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गोरखपुर में निवेश की बंपर रफ्तार, ₹20 हजार करोड़ के आंकड़े से बदली पूर्वांचल की औद्योगिक तस्वीर

गोरखपुर तेजी से पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। GIDA क्षेत्र में करीब ₹15 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश और लगभग 50 हजार रोजगार सृजन का दावा सामने आया है, जबकि व्यापक गोरखपुर क्षेत्र में ₹20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश से जुड़े दावे भी किए गए हैं। रेडीमेड गारमेंट, प्लास्टिक, खाद्य प्रसंस्करण, पेय पदार्थ, डेयरी और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में नई परियोजनाओं के साथ सड़क, बिजली, ड्रेनेज और MSME सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

Neha Sharma15 अग. 2026, 01:10 PM IST
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गोरखपुर में निवेश की बंपर रफ्तार, ₹20 हजार करोड़ के आंकड़े से बदली पूर्वांचल की औद्योगिक तस्वीर

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में गोरखपुर अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में भी अपनी जगह बना रहा है। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA) क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में बड़े उद्योगों, MSME इकाइयों और नए औद्योगिक प्रोजेक्ट्स की गतिविधियां बढ़ी हैं। अलग-अलग सरकारी और मीडिया रिपोर्टों में निवेश के आंकड़े अलग-अलग अवधि और श्रेणियों के आधार पर सामने आए हैं। मई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक GIDA क्षेत्र में करीब ₹15,000 करोड़ का निवेश आया और इससे लगभग 50,000 रोजगार सृजित हुए। वहीं 2024 में उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गोरखपुर में पिछले पांच वर्षों में करीब ₹20,000 करोड़ के सरकारी निवेश की जानकारी दी थी।


गोरखपुर क्यों बन रहा निवेश का नया केंद्र?

गोरखपुर की औद्योगिक तस्वीर में बदलाव के पीछे GIDA की भूमिका महत्वपूर्ण है। बेहतर सड़क संपर्क, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, कानून-व्यवस्था में सुधार और निवेश को आसान बनाने वाली नीतियों को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। GIDA को ऐसे औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को भी जमीन, आधारभूत सुविधाएं और कारोबारी माहौल उपलब्ध कराया जा सके। GIDA की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 में भी औद्योगिक प्लॉटों के लिए योजनाएं और नए आवंटन जारी किए गए हैं।


किन क्षेत्रों में हो रहा निवेश?

गोरखपुर में निवेश केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। यहां खाद्य प्रसंस्करण, पेय पदार्थ, प्लास्टिक, रेडीमेड गारमेंट, डेयरी, ऑटोमोबाइल और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में इकाइयां विकसित हो रही हैं। मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार GIDA क्षेत्र में Kayan Industries ने करीब ₹1,200 करोड़, Varun Beverages ने करीब ₹1,100 करोड़, Ankur Udyog ने करीब ₹500 करोड़, India Autowheels ने करीब ₹400 करोड़ और SD International ने करीब ₹300 करोड़ के निवेश किए हैं। Gyan Dairy का निवेश करीब ₹118 करोड़ बताया गया है। इसके अलावा GIDA के सेक्टर-27 में Coca-Cola प्लांट के लिए 40 एकड़ जमीन आवंटित की गई है और पहले चरण में करीब ₹800 करोड़ के निवेश की जानकारी दी गई है।


रेडीमेड गारमेंट उद्योग पर भी जोर

गोरखपुर में रेडीमेड गारमेंट सेक्टर को भी नए औद्योगिक अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। GIDA क्षेत्र में कपड़ा और परिधान निर्माण से जुड़ी इकाइयां स्थापित हो रही हैं। 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार गोरखपुर में रेडीमेड गारमेंट का संगठित विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित हो रहा है। स्थानीय इकाइयां शर्ट, ट्राउजर, टी-शर्ट, डेनिम और अन्य कपड़ों का उत्पादन कर रही हैं तथा घरेलू ब्रांडों के साथ-साथ भविष्य में निर्यात बाजार से जुड़ने की क्षमता विकसित कर रही हैं।


MSME के लिए बना Plug-and-Play Factory Complex

छोटे और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए GIDA में ₹42.5 करोड़ की लागत से Plug-and-Play Flatted Factory Complex तैयार किया गया है। यह सुविधा सेक्टर-13 में विकसित की गई है और इसमें 80 MSME इकाइयों के लिए जगह बनाई गई है। इसका उद्देश्य ऐसे उद्यमियों को तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है, जिन्हें अलग से जमीन खरीदकर पूरी औद्योगिक सुविधा विकसित करने में अधिक समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। GIDA के अनुसार इस परिसर से करीब 1,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। यहां रेडीमेड गारमेंट, IT और फार्मास्यूटिकल जैसे क्षेत्रों के उद्यमों को बढ़ावा देने की योजना है।


24 नई औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन आवंटित

जुलाई 2026 में GIDA ने 24 नई औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन आवंटित की। इन प्रस्तावित इकाइयों में रेडीमेड गारमेंट और प्लास्टिक उत्पादों से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। इस तरह के भूमि आवंटन से संकेत मिलता है कि गोरखपुर में औद्योगिक गतिविधियां केवल मौजूदा कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई इकाइयों के लिए भी लगातार जमीन और बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।


रोजगार के लिहाज से कितना महत्वपूर्ण है निवेश?

