international
लेबनान में फिर बरसे इजरायली बम, 11 की मौत; मध्य-पूर्व में बढ़ा बड़े युद्ध का खतरा
दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 11 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं। इजरायल ने हमलों को हिजबुल्लाह की गतिविधियों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया है, जबकि लेबनान और हिजबुल्लाह ने इसकी निंदा की है। जून के युद्धविराम के बावजूद हुई इस हिंसा ने मध्य-पूर्व में शांति प्रयासों और युद्धविराम की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बेरूत: मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई है, जबकि 19 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल हैं। 15 अगस्त को हुए ये हमले जून में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुए युद्धविराम के बाद सबसे घातक हमलों में गिने जा रहे हैं।
दक्षिