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कुत्तों के हमले पर सवाल उठाए तो डॉक्टर को नोटिस! KDMC की कार्रवाई पर उठे सवाल
कल्याण-डोंबिवली में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों से नागरिकों में डर का माहौल है। इसी बीच श्वानदंश के मरीजों की संख्या मीडिया के सामने रखने वाले रुक्मिणीबाई अस्पताल के डॉक्टर संदीप पगारे को KDMC के चिकित्सा विभाग ने नोटिस जारी किया है। डॉक्टर ने 9 अगस्त को 100 से 130 लोगों के कुत्ते के काटने की जानकारी दी थी, जबकि KDMC के अनुसार उसी दिन 58 मामलों की आधिकारिक रूप से दर्ज किए गए थे। आंकड़ों में इस अंतर को लेकर नोटिस जारी होने के बाद सवाल उठ रहा है कि आवारा कुत्तों पर कार्रवाई के बजाय डॉक्टर से जवाब क्यों मांगा जा रहा है?
Priyanka Gaikwad13 अग. 2026, 09:40 PM IST

कल्याण : कल्याण के खड़कपाड़ा इलाके में 9 अगस्त को एक आवारा कुत्ते द्वारा कई लोगों को काटने की घटना सामने आई थी। इसके अगले दिन रेलवे स्टेशन परिसर में भी एक अन्य कुत्ते द्वारा कई लोगों को काटे जाने की जानकारी सामने आई। लगातार हुई इन घटनाओं से नागरिकों में डर का माहौल बना हुआ है और आवारा कुत्तों पर तत्काल कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इसी बीच रुक्मिणीबाई अस्पताल के डॉक्टर संदीप पगारे ने मीडिया से बातचीत में बताया था कि 9 अगस्त को करीब 100 से 130 लोगों को कुत्तों ने काटा। डॉक्टर के इस बयान से इलाके में श्वानदंश की गंभीर स्थिति सामने आई। हालांकि, KDMC के चिकित्सा विभाग ने डॉक्टर द्वारा बताए गए आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है।
KDMC के मुताबिक, 9 अगस्त को श्वानदंश के कुल 58 मामले आधिकारिक तौर पर दर्ज किए गए थे। ऐसे में डॉक्टर द्वारा बताए गए 100 से 130 मरीजों और KDMC के रिकॉर्ड में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। अब सवाल यह है कि दोनों आंकड़े किस आधार पर तैयार किए गए और इस अंतर की असली वजह क्या है? बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों के आधार पर आंकड़ा बताया था, जबकि KDMC की आधिकारिक रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए प्रशासन और अस्पताल के आंकड़ों में अंतर को स्पष्ट करना जरूरी है।
आवारा कुत्तों पर कार्रवाई के बजाय डॉक्टर को नोटिस?
शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों के बीच नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को सबसे पहले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। लेकिन श्वानदंश की संख्या बताने वाले डॉक्टर को नोटिस दिए जाने से KDMC की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड घूमने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष खतरा होने की बात नागरिकों की ओर से कही जा रही है। ऐसे में श्वानदंश की घटनाओं का सही रिकॉर्ड रखने के साथ-साथ आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी और त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है।
अन्य स्वास्थ्य मामलों पर भी सवाल
इस बीच KDMC की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े पहले सामने आए कुछ मामलों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इंजेक्शन की सुई बच्चे की कमर में फंसने और शास्त्रीनगर अस्पताल में प्रेग्नेंसी टेस्ट को लेकर हुए विवाद जैसे मामलों में कार्रवाई को लेकर भी नागरिक सवाल कर रहे हैं। नागरिकों का सवाल है कि अगर श्वानदंश के आंकड़े बताने वाले डॉक्टर को नोटिस दिया जा सकता है, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में सामने आई गंभीर खामियों पर कार्रवाई कब होगी? अब देखना होगा कि KDMC प्रशासन आंकड़ों में अंतर को कैसे स्पष्ट करता है और आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
