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विमल इलायची विज्ञापन पर FDA का शिकंजा, शाहरुख खान-अजय देवगन-टाइगर श्रॉफ को नोटिस

महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने अभिनेता अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FDA का कहना है कि विज्ञापन प्रथम दृष्टया विमल पान मसाला ब्रांड से संबंध स्थापित करता है और प्रतिबंधित पान मसाला के अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार के तौर पर देखा जा सकता है। तीनों से 15 दिनों के भीतर जवाब देने और संबंधित प्रचार सामग्री हटाने को कहा गया है।

sd16 अग. 2026, 06:17 PM IST
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विमल इलायची विज्ञापन पर FDA का शिकंजा, शाहरुख खान-अजय देवगन-टाइगर श्रॉफ को नोटिस
महाराष्ट्र (Maharashtra) FDA ने इस सप्ताह बॉलीवुड के तीन बड़े सितारों—अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ—को विमल इलायची के विज्ञापन में उनकी भूमिका को लेकर शो-कॉज नोटिस जारी किए।
FDA के मुताबिक, विज्ञापन की जांच के दौरान उसके प्रस्तुतीकरण, संवाद, उत्पाद की ब्रांडिंग और विमल नाम के बाजार में मौजूद संबंध को देखा गया। विभाग का प्राथमिक निष्कर्ष है कि विज्ञापन केवल इलायची का प्रचार नहीं करता, बल्कि विमल नाम को उस पान मसाला ब्रांड से जोड़ता है जिसकी बिक्री महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है। नोटिस में FDA ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन "prima facie" यानी पहली नजर में ऐसे प्रचार के रूप में दिखाई देता है जो प्रतिबंधित विमल पान मसाला ब्रांड की अप्रत्यक्ष मार्केटिंग कर सकता है।
FDA के नोटिस में क्या कहा गया?
नोटिस में कहा गया है कि विज्ञापन की जांच के बाद प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि विज्ञापन Vimal ब्रांड को प्रमोट करता है, जो मुख्य रूप से पान मसाला से जुड़ा हुआ है। FDA ने यह भी उल्लेख किया है कि महाराष्ट्र में पान मसाला ऐसा उत्पाद है जिसके निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध 13 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के Food Safety Commissioner द्वारा Food Safety and Standards Act, 2006 की Section 30(2)(a) के तहत जारी Prohibition Order के आधार पर लागू है। यानी FDA का तर्क यह है कि जब मूल ब्रांड से जुड़ा पान मसाला राज्य में प्रतिबंधित है, तब उसी ब्रांड पहचान के साथ किसी दूसरे उत्पाद का विज्ञापन करना प्रतिबंधित उत्पाद के अप्रत्यक्ष प्रचार का माध्यम बन सकता है।
तीनों अभिनेताओं से क्या जवाब मांगा गया?
FDA ने तीनों कलाकारों से विज्ञापन में उनकी भूमिका स्पष्ट करने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें 15 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। इसके अलावा, FDA ने विज्ञापन से संबंधित प्रमोशनल कंटेंट को उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स से हटाने और अभियान में अपनी भागीदारी रोकने के निर्देश भी दिए हैं। इसका मतलब यह है कि मामला केवल पुराने टीवी विज्ञापन तक सीमित नहीं है। FDA की कार्रवाई में सोशल मीडिया पर मौजूद संबंधित प्रमोशनल पोस्ट और सामग्री भी शामिल है।
2024 में बना था विज्ञापन
विवादित विज्ञापन अभियान 2024 में सामने आया था। इसमें शाहरुख खान और अजय देवगन के साथ टाइगर श्रॉफ नजर आए थे। विज्ञापन में विमल इलायची को प्रमोट किया गया था।अब करीब दो साल बाद महाराष्ट्र FDA ने इस विज्ञापन को नियामकीय जांच के दायरे में लिया है। यह वही ब्रांड है जिसके विज्ञापनों को लेकर पहले भी सरोगेट विज्ञापन यानी किसी प्रतिबंधित उत्पाद को दूसरे उत्पाद के नाम और ब्रांड पहचान के जरिए प्रमोट करने के आरोप लगते रहे हैं।
सरोगेट विज्ञापन क्या होता है?
