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जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारी को रेप-अगवा करने की धमकी! सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI सूर्यकांत ने मंगलवार की सुनवाई के लिए किया लिस्ट

जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन से जुड़ा विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदर्शन में शामिल एक participant ने कथित तौर पर रेप और अपहरण की धमकियों तथा लगातार हो रही ‘विजिलेंटिज्म’ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार को CJI सूर्यकांत के सामने मामले का उल्लेख होते ही कोर्ट ने इसे मंगलवार को छात्र प्रदर्शन से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी। याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि कुछ नए वीडियो सामने आए हैं, जिनकी सामग्री इतनी आपत्तिजनक है कि उसे खुले कोर्ट में बताना भी मुश्किल है। अब सबकी नजर मंगलवार की सुनवाई पर है कि सुप्रीम कोर्ट इस गंभीर आरोप पर क्या अंतरिम राहत या सुरक्षा संबंधी निर्देश देता है।

Sonali15 अग. 2026, 01:10 PM IST
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जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारी को रेप-अगवा करने की धमकी! सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI सूर्यकांत ने मंगलवार की सुनवाई के लिए किया लिस्ट

नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026:

 जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर रेप और अपहरण की धमकियां मिलने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शुक्रवार को CJI सूर्यकांत के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका को मंगलवार को छात्र प्रदर्शन से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है क्योंकि कथित तौर पर लगातार ‘विजिलेंटिज्म’, रेप और अपहरण की धमकियां सामने आ रही हैं। वकील के मुताबिक, इन घटनाओं से संबंधित कई वीडियो पहले ही रिकॉर्ड पर रखे जा चुके हैं, जबकि याचिका दाखिल करने के बाद कुछ नए वीडियो भी सामने आए हैं। वकील ने कहा कि कुछ वीडियो की सामग्री इतनी गंभीर और आपत्तिजनक है कि उसका खुले कोर्ट में उल्लेख करना भी मुश्किल है। इस पर CJI सूर्यकांत ने मामले को मंगलवार को छात्र प्रदर्शन से जुड़ी अन्य petitions के साथ सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों की नई कड़ी

यह नया मामला जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही व्यापक कानूनी कार्यवाही की अगली कड़ी है। प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती, प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी, पुलिस कार्रवाई और protesters के अधिकारों को लेकर पहले भी शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया जा चुका है। इन मामलों की पृष्ठभूमि में Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े छात्र प्रदर्शन भी हैं। जुलाई में प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस की एक internal report में Sansad Marg, Rail Bhawan roundabout, Jantar Mantar और Connaught Place Outer Circle-Janpath stretch सहित कई स्थानों पर clashes का उल्लेख किया गया था।

28 जुलाई का Supreme Court order क्यों है महत्वपूर्ण?

इस पूरे मामले में 28 जुलाई की Supreme Court proceedings खास महत्व रखती हैं। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने CJP-led student protests से जुड़े मामलों में उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फिलहाल coercive action न लेने का निर्देश दिया था, जिनका कोई criminal antecedent नहीं है। हालांकि, Court ने FIR दर्ज करने पर रोक नहीं लगाई थी। इसी सुनवाई के दौरान Court ने कथित police excesses से संबंधित सामग्री और electronic evidence सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया था। CCTV footage, drone footage, body-camera footage, wireless communication और PCR records जैसे records को preserve करने के निर्देश दिए गए थे। Court ने प्रदर्शनकारियों का व्यक्तिगत डेटा public domain में जारी नहीं करने की जरूरत पर भी जोर दिया था। अब जब इसी protest से जुड़े एक participant ने कथित rape और abduction threats की शिकायत Supreme Court के सामने रखी है, तो protesters की personal safety और digital evidence का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है।

पुलिस कार्रवाई से लेकर प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा तक पहुंचा मामला

जंतर-मंतर protest से जुड़ी litigation अब केवल police action तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। एक तरफ protesters की ओर से कथित police excesses और surveillance को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वहीं अब एक participant की ओर से गंभीर धमकियों का आरोप लगाया गया है। ऐसे में मंगलवार की सुनवाई में Supreme Court के सामने यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो सकता है कि कथित threats और intimidation के आरोपों पर तत्काल सुरक्षा या अन्य कानूनी उपाय की आवश्यकता है या नहीं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि Court ने इन आरोपों को सत्य नहीं माना है। रेप और अपहरण की धमकियों तथा सामने आए नए videos के संबंध में फिलहाल ये याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं।

22 जुलाई की सुनवाई को लेकर भी जरूरी clarification

इस protest से जुड़े पुराने घटनाक्रम में 22 जुलाई का मामला भी चर्चा में रहा था। उस समय छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित police brutality को लेकर Supreme Court में तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। बाद में CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि उस समय कोई formal petition दाखिल नहीं हुई थी, बल्कि एक representation का उल्लेख किया गया था। इसलिए इस घटनाक्रम को “Supreme Court ने petition खारिज कर दी” के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। यह clarification इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जंतर-मंतर protest से जुड़े पुराने और नए judicial proceedings को अलग-अलग रखना जरूरी है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर Supreme Court का रुख

प्रदर्शन से जुड़े मामलों में Supreme Court ने peaceful protest के constitutional right और law-and-order के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया है। Court के सामने यह मुद्दा भी आया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती, लेकिन पुलिस की ओर से excessive force का इस्तेमाल भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसी व्यापक संदर्भ में Court ने protests को handle करने के लिए एक uniform protocol या guidelines की आवश्यकता पर भी विचार किया है। इससे मौजूदा मामले का constitutional angle और महत्वपूर्ण हो जाता है—क्योंकि अब सवाल केवल protest करने के अधिकार का नहीं, बल्कि protest में शामिल लोगों की सुरक्षा का भी है।

Facial recognition और surveillance का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में

इसी protest से जुड़े एक अन्य मामले में protest sites पर Delhi Police द्वारा facial-recognition और biometric surveillance tools के कथित इस्तेमाल को भी चुनौती दी गई है। इससे student protest litigation में privacy, surveillance और right to dissent जैसे संवैधानिक मुद्दे भी जुड़ गए हैं। हालांकि, surveillance से जुड़ा मामला और मौजूदा rape-abduction threats वाला मामला अलग-अलग legal proceedings हैं। इन्हें एक ही आरोप या एक ही याचिका के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

Digital videos बन सकते हैं महत्वपूर्ण evidence

मौजूदा मामले में वकील द्वारा जिन videos का उल्लेख किया गया है, उनकी भूमिका आगे महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन किसी भी video की authenticity, source, context और editing की स्वतंत्र जांच के बिना उसके आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। यदि मंगलवार की सुनवाई में Court इन videos या अन्य digital material पर विचार करता है, तो यह भी देखा जा सकता है कि कथित threats की प्रकृति क्या है और क्या किसी व्यक्ति की तत्काल सुरक्षा के लिए judicial intervention आवश्यक है।

क्यों महत्वपूर्ण है मंगलवार की सुनवाई?

मंगलवार की hearing इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि यह मामला जंतर-मंतर student protests से जुड़े पहले से लंबित विवादों के साथ सुना जाना है। Court के सामने एक ओर peaceful protest और protesters के constitutional rights का सवाल है, तो दूसरी ओर law-and-order, alleged police excesses और अब protesters की personal safety से जुड़े गंभीर आरोप हैं। यदि Court इस मामले में कोई सुरक्षा, investigation, evidence preservation या अन्य interim direction देता है, तो इससे आगे की proceedings की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल अंतिम फैसला या आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए मंगलवार की सुनवाई में Supreme Court का रुख इस मामले का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।