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उल्हासनगर नगर निगम में 20 करोड़ के निविदा घोटाले का आरोप, एंटी करप्शन ब्यूरो जांच की मांग

उल्हासनगर महानगरपालिका की बुनियादी ढांचा विकास योजना के तहत 196 विकास कार्यों के टेंडर आवंटन में कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष अंजली साल्वे ने लगभग 20 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का आरोप लगाया है।पहले निकाली गई अलग-अलग निविदाओं में ठेकेदारों ने अनुमानित लागत से 15 से 31 प्रतिशत कम दरें दी थीं। हालांकि, प्रशासन ने उन टेंडरों को अचानक रद्द कर 196 कार्यों को 5 करोड़, 5 करोड़ और 10 करोड़ रुपये की तीन बड़ी निविदाओं में एकीकृत कर दिया। नया टेंडर जारी होते ही ठेकेदारों की बोली दरें घटकर महज 0.5 से 2.5 प्रतिशत रह गईं। अंजली साल्वे का आरोप है कि जीएसटी दरों में गिरावट (28% से 18%) के बावजूद पालिका को फायदा मिलने के बजाय 20 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है, जो ठेकेदारों और अधिकारियों की साठगांठ की ओर इशारा करता है। उन्होंने अधिकारियों के निलंबन, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) जांच और कार्रवाई न होने पर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी दी है। वहीं, नगर निगम प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मूल टेंडरों की 120 दिनों की समय सीमा समाप्त होने, ठेकेदारों द्वारा बोली वापस लेने और आगामी आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार ही टेंडरों का एकीकरण किया गया है।

Khushi15 अग. 2026, 01:10 PM IST
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उल्हासनगर नगर निगम में 20 करोड़ के निविदा घोटाले का आरोप, एंटी करप्शन ब्यूरो जांच की मांग
उल्हासनगर : कांग्रेस पार्षद और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अंजली साल्वे ने उल्हासनगर नगर निगम में बुनियादी ढांचा विकास योजना के तहत 196 विकास कार्यों के टेंडर आवंटन में 20 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगाया है।पहले निकाली गई निविदाओं में ठेकेदारों ने 15 से 31 प्रतिशत कम दरों पर काम करने की बोली लगाई थी, लेकिन प्रशासन ने अचानक उन्हें रद्द कर तीन बड़े टेंडरों में एकीकृत कर दिया, जिसके बाद दरों में भारी अंतर आया और नगर निगम को 20 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान की आशंका पैदा हो गई।

जून-जुलै 2025 में उल्हासनगर में लगभग 196 विकास कार्यों के लिए अलग-अलग ई-निविदाएं जारी की गई थीं। उस समय कई ठेकेदारों ने अनुमानित लागत से 15 से 31 फीसदी कम दर पर काम करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, नगर निगम प्रशासन ने इस प्रक्रिया को अचानक रद्द कर दिया और 196 कार्यों को मिलाकर 5 करोड़, 5 करोड़ और 10 करोड़ रुपये की तीन बड़ी नई निविदाएं निकालीं।नया टेंडर जारी होते ही ठेकेदारों की ओर से बोली दरें घटकर महज 0.5 से 2.5 फीसदी रह गईं। दरों में इस भारी अंतर के कारण नगर निगम को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।विपक्ष ने सीमेंट पर जीएसटी दर में कटौती का मुद्दा भी उठाया है। मूल टेंडर के समय सीमेंट पर जीएसटी 28 प्रतिशत था, जो सितंबर 2025 में घटकर 18 प्रतिशत रह गया। 

जीएसटी दर कम होने से निर्माण लागत घटनी चाहिए थी, लेकिन दोबारा जारी निविदाओं में इसका कोई भी वित्तीय लाभ नगर निगम को नहीं मिला।दूसरी ओर, उल्हासनगर नगर निगम के सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि 196 टेंडरों की जांच प्रक्रिया में लगा समय, ठेकेदारों द्वारा बोली वापस लेना और संभावित चुनाव आचार संहिता लागू होने की आशंका को देखते हुए ही टेंडरों का एकीकरण किया गया। प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को कानूनी और नियमों के तहत पारदर्शी बताया है।इसके बावजूद नेता प्रतिपक्ष अंजली साल्वे अपने रुख पर कायम हैं। 

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो वह उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगी।कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष अंजली साल्वे ने कहा, "जब अलग-अलग प्रतिस्पर्धी ठेकेदारों ने 15 से 31 प्रतिशत कम दरें दी थीं, तो वे अचानक एक साथ एक ही चरण में बोली वापस कैसे ले सकते हैं? यह पूर्व-नियोजित साठगांठ का मामला लगता है। संबंधित अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए और इस पूरे मामले की एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच कराई जानी चाहिए।"नगर निगम के कार्यकारी अभियंता ने आरोपों को नकारते हुए कहा, "मूल निविदाओं की 120 दिनों की वैधता अवधि समाप्त हो गई थी और निविदादाताओं ने अपने प्रस्ताव वापस ले लिए थे। आगामी चुनाव आचार संहिता और प्रशासनिक देरी को देखते हुए विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से ही निविदाओं का एकीकरण नियमानुसार किया गया है।"