औद्योगिक निवेश का सबसे बड़ा प्रभाव रोजगार पर पड़ता है। मई 2026 की रिपोर्ट में GIDA क्षेत्र में लगभग 50,000 रोजगार सृजित होने की बात कही गई है। इसका फायदा केवल फैक्टरी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, होटल, रिटेल, सर्विस सेक्टर और छोटे कारोबारों को भी मिलता है। इसके अलावा MSME इकाइयों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर सप्लायर और ancillary industries का नेटवर्क विकसित हो सकता है। इससे पूर्वांचल के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और दूसरे बड़े शहरों की ओर पलायन कम करने में मदद मिल सकती है।


औद्योगिक विकास के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर

औद्योगिक निवेश तभी टिकाऊ होता है जब सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज, ड्रेनेज और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों। इसी दिशा में जून 2026 में GIDA क्षेत्र में करीब ₹208 करोड़ की लागत वाली 71 infrastructure projects का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं में सड़क, ड्रेनेज, बिजली, सीवरेज, जल उपचार और waste-management से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए Sector-11 में 96 EWS और LIG flats का आवासीय प्रोजेक्ट भी विकसित किया गया है। इस परियोजना की लागत करीब ₹18.54 करोड़ बताई गई है।


Dhuriyapar से भविष्य में और बढ़ सकता है औद्योगिक विस्तार

GIDA के विस्तार की दिशा में Dhuriyapar Master Plan-2041 भी महत्वपूर्ण है। GIDA की वेबसाइट पर अप्रैल 2026 में Dhuriyapar Master Plan-2041 के Environment Clearance Certificate से संबंधित सूचना प्रकाशित की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में गोरखपुर के औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार मौजूदा GIDA क्षेत्र से आगे भी किया जा सकता है। इससे भविष्य में अधिक जमीन, नए उद्योग और बड़े निवेश के लिए आधार तैयार होने की संभावना है।


क्या ₹20,000 करोड़ का आंकड़ा केवल निजी निवेश है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ₹20,000 करोड़ का आंकड़ा हर रिपोर्ट में एक ही तरह के निवेश को नहीं दर्शाता। 2024 की एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के Infrastructure and Industrial Development Department से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि सरकार ने पिछले पांच वर्षों में गोरखपुर में करीब ₹20,000 करोड़ का निवेश किया है। दूसरी ओर, मई 2026 की रिपोर्ट GIDA क्षेत्र में लगभग ₹15,000 करोड़ के निवेश की बात करती है और इसे औद्योगिक निवेश के संदर्भ में रखती है। इसलिए खबर में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹20,000 करोड़ को सीधे GIDA में आया कुल निजी निवेश बताने के बजाय इसे गोरखपुर क्षेत्र में व्यापक निवेश/सरकारी निवेश के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।


गोरखपुर के लिए इसका क्या मतलब है?

अगर मौजूदा औद्योगिक परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं और नए निवेश जमीन पर उतरते हैं, तो गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण manufacturing और MSME hub बन सकता है। रेडीमेड गारमेंट, प्लास्टिक, खाद्य प्रसंस्करण, पेय पदार्थ, डेयरी और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों के साथ IT और फार्मास्यूटिकल जैसे नए सेक्टरों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसका असर गोरखपुर के साथ आसपास के जिलों पर भी पड़ सकता है। स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने से छोटे कारोबार, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।


गोरखपुर में पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। GIDA में बड़े उद्योगों के साथ MSME इकाइयों के लिए नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं और 2026 में भी नई औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि आवंटन जारी है। ₹20,000 करोड़ के निवेश के दावे को उसके संदर्भ में समझना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग रिपोर्टों में सरकारी और औद्योगिक निवेश के अलग आंकड़े दिए गए हैं। फिर भी ₹15,000 करोड़ के आसपास के GIDA निवेश, करीब 50,000 रोजगार और लगातार आ रही नई औद्योगिक परियोजनाएं यह संकेत देती हैं कि गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश में तेजी से उभरता हुआ औद्योगिक केंद्र बन रहा है।