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भारत के Sports Ecosystem को मिलेगी नई ताकत, नीरज चोपड़ा और गोपीचंद की बड़ी पहल
ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा और दिग्गज बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने भारत में बेहतर और आधुनिक Sports Coaching System विकसित करने के लिए Indian School of Coaching Excellence लॉन्च किया है। Neeraj Chopra Foundation, Pullela Gopichand Badminton Gurukul और AISTS India की साझेदारी से शुरू हुई इस पहल में Sports Science, Technology, Athlete Development, Physical Literacy और Career Development जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया जाएगा। इसका लक्ष्य नई पीढ़ी के प्रशिक्षित और विश्वस्तरीय coaches तैयार करना है, ताकि भारत के युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की training मिल सके।

नई दिल्ली/हैदराबाद: भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और दिग्गज बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने भारतीय खेलों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। दोनों ने Indian School of Coaching Excellence (ISCE) लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य भारत में उच्च गुणवत्ता वाले खेल प्रशिक्षकों यानी coaches की नई पीढ़ी तैयार करना और देश के coaching ecosystem को मजबूत बनाना है। इस पहल की घोषणा 13 अगस्त 2026 को की गई।
क्या है Indian School of Coaching Excellence?
Indian School of Coaching Excellence को Neeraj Chopra Foundation, Pullela Gopichand Badminton Gurukul और AISTS India ने मिलकर शुरू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षकों को तैयार करना है जो केवल अपने खेल की तकनीक तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक sports science, athlete development और technology की भी बेहतर समझ रखते हों। इस पहल को multidisciplinary यानी बहु-विषयक coaching development programme के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका मतलब है कि कोचों को अलग-अलग क्षेत्रों की जानकारी एक साथ दी जाएगी, ताकि वे खिलाड़ियों को आधुनिक high-performance sport की जरूरतों के मुताबिक तैयार कर सकें।
सिर्फ खेल की तकनीक नहीं, पूरी तैयारी पर जोर
ISCE की सबसे महत्वपूर्ण खासियत यह है कि यहां coaching को केवल खेल की तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। कार्यक्रम में Physical Literacy, Sports Science, Sports Education, Technology और Career Development जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य कोचों को खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ उनके मानसिक, तकनीकी और पेशेवर विकास को समझने में सक्षम बनाना है। आज के high-performance sports में केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ी होना पर्याप्त नहीं है। खिलाड़ियों की training, recovery, nutrition, injury prevention, performance analysis और मानसिक तैयारी में coach की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ISCE आधुनिक coaching education पर जोर देगा।
नीरज चोपड़ा ने कोच की भूमिका को क्यों बताया अहम?
नीरज चोपड़ा ने इस पहल के दौरान coaches की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि किसी भी athlete की यात्रा में coach की guidance और nurturing महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार coach केवल खिलाड़ी को sportsperson के रूप में विकसित नहीं करता, बल्कि उसके व्यक्तित्व और सोच को भी प्रभावित करता है। नीरज का मानना है कि भारत में अगली पीढ़ी के sports heroes तैयार करने के लिए coaches को world-class education, mentorship और sports science से जुड़ी नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी सोच के तहत Neeraj Chopra Foundation ISCE के माध्यम से ऐसा माहौल तैयार करना चाहता है जहां coaches लगातार सीख सकें, अपनी skills को बेहतर कर सकें और आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को बेहतर तरीके से तैयार कर सकें।
पुलेला गोपीचंद ने coaching ecosystem को बताया खेल की रीढ़
पुलेला गोपीचंद का भारतीय खेलों में coaching का लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने कई शीर्ष खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया है और भारतीय बैडमिंटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी अकादमी ने PV Sindhu, Saina Nehwal, Kidambi Srikanth और HS Prannoy जैसे खिलाड़ियों के विकास में योगदान दिया है। गोपीचंद के मुताबिक भारतीय खेलों का भविष्य उस ecosystem पर निर्भर करेगा जिसे देश आज तैयार करता है। इस ecosystem के केंद्र में coaches हैं। उनका कहना है कि ISCE का उद्देश्य global best practices को भारतीय अनुभव के साथ जोड़ना है, ताकि coaches लगातार अपनी skills को upgrade कर सकें, एक-दूसरे से सीख सकें और आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व कर सकें।
किन क्षेत्रों में काम करेगा ISCE?
