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2047 तक विकसित भारत का संकल्प, PM मोदी ने लाल किले से दिया 7-सूत्रीय रोडमैप

80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए विकसित भारत के निर्माण का व्यापक रोडमैप सामने रखा। तिरंगा फहराने के बाद दिए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता, युवाओं की भागीदारी, तकनीकी विकास, रक्षा क्षमता और स्वदेशी को भारत की आगामी विकास यात्रा का प्रमुख आधार बताया।

Vindhya Dubey15 अग. 2026, 01:09 PM IST
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2047 तक विकसित भारत का संकल्प, PM मोदी ने लाल किले से दिया 7-सूत्रीय रोडमैप

प्रधानमंत्री ने देश के समग्र विकास के लिए ‘सप्तधारा’ यानी सात प्रमुख धाराओं का विजन रखा। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, तकनीकी नवाचार, कनेक्टिविटी और गति शक्ति, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर को मजबूत करना शामिल है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत 2047 में स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब देश को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल सरकार का नहीं बल्कि देश के 140 करोड़ लोगों का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने पिछले वर्षों में गरीबी कम करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों ने देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

आत्मनिर्भर भारत पर विशेष जोर

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी’ को विकास की महत्वपूर्ण नींव बताया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने की स्थिति से बाहर निकलना होगा। पीएम मोदी ने देशवासियों से ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि देश में उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ानी होगी।

मैन्युफैक्चरिंग बनेगा विकास का आधार

सप्तधारा विजन में मैन्युफैक्चरिंग को प्रमुख स्थान देते हुए प्रधानमंत्री ने लागत, गुणवत्ता और उत्पादन के पैमाने पर ध्यान देने की बात कही। उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने वाला देश न रहे, बल्कि दुनिया के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनाने का केंद्र बने।

कृषि और फूड प्रोसेसिंग पर फोकस

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र को भी भारत की आर्थिक ताकत का अहम आधार बताया। कृषि उत्पादन के साथ फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने से किसानों की आय, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई। उन्होंने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और बेहतर वैल्यू चेन के इस्तेमाल पर जोर दिया।

टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर जोर

पीएम मोदी ने भारत की युवा आबादी और तकनीकी क्षमता को देश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने तकनीकी नवाचार को विकास की अगली बड़ी छलांग के लिए जरूरी बताया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और नए इनोवेशन के जरिए भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।

2036 ओलंपिक के लिए बच्चों की प्रतिभा खोज

स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री ने खेल क्षेत्र को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट की बात कही। इस पहल का उद्देश्य कम उम्र में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि भारत भविष्य के ओलंपिक में अपनी स्थिति और मजबूत कर सके।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी सप्तधारा का हिस्सा बनाया। उन्होंने भारत की सुरक्षा जरूरतों के लिए घरेलू उत्पादन और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया। उनका संदेश रहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में भी आगे बढ़ा सकता है।

ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर जोर

पीएम मोदी ने पर्यावरण और समुद्री संसाधनों से जुड़ी अर्थव्यवस्था को भी विकास के एजेंडे में प्रमुख स्थान दिया। ग्रीन इकोनॉमी के तहत स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास पर जोर है, जबकि ब्लू इकोनॉमी समुद्री संसाधनों और उससे जुड़े आर्थिक अवसरों को बढ़ाने की दिशा को दर्शाती है।

योग, स्वास्थ्य, पर्यटन और कला से बढ़ेगी सॉफ्ट पावर

सप्तधारा की अंतिम कड़ी के रूप में प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर को मजबूत करने की बात कही। योग, स्वास्थ्य, पर्यटन और रचनात्मक कला जैसे क्षेत्रों को दुनिया में भारत की पहचान और प्रभाव बढ़ाने का माध्यम बताया गया। भारत की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

कोविड के बाद की चुनौतियों का जिक्र

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कोविड-19 महामारी के बाद सामने आई वैश्विक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महामारी के बाद दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और युद्ध की स्थिति बनी और उस दौरान लोगों में भय पैदा करने वाली कई तरह की बातें कही गईं। पीएम मोदी ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने तैयारियों और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का प्रयास किया।

युवाओं को विकास यात्रा का केंद्र

प्रधानमंत्री के भाषण में युवाओं की भूमिका विशेष रूप से दिखाई दी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास यात्रा में युवा निर्णायक भूमिका निभाएंगे। रोजगार, कौशल, तकनीक, खेल और नवाचार के अवसरों के जरिए युवा शक्ति को देश के विकास से जोड़ने का संदेश दिया गया। कुल मिलाकर, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य, आत्मनिर्भरता और सात क्षेत्रों में तेज विकास की रणनीति पर केंद्रित रहा। सरकार के सामने अब इन घोषणाओं और विजन को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की चुनौती होगी।