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पुणे मंडल में अंगदान की सुस्त रफ्तार से बढ़ी चिंता, साडे तीन हजार मरीज प्रतीक्षा सूची में फंसे
पुणे संभाग (पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर और कोल्हापुर) में वर्ष 2026 में 31 जुलाई तक केवल 48 अंगदाता ही सामने आए हैं, जिनसे 115 अंगों का प्रत्यारोपण हो पाया है। पुणे विभाग में वर्तमान में 3,378 गंभीर मरीज अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में दर्ज हैं। सर्वाधिक मांग: सबसे ज्यादा 2,192 मरीज किडनी और 990 मरीज लिवर प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा 57 मरीजों को हृदय और 38 मरीजों को फेफड़े की आवश्यकता है।अधिकारियों की अपील: जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (ZTCC) की समन्वयक आरती गोखले के अनुसार, अंगदान की धीमी गति को देखते हुए समाज में भ्रांतियां दूर करने, व्यापक जागरूकता और काउंसलिंग की सख्त जरूरत है ताकि अधिक से अधिक लोगों को नया जीवन मिल सके।

जिससे प्रतिदिन दर्जनों गंभीर मरीज जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने को मजबूर हैं।जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (ZTCC) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में पुणे संभाग से 48, 2022 में 46, 2023 में 58, 2024 में 70 और वर्ष 2025 में 79 अंगदाता मिले थे। वर्ष 2025 के दौरान कुल 207 अंगों का प्रत्यारोपण किया गया था, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई अंत तक 48 दाताओं से 115 अंगों का ही प्रत्यारोपण संभव हो पाया है। प्रतीक्षा सूची में सबसे गंभीर स्थिति किडनी रोगियों की है, जहां अकेले 2,192 मरीज किडनी प्रत्यारोपण के इंतजार में हैं। इसके बाद 990 मरीजों को लिवर, 57 मरीजों को हृदय और 38 मरीजों को फेफड़े की तत्काल आवश्यकता है। इसके अलावा 24 मरीज किडनी-लिवर, 14 मरीज किडनी-पैन्क्रियाज और 10 मरीज हार्ट-लंग्स के संयुक्त
प्रत्यारोपण के लिए कतार में हैं। इस वर्ष अब तक हुए 115 ट्रांसप्लांट में 63 किडनी, 39 लिवर, 6 फेफड़े और 3 हार्ट शामिल हैं।
क्षेत्रीय अंग प्रत्यारोपण समन्वयक आरती गोखले ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि जन जागरूकता के प्रयास निरंतर जारी हैं, लेकिन प्रतीक्षा सूची के मुकाबले दाताओं की संख्या अब भी काफी कम है। साडे तीन हजार से अधिक मरीज अपनी जिंदगी के लिए अंगों का इंतजार कर रहे हैं। समाज में अंगदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने और काउंसिलिंग को और अधिक प्रभावी बनाने की अत्यंत आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक लोग इस महादान के लिए आगे आ सकें।