सरोगेट विज्ञापन में किसी ऐसे उत्पाद का सीधे प्रचार करने के बजाय, जिसका विज्ञापन कानूनी या नियामकीय कारणों से प्रतिबंधित है, उसी ब्रांड नाम या पहचान से जुड़े किसी दूसरे उत्पाद का प्रचार किया जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पान मसाला ब्रांड के नाम से इलायची, माउथ फ्रेशनर या किसी अन्य उत्पाद का विज्ञापन किया जाए, तो नियामक यह जांच सकता है कि वास्तविक उद्देश्य दूसरे प्रतिबंधित उत्पाद की ब्रांड पहचान को बनाए रखना या बढ़ाना तो नहीं है। हालांकि, इस मामले में अभी अंतिम कानूनी निष्कर्ष नहीं आया है। FDA ने फिलहाल नोटिस जारी कर कलाकारों से उनका पक्ष मांगा है।
महाराष्ट्र में पान मसाला पर प्रतिबंध क्यों महत्वपूर्ण है?
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र सरकार का जुलाई 2026 का प्रतिबंध आदेश महत्वपूर्ण है। FDA के अनुसार राज्य में प्रतिबंधित पान मसाला और संबंधित तंबाकू उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक लागू है। इसी वजह से FDA का ध्यान अब केवल प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री और सप्लाई पर ही नहीं, बल्कि उनके संभावित अप्रत्यक्ष प्रचार पर भी है।
FDA की कार्रवाई में नया क्या है?
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कार्रवाई केवल निर्माता या वितरक के खिलाफ नहीं हुई है। FDA ने विज्ञापन में दिखाई देने वाले सेलिब्रिटी एंडोर्सर्स से भी जवाब मांगा है।
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, महाराष्ट्र FDA के नेतृत्व में प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े उल्लंघनों के खिलाफ अभियान तेज किया जा रहा है। यह कार्रवाई सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की जिम्मेदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है—क्या किसी अभिनेता को उस ब्रांड के व्यापक उत्पाद पोर्टफोलियो और उसके नियामकीय स्टेटस की जानकारी होनी चाहिए, जिसका वह प्रचार कर रहा है?
अब आगे क्या होगा?
अब तीनों अभिनेताओं के जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे। वे FDA को यह स्पष्ट कर सकते हैं कि विज्ञापन में उन्होंने किस उत्पाद का प्रचार किया, उनकी भूमिका क्या थी और क्या उन्हें प्रतिबंधित पान मसाला उत्पाद से किसी कथित अप्रत्यक्ष संबंध की जानकारी थी। यदि FDA को जवाब संतोषजनक नहीं लगता, तो विभाग मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है। वहीं, कलाकारों का पक्ष सामने आने के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि वे विज्ञापन को केवल इलायची उत्पाद का विज्ञापन मानते हैं या FDA के आरोपों पर कोई अन्य कानूनी/तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देते हैं।
बड़ी बात
महाराष्ट्र FDA की यह कार्रवाई सेलिब्रिटी विज्ञापन और प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार के बीच बढ़ती नियामकीय निगरानी का संकेत है।
मामले में अभी किसी अभिनेता को दोषी ठहराया नहीं गया है। फिलहाल FDA ने यह कहा है कि विज्ञापन प्रथम दृष्टया प्रतिबंधित विमल पान मसाला ब्रांड के अप्रत्यक्ष प्रचार जैसा प्रतीत होता है और इसी आधार पर तीनों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। अब 15 दिनों के भीतर मिलने वाले जवाब और उसके बाद FDA की कार्रवाई इस पूरे विवाद की अगली दिशा तय करेगी।