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130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी भारत की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन
भारत की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन ने राजस्थान के कोटा-रोहल खुर्द सेक्शन पर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल ट्रायल रन किया। परीक्षण के दौरान RDSO और ICF की टीमों ने ट्रेन की विद्युत, प्रोपल्शन, ब्रेकिंग, ट्रैक्शन, थर्मल क्षमता और लोड के साथ संचालन की जांच की। 16 कोच वाली यह ट्रेन पार्सल और अन्य माल की तेज ढुलाई के लिए विकसित की गई है और इसमें आधुनिक लोडिंग सिस्टम, तापमान नियंत्रित सुविधा, CCTV तथा फायर डिटेक्शन जैसी सुविधाएं हैं। सफल परीक्षणों के बाद यह भारतीय रेलवे में तेज और समयबद्ध लॉजिस्टिक्स परिवहन को बढ़ावा दे सकती है।

भारत में तेज और आधुनिक माल ढुलाई की दिशा में रेलवे ने एक अहम कदम बढ़ाया है। देश की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन का राजस्थान में कोटा-रोहल खुर्द सेक्शन पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल रन किया गया। यह परीक्षण वेस्ट सेंट्रल रेलवे के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य ट्रेन की हाई-स्पीड क्षमता और तकनीकी प्रदर्शन का आकलन करना है। यह ट्रायल रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई की टीमों की मौजूदगी में किया गया। परीक्षण के दौरान ट्रेन के संचालन, स्थिरता और हाई-स्पीड प्रदर्शन से जुड़े तकनीकी पहलुओं का मूल्यांकन किया गया।
पार्सल और माल ढुलाई के लिए तैयार
वंदे भारत फ्रेट ट्रेन को मुख्य रूप से पार्सल और अन्य माल की तेज आवाजाही के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक माल ढुलाई की तुलना में अधिक तेज, समयबद्ध और आधुनिक रेल परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है। खास तौर पर ई-कॉमर्स, हाई-वैल्यू सामान और जल्दी पहुंचाए जाने वाले माल के परिवहन में ऐसी ट्रेनें उपयोगी साबित हो सकती हैं। हालिया परीक्षणों में इस ट्रेन ने 130 किमी प्रति घंटे की गति हासिल की है। इससे पहले इसके परीक्षण के दौरान 145 किमी प्रति घंटे तक की गति दर्ज किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। आगे के परीक्षणों और तकनीकी आकलन के आधार पर इसके संचालन से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।
यात्री वंदे भारत से अलग है उद्देश्य
वंदे भारत ट्रेन का नाम अब तक मुख्य रूप से तेज यात्री सेवाओं से जुड़ा रहा है, लेकिन फ्रेट संस्करण उसी तकनीकी प्लेटफॉर्म को माल परिवहन के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में कदम है। इसका लक्ष्य रेलवे के फ्रेट नेटवर्क को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और तेज डिलीवरी की जरूरत वाले बाजारों को रेल परिवहन से जोड़ना है। रेलवे के लिए तेज मालगाड़ियां लॉजिस्टिक्स लागत और डिलीवरी समय को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विशेष रूप से ऐसे सामान जिनकी समय पर डिलीवरी जरूरी होती है, उनके लिए तेज रेल परिवहन सड़क और हवाई परिवहन के बीच एक वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध करा सकता है।
हाई-स्पीड फ्रेट नेटवर्क की दिशा में कदम
कोटा-रोहल खुर्द सेक्शन पर 130 किमी प्रति घंटे का ट्रायल भारतीय रेलवे के हाई-स्पीड फ्रेट परिवहन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण परीक्षण माना जा रहा है। हालांकि ट्रायल रन के बाद नियमित व्यावसायिक संचालन शुरू करने से पहले सुरक्षा, तकनीकी और परिचालन मानकों से जुड़े जरूरी परीक्षण पूरे किए जाएंगे। वंदे भारत फ्रेट ट्रेन के सफल परीक्षण से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई सेवाओं में आधुनिक ट्रेनसेट तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ी हैं। आने वाले समय में ऐसी सेवाओं का विस्तार होने पर तेज डिलीवरी और अधिक कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बढ़ावा मिल सकता है।
