुड़ी है। उस मामले में Law Students की Mandatory Attendance से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए थे। बाद में इस फैसले को Supreme Court में चुनौती दी गई। Supreme Court ने 26 मई 2026 को Delhi High Court के संबंधित निर्देशों पर रोक लगा दी। इसके बाद उन छात्रों की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई, जिन्होंने पहले के आदेशों पर भरोसा करते हुए अपनी पढ़ाई और परीक्षाओं की तैयारी की थी। इसके बाद 21 जुलाई 2026 को Supreme Court ने 2025-26 Academic Session से जुड़े प्रभावित Law Students के लिए One-Time Protection प्रदान की। यही Supreme Court का आदेश Bombay High Court के सामने मुख्य विवाद का आधार बना।

Supreme Court की राहत को Final Year तक सीमित करने की कोशिश

Bombay HC के सामने कॉलेज की ओर से दलील दी गई कि Supreme Court की One-Time Protection का लाभ केवल उन छात्रों को मिलना चाहिए जो तीन या पांच वर्षीय Law Course के Final Year अथवा Final Semester में हैं। लेकिन Justice Riyaz Chagla और Justice Farhan Dubash की Bench ने इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने माना कि Supreme Court के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि राहत केवल “Final Year Students” या “Final Semester Students” को मिलेगी।

‘Final Examination’ का मतलब पूरे Law Course की आखिरी परीक्षा नहीं

फैसले का सबसे अहम पहलू Supreme Court के आदेश में इस्तेमाल किए गए “Final Examination” शब्द की व्याख्या है। Bombay High Court ने स्पष्ट किया कि इसे पूरे तीन या पांच वर्षीय Law Course की अंतिम परीक्षा के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता। इसका संबंध संबंधित Academic Session की Semester-End Examination से है।

यानी अगर कोई छात्र 2025-26 में किसी शुरुआती या बीच के Semester की परीक्षा में केवल कम Attendance के कारण नहीं बैठ पाया, तो केवल इसलिए उसे Supreme Court की One-Time Protection से बाहर नहीं किया जा सकता कि वह अभी Final Year में नहीं है।

3-Year और 5-Year Law Course के छात्रों पर असर

इस व्याख्या का सीधा असर तीन वर्षीय और पांच वर्षीय दोनों Law Courses के छात्रों पर पड़ सकता है। मसलन, अगर किसी छात्र को 2025-26 Academic Session में दूसरे, चौथे, छठे या अन्य Semester की परीक्षा में सिर्फ Attendance Shortage के कारण बैठने से रोका गया था, तो वह भी निर्धारित परिस्थितियों में One-Time Protection का दावा कर सकता है। पांच वर्षीय Integrated Law Courses के छात्रों के लिए भी यही सिद्धांत लागू हो सकता है।

क्या हर कम Attendance वाले छात्र को परीक्षा देने की छूट मिल गई?

नहीं। यह बात बेहद महत्वपूर्ण है।

Bombay High Court का फैसला Law Colleges में Attendance Rules को खत्म नहीं करता। न ही इसका अर्थ है कि भविष्य में छात्र बिना आवश्यक Attendance के परीक्षा दे सकेंगे। राहत विशेष परिस्थितियों में 2025-26 Academic Session के लिए दी गई One-Time Protection से जुड़ी है। अर्थात केवल वे छात्र इस राहत के दायरे में आएंगे जिन्हें संबंधित Academic Session में केवल Attendance Shortage के कारण Semester-End Examination से रोका गया था और जो Supreme Court के आदेश में निर्धारित परिस्थितियों के अंतर्गत आते हैं।

सिर्फ याचिका दाखिल करने वाले छात्रों तक राहत सीमित नहीं

फैसले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि समान परिस्थितियों वाले छात्रों को केवल इसलिए राहत से वंचित नहीं किया जाना चाहिए कि उन्होंने अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया। इससे 2025-26 में Attendance Shortage के कारण Semester-End Examination से प्रभावित हुए अन्य समान रूप से स्थित छात्रों के लिए भी राहत का रास्ता खुलता है, हालांकि Supreme Court के One-Time Protection में निर्धारित सीमाएं और अपवाद लागू रहेंगे।

Supplementary Examination का भी रास्ता

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जिन छात्रों को Attendance Shortage के कारण संबंधित Semester-End Examination में बैठने का अवसर नहीं मिला, उनके लिए Supplementary Examination के जरिए परीक्षा देने का रास्ता भी उपलब्ध कराया जाना है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल Attendance Shortage के कारण पूरा Semester या Academic Year दोबारा करने की स्थिति में आने से बचाना है।

हर छात्र के मामले में अलग-अलग ‘Bona Fide Belief’ जांचने की जरूरत नहीं

कॉलेज की ओर से यह तर्क भी रखा गया था कि प्रत्येक छात्र के मामले में अलग-अलग जांच होनी चाहिए कि उसने पहले मौजूद न्यायिक स्थिति पर वास्तव में भरोसा किया था या नहीं। High Court ने ऐसी अतिरिक्त Individual Inquiry को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि इससे Supreme Court के आदेश में ऐसी शर्त जोड़ दी जाएगी जो स्वयं Supreme Court ने निर्धारित नहीं की थी।

Attendance Rules पूरी तरह खत्म नहीं हुए

यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है। Bombay HC का यह फैसला यह नहीं कहता कि Law Colleges भविष्य में Attendance की शर्त नहीं लगा सकते। मौजूदा regulatory framework और सामान्य Attendance Requirements अपनी जगह बने हुए हैं। इस One-Time Protection का संबंध विशेष रूप से 2025-26 Academic Session से है। इसी संदर्भ में Bombay High Court के 30 जून 2026 के एक अन्य आदेश में भी यह स्पष्ट हुआ था कि बाद के दौर में केवल Delhi HC के पुराने फैसले के आधार पर Attendance Rules को स्वतः समाप्त मानना सही नहीं होगा। उस मामले में कोर्ट ने कहा था कि BCI ने Delhi HC के फैसले के बाद ऐसा कोई नया notification/circular जारी नहीं किया था जिसने मौजूदा Attendance framework को समाप्त कर दिया हो।  इसलिए वर्तमान फैसला एक विशेष One-Time Protection है, न कि Law Students के लिए स्थायी Attendance Waiver।

मई 2026 में भी ILS छात्रों को मिली थी राहत

इस विवाद का संबंध ILS Law College के छात्रों से पहले की न्यायिक कार्यवाही से भी है। मई 2026 में कम Attendance के कारण परीक्षा से रोके गए छात्रों ने Bombay High Court का रुख किया था। इसके बाद Attendance और Law Students के परीक्षा अधिकार को लेकर Supreme Court और High Court के सामने लगातार कार्यवाही होती रही। यही वजह है कि 21 जुलाई 2026 के Supreme Court आदेश की व्याख्या वर्तमान Bombay HC फैसले में निर्णायक बन गई।

30 जून के पुराने Bombay HC आदेश से क्या तस्वीर सामने आती है?

यहां एक महत्वपूर्ण Fact Check भी जरूरी है। 30 जून 2026 को Bombay High Court ने एक अलग Law Student Attendance मामले में राहत देने से इनकार किया था। उस मामले में छात्र की Attendance कम थी और कोर्ट ने कहा था कि शैक्षणिक संस्थानों द्वारा बनाए गए Attendance Rules में केवल writ jurisdiction के जरिए हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, जब तक निर्णय में arbitrariness, mala fide, perversity, statutory violation या natural justice का उल्लंघन न हो।  उस आदेश में कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड किया था कि BCI ने Delhi High Court के फैसले के बाद Attendance framework को बदलने वाला कोई नया notification या circular जारी नहीं किया था।  इससे साफ होता है कि वर्तमान Bombay HC फैसला किसी सामान्य नियम के तौर पर “कम Attendance = परीक्षा देने की अनुमति” नहीं बनाता, बल्कि Supreme Court द्वारा 2025-26 के लिए दी गई विशेष One-Time Protection की सीमा स्पष्ट करता है।

छात्रों के लिए क्या बदला?

इस फैसले के बाद 2025-26 Academic Session में कम Attendance के कारण परीक्षा से वंचित हुए Law Students के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि उनका Final Year में होना अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि वे Supreme Court की One-Time Protection के दायरे में आते हैं, तो Semester के आधार पर उन्हें राहत से बाहर नहीं किया जा सकता। यानी राहत का आधार “कौन सा Semester” नहीं, बल्कि 2025-26 Academic Session में Attendance Shortage के कारण परीक्षा से रोके जाने की स्थिति है।

Bombay High Court का यह फैसला 2025-26 Academic Session में कम Attendance के कारण Semester-End Examination से प्रभावित हुए Law Students के लिए अहम राहत लेकर आया है। कोर्ट ने Supreme Court के One-Time Protection को संकीर्ण तरीके से पढ़ने से इनकार करते हुए साफ किया कि इसका लाभ केवल Final Year या Final Semester तक सीमित नहीं है। हालांकि, छात्रों को यह समझना जरूरी है कि यह फैसला सामान्य Attendance Rules को समाप्त नहीं करता। 2025-26 के लिए मिली यह राहत एक विशेष One-Time Measure है, जबकि भविष्य में लागू होने वाले Attendance Requirements अपनी जगह कायम रहेंगे।