Physical Literacy
Sports Science
Sports Education
Athlete Development
Sports Technology
Career Development
Coaching Skills
Mentorship
High-Performance Training
इसका मकसद coaches को केवल training देने के बजाय उन्हें आधुनिक sports ecosystem की व्यापक समझ देना है।
सरकारी संस्थाओं और Sports Federations से भी सहयोग
ISCE को केवल निजी स्तर की coaching academy के रूप में विकसित करने की योजना नहीं है। इसे एक collaborative knowledge-sharing platform के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए Government Bodies, Sports Authority of India (SAI), sports federations, associations, high-performance centres, academic institutions और private sector के साथ सहयोग की योजना है।
इसका फायदा यह हो सकता है कि coaching से जुड़ा ज्ञान अलग-अलग खेलों और संस्थानों तक पहुंच सके और देश में coaching standards को एक व्यापक स्तर पर बेहतर किया जा सके।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में Olympic, Commonwealth Games, Asian Games और World Championships जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेहतर प्रदर्शन किया है। लेकिन बड़े स्तर पर लगातार सफलता हासिल करने के लिए सिर्फ खिलाड़ियों की प्रतिभा पर्याप्त नहीं है। एक मजबूत coaching system की जरूरत होती है, जिसमें प्रशिक्षित coaches, sports scientists, physiotherapists, performance analysts और अन्य support staff मिलकर काम करें। पुलेला गोपीचंद की अध्यक्षता वाली एक Sports Ministry task force ने भी 2026 में भारत के coaching ecosystem को fragmented और inconsistent बताया था और संस्थागत स्तर पर इसे मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया था। ऐसे समय में ISCE जैसी पहल coaching को व्यक्तिगत प्रतिभा और अनुभव से आगे ले जाकर एक structured professional system बनाने की कोशिश करती है।
खिलाड़ियों को कैसे मिलेगा फायदा?
अगर देश में बेहतर प्रशिक्षित coaches की संख्या बढ़ती है तो इसका सीधा लाभ खिलाड़ियों को मिल सकता है। बेहतर coach खिलाड़ी की तकनीकी कमियों को जल्दी पहचान सकता है, training workload को सही तरीके से निर्धारित कर सकता है और injury risk को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही sports science और technology के इस्तेमाल से performance को data के आधार पर बेहतर किया जा सकता है। इसका फायदा केवल elite athletes को ही नहीं, बल्कि junior और grassroots स्तर के खिलाड़ियों को भी मिल सकता है।
भविष्य के Champions तैयार करने की कोशिश
ISCE का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत में ऐसा coaching ecosystem तैयार करना है जो लगातार नए खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में सक्षम हो। इस पहल के पीछे मूल विचार यह है कि हर बड़े athlete के पीछे एक मजबूत coach की भूमिका होती है। अगर coaches को बेहतर education, mentorship और आधुनिक knowledge उपलब्ध कराया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत के sporting talent को अधिक व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जा सकता है।
नीरज चोपड़ा और गोपीचंद की जोड़ी क्यों खास?
इस पहल की खास बात यह भी है कि इसमें भारत के दो अलग-अलग खेलों के बड़े नाम साथ आए हैं। नीरज चोपड़ा athletics और javelin throw में भारत की सबसे बड़ी वैश्विक उपलब्धियों में से एक का चेहरा हैं, जबकि पुलेला गोपीचंद ने badminton coaching में लंबे समय तक योगदान दिया है। एक athlete और एक coach का यह अनुभव जब एक साथ coaching education के क्षेत्र में आता है तो इससे अलग-अलग खेलों के बीच knowledge sharing का रास्ता खुल सकता है।
आगे क्या होगा?
ISCE आने वाले समय में coaches के लिए multidisciplinary development programmes संचालित करने और विभिन्न संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने पर काम करेगा। इसका उद्देश्य भारत में coaching को लगातार सीखने और professional development से जोड़ना है।
अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल होता है, तो इससे athletics, badminton, hockey, wrestling, boxing, shooting और अन्य खेलों के लिए प्रशिक्षित coaches तैयार करने में मदद मिल सकती है।
नीरज चोपड़ा और पुलेला गोपीचंद की Indian School of Coaching Excellence पहल भारत के खेल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण structural बदलाव की दिशा में कदम है। इसका फोकस केवल नए खिलाड़ियों को तैयार करने के बजाय उन coaches को मजबूत करना है जो भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करेंगे। Sports science, technology, education, mentorship और career development को coaching के साथ जोड़ने की कोशिश भारत के sports ecosystem को अधिक professional और आधुनिक बनाने में मदद कर सकती है। अगर ISCE अपने लक्ष्य के अनुसार देशभर में coaching standards को बेहतर करने में सफल होता है, तो इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में भारत के अंतरराष्ट्रीय sporting performance में भी दिखाई दे सकता है।
