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मुंबई में पहाड़ का हिस्सा झोपड़ियों पर गिरा, 7 की मौत l

मुंबई के घाटकोपर पश्चिम के अशोकनगर इलाके में बुधवार तड़के करीब 3 बजे भारी बारिश के बीच पहाड़ का एक हिस्सा झोपड़ियों पर गिर गया। भूस्खलन की चपेट में करीब 6-7 झोपड़ियां आ गईं। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। NDRF, BMC, दमकल विभाग और पुलिस की टीमें राहत-बचाव अभियान में जुटी हैं। संकरे रास्ते के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किलें आईं। हादसे को लेकर प्रशासन की तैयारियों और कथित लापरवाही पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं।

Kashish Rai13 अग. 2026, 09:41 PM IST
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मुंबई में पहाड़ का हिस्सा झोपड़ियों पर गिरा, 7 की मौत l

मुंबई के घाटकोपर पश्चिम इलाके में बुधवार तड़के भारी बारिश के बीच हुए भूस्खलन ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। अशोकनगर इलाके की नवाज चॉल और आसपास की झोपड़ियों पर पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक आ गिरा। हादसा रात करीब 3 बजे हुआ, जब अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक हुए भूस्खलन की वजह से लोगों को संभलने और बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला। बताया जा रहा है कि पहाड़ का मलबा गिरने से करीब 6-7 झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव शुरू किया। इसके बाद पुलिस, मुंबई फायर ब्रिगेड, BMC और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की।


अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है। राजावाड़ी अस्पताल में लाए गए लोगों में से सात को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतकों में बच्चे और युवा भी शामिल हैं। मृतकों में 14 वर्षीय मोहम्मद समीर अंसारी, 19 वर्षीय साहिल हुसैन अब्दुल काजी, 2 वर्षीय अबान आरिफ शेख, 4 वर्षीय मनत आरिफ शेख, 27 वर्षीय मरजीना आरिफ शेख और 27 वर्षीय विकेत रमेश यादव शामिल हैं। करीब 45 वर्षीय एक मृतक की पहचान अभी नहीं हो पाई है।


हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं। कुर्ला भाभा अस्पताल में चार घायलों को भर्ती कराया गया, जिनमें 18 वर्षीय सोहेल अंसारी, 14 वर्षीय मोहम्मद अंसारी, 28 वर्षीय नईमुद्दीन इकबाल खान और 16 वर्षीय साजिद अंसारी शामिल हैं। वहीं राजावाड़ी अस्पताल में फराना दिलबर खान, दिलबर अमनुल्ला खान और शमीन मुस्लिम खान का इलाज चल रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार भर्ती घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।


DCP गणेश शिंदे के मुताबिक, भारी बारिश के कारण अशोकनगर इलाके में भूस्खलन हुआ। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान में BMC, NDRF, दमकल विभाग और पुलिस समेत कई एजेंसियों को लगाया गया है। घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता काफी संकरा होने के कारण भारी उपकरणों और बचाव टीमों को काम करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश और आसपास के इलाके की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया। बचाव अभियान लगभग पूरा होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि मलबे और प्रभावित झोपड़ियों की पूरी जांच के बाद ही नुकसान का अंतिम आकलन स्पष्ट हो सकेगा।


इस हादसे को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जोखिम वाले इलाके में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाना चाहिए था। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर इलाके में भूस्खलन का खतरा था तो प्रशासन ने पहले से पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए। घटनास्थल पर मुंबई की मेयर रितु तावड़े और अतिरिक्त नगर आयुक्त (पूर्वी उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकने समेत वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे और राहत-बचाव कार्य का जायजा लिया। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों की तलाश, घायलों को उपचार उपलब्ध कराना और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना है।