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अपोलो की बड़ी छलांग, Q1 में 21% बढ़ा राजस्व; 5,800 बेड की तैयारी
भारत के प्रमुख निजी अस्पताल समूह अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का समेकित राजस्व करीब 21 प्रतिशत बढ़कर ₹7,043 करोड़ पहुंच गया। इसी के साथ कंपनी ने अगले पांच वर्षों में अपने अस्पताल नेटवर्क में 5,800 से अधिक नए बेड जोड़ने की महत्वाकांक्षी विस्तार योजना की घोषणा की है।

यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब भारत में कैंसर, हृदय रोग, ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी और अन्य जटिल बीमारियों के लिए अत्याधुनिक इलाज की मांग लगातार बढ़ रही है। अपोलो के मुताबिक, पहली तिमाही में अस्पतालों की ऑक्यूपेंसी भी पिछले साल के 65 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई। कंपनी का कहना है कि जटिल प्रक्रियाओं और बेहतर केस मिक्स ने अस्पताल कारोबार की वृद्धि को मजबूती दी।
Q1 FY27 में राजस्व 21% बढ़ा
अपोलो हॉस्पिटल्स का Q1 FY27 में समेकित राजस्व ₹7,043 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह करीब ₹5,842 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। EBITDA करीब 28 प्रतिशत बढ़कर ₹1,092 करोड़ पहुंच गया। कंपनी के प्रदर्शन की एक खास बात यह रही कि EBITDA की वृद्धि राजस्व वृद्धि से तेज रही। इससे ऑपरेटिंग मार्जिन में भी सुधार हुआ और EBITDA मार्जिन लगभग 15.5 प्रतिशत तक पहुंच गया।
मुनाफे के आंकड़े में रिपोर्टिंग अंतर
Q1 FY27 के PAT को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है। रॉयटर्स, फाइनेंशियल एक्सप्रेस और कुछ अन्य रिपोर्टों ने समेकित PAT ₹581 करोड़ बताया है, जो सालाना आधार पर 34 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं कुछ बाजार रिपोर्टों में PAT ₹610 करोड़ और लगभग 38.4 प्रतिशत वृद्धि बताई गई है। इसलिए खबर में ₹581 करोड़ के आंकड़े को प्रमुखता देना अधिक सुरक्षित है, क्योंकि यही आंकड़ा कंपनी के Q1 FY27 प्रदर्शन पर प्रकाशित कई रिपोर्टों में एकसमान रूप से सामने आया है। अपोलो का Healthcare Services कारोबार Q1 FY27 में 22 प्रतिशत बढ़कर ₹3,567 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹2,935 करोड़ था। इस सेगमेंट का EBITDA ₹718 करोड़ से बढ़कर ₹862 करोड़ हो गया। सेगमेंट का EBITDA मार्जिन करीब 24 प्रतिशत रहा। PAT भी ₹384 करोड़ से बढ़कर ₹480 करोड़ पहुंच गया, यानी लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि। यह प्रदर्शन बताता है कि कंपनी की मुख्य अस्पताल सेवाएं ही कुल कारोबार की वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण आधार बनी हुई हैं।
पांच साल में 5,800 से ज्यादा नए बेड
अपोलो की सबसे बड़ी घोषणा अगले पांच वर्षों में 5,800 से अधिक बेड जोड़ने की है। यह विस्तार कंपनी के मौजूदा अस्पताल नेटवर्क की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। कंपनी महानगरों के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्लस्टरों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस विस्तार में नए अस्पतालों के निर्माण के साथ मौजूदा अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना भी शामिल है। 30 जून 2026 तक अपोलो हॉस्पिटल्स के नेटवर्क में 8,352 ऑपरेटिंग बेड थे। यह आंकड़ा Apollo Health and Lifestyle Limited के बेड और managed beds को छोड़कर है। तिमाही के दौरान अस्पतालों की कुल ऑक्यूपेंसी 70 प्रतिशत रही, जबकि Q1 FY26 में यह 65 प्रतिशत थी। ऑक्यूपेंसी में पांच प्रतिशत अंक की वृद्धि महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उपलब्ध क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल भी कंपनी के राजस्व और लाभप्रदता के लिए अहम होता है। रॉयटर्स के अनुसार, कंपनी के अस्पताल कारोबार में कैंसर, ऑर्थोपेडिक्स और अन्य जटिल उपचारों की मांग बढ़ी, जिससे उच्च-मूल्य वाली प्रक्रियाओं का योगदान बढ़ा।
1,200 बेड वाले चार नए अस्पताल
कंपनी की विस्तार योजना में चार नई अस्पताल परियोजनाएं शामिल हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 1,200 बेड बताई गई है। इनमें शामिल हैं:
- इंदौर में नया अस्पताल
- द्वारका, दिल्ली में नया अस्पताल
- दिल्ली में Proton Centre
- रांची में नया अस्पताल
इसके अलावा इंदौर और गुवाहाटी की मौजूदा सुविधाओं में कुल 148 बेड जोड़ने की योजना है। यानी कंपनी एक तरफ नए शहरों में अस्पताल खोल रही है, तो दूसरी तरफ मौजूदा नेटवर्क की क्षमता भी बढ़ा रही है।
बेंगलुरु में 180 बेड का नया अस्पताल शुरू
Q1 FY27 के दौरान अपोलो ने बेंगलुरु के सरजापुर में 180 बेड का नया अस्पताल शुरू किया। यह कंपनी की दक्षिण भारत में क्षमता विस्तार रणनीति का हिस्सा है। सरजापुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में अस्पताल शुरू करने का उद्देश्य बढ़ती आबादी और उच्च गुणवत्ता वाली tertiary और quaternary healthcare की मांग को पूरा करना है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि गुरुग्राम की नई सुविधा को वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में शुरू किए जाने की योजना है।
अपोलो के अस्पताल कारोबार में कई क्षेत्रों ने दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की। उपलब्ध Q1 FY27 आंकड़ों के अनुसार:
- तमिलनाडु में राजस्व वृद्धि करीब 16 प्रतिशत
- आंध्र प्रदेश-तेलंगाना में करीब 31 प्रतिशत
- कर्नाटक में करीब 21 प्रतिशत
- पूर्वी क्षेत्र में करीब 20 प्रतिशत
- उत्तरी क्षेत्र में करीब 16 प्रतिशत
- पश्चिमी क्षेत्र में करीब 28 प्रतिशत
इससे पता चलता है कि कंपनी की वृद्धि केवल एक या दो बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रही, बल्कि विभिन्न क्षेत्रीय बाजारों में मांग मजबूत बनी हुई है।
Apollo HealthCo का प्रदर्शन भी मजबूत
अपोलो का दूसरा बड़ा कारोबार HealthCo है, जिसमें फार्मेसी और डिजिटल हेल्थ गतिविधियां शामिल हैं। Q1 FY27 में HealthCo का राजस्व लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर ₹2,977 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह ₹2,472 करोड़ था। इस कारोबार का EBITDA ₹94 करोड़ से बढ़कर ₹171 करोड़ हो गया। PAT भी ₹57 करोड़ से बढ़कर ₹101 करोड़ पहुंच गया। इसका अर्थ है कि कंपनी का डिजिटल और फार्मेसी कारोबार भी अब केवल राजस्व बढ़ाने वाला सेगमेंट नहीं है, बल्कि लाभप्रदता में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। तिमाही के दौरान कंपनी ने फार्मेसी, डायग्नोस्टिक्स और कंसल्टेशन नेटवर्क में 151 नेट नए स्टोर जोड़े। इसके बाद कुल स्टोर की संख्या 7,440 तक पहुंच गई। ऑफलाइन फार्मेसी डिस्ट्रीब्यूशन से राजस्व करीब ₹2,629 करोड़ रहा, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म से लगभग ₹348 करोड़ का राजस्व आया। Apollo 24/7 का GMV करीब ₹535 करोड़ रहा, जिसमें सालाना आधार पर 23 प्रतिशत वृद्धि हुई। यह कंपनी की रणनीति को भी स्पष्ट करता है-अपोलो केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के बजाय अस्पताल, फार्मेसी, डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल हेल्थ को एकीकृत हेल्थकेयर नेटवर्क के रूप में विकसित कर रहा है।
Apollo Health and Lifestyle Limited यानी AHLL का राजस्व Q1 FY27 में 15 प्रतिशत बढ़कर ₹499 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले वर्ष ₹435 करोड़ था। इस सेगमेंट का EBITDA ₹40 करोड़ से बढ़कर ₹59 करोड़ हुआ। PAT घाटा भी ₹8 करोड़ से घटकर करीब ₹1 करोड़ रह गया। इसमें diagnostics और retail health सेवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। अपोलो की तिमाही वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण भारत में complex healthcare की बढ़ती मांग है। कैंसर उपचार, ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और अन्य specialty care में मरीजों की मांग बढ़ रही है। जटिल प्रक्रियाओं में प्रति मरीज राजस्व सामान्य प्रक्रियाओं की तुलना में अधिक हो सकता है। इसी वजह से ऑक्यूपेंसी के साथ-साथ केस मिक्स में सुधार अस्पतालों की वित्तीय performance को मजबूत करता है। रॉयटर्स ने भी अपोलो के Q1 प्रदर्शन को complex treatments की बढ़ती मांग से जोड़ा है।
अपोलो के International Patient Services कारोबार में भी Q1 FY27 के दौरान 26 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। भारत में अपेक्षाकृत कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाले जटिल उपचार उपलब्ध होने के कारण medical tourism और अंतरराष्ट्रीय मरीज निजी अस्पताल समूहों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनते जा रहे हैं। अपोलो का बड़ा नेटवर्क, multi-speciality capabilities और जटिल उपचारों की क्षमता इस बाजार में उसकी स्थिति को मजबूत करती है। 5,800 नए बेड जोड़ने की योजना को केवल संख्या बढ़ाने के रूप में देखना उचित नहीं होगा। नए बेड के साथ डॉक्टरों, नर्सों, टेक्निकल स्टाफ, ICU सुविधाओं, ऑपरेशन थिएटर, diagnostic infrastructure और emergency services की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी होगा। अस्पताल की क्षमता तभी वास्तविक स्वास्थ्य सेवा क्षमता में बदलती है जब पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हों। इसलिए आने वाले वर्षों में अपोलो के लिए expansion के साथ clinical quality, patient safety और operational efficiency बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
हेल्थकेयर सेक्टर पर व्यापक असर
अपोलो का 5,800 से अधिक बेड जोड़ने का फैसला भारत के निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती मांग का भी संकेत है। भारत में tertiary और quaternary care की मांग बढ़ रही है। छोटे और मध्यम शहरों में भी मरीज पहले की तुलना में बेहतर विशेषज्ञ सेवाएं चाहते हैं। इससे बड़े अस्पताल समूहों के लिए metropolitan cities से आगे बढ़कर regional healthcare hubs विकसित करने का अवसर पैदा हो रहा है। अपोलो का नया विस्तार इसी बदलाव का हिस्सा माना जा सकता है।
कंपनी के मौजूदा प्रदर्शन और विस्तार योजनाओं को तीन प्रमुख हिस्सों में समझा जा सकता है:
1. Hospital capacity
नए अस्पतालों और मौजूदा अस्पतालों के विस्तार के जरिए 5,800 से अधिक नए बेड जोड़ना।
2. Digital और pharmacy ecosystem
Apollo 24/7, pharmacy stores, diagnostics और digital consultations के माध्यम से मरीजों को अस्पताल के बाहर भी सेवाएं उपलब्ध कराना।
3. Advanced और complex care
कैंसर, कार्डियक, ऑर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजिकल और अन्य जटिल चिकित्सा सेवाओं में अपनी विशेषज्ञता और क्षमता बढ़ाना।
Q1 FY27 के आंकड़े बताते हैं कि अपोलो ने वित्त वर्ष की शुरुआत मजबूत आधार के साथ की है। राजस्व में करीब 21 प्रतिशत वृद्धि, EBITDA में लगभग 28 प्रतिशत वृद्धि और अस्पतालों की ऑक्यूपेंसी में सुधार कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन आने वाले वर्षों में असली परीक्षा 5,800 से अधिक नए बेड को समय पर operational बनाने और उन्हें पर्याप्त ऑक्यूपेंसी तक पहुंचाने की होगी। नए अस्पतालों को शुरुआती वर्षों में लागत और ramp-up से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। फिर भी, मौजूदा मांग, specialty care की बढ़ती जरूरत और अपोलो के integrated healthcare model को देखते हुए यह विस्तार कंपनी के दीर्घकालिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
अपोलो हॉस्पिटल्स का Q1 FY27 प्रदर्शन केवल एक मजबूत तिमाही के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। ₹7,043 करोड़ का राजस्व, 70 प्रतिशत अस्पताल ऑक्यूपेंसी, Healthcare Services में 22 प्रतिशत वृद्धि और अगले पांच वर्षों में 5,800 से अधिक नए बेड जोड़ने की योजना कंपनी के बड़े विस्तार की तस्वीर पेश करती है। बेंगलुरु के सरजापुर में 180 बेड की नई सुविधा से लेकर इंदौर, द्वारका, दिल्ली Proton Centre और रांची जैसी परियोजनाओं तक, अपोलो अब अस्पताल नेटवर्क को व्यापक बनाने के साथ-साथ complex care और integrated digital healthcare पर भी जोर दे रहा है।भारत में बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों के बीच आने वाले पांच वर्ष यह तय करेंगे कि यह विशाल capacity expansion किस हद तक मरीजों की पहुंच, उपचार क्षमता और कंपनी की वित्तीय वृद्धि में बदल पाता है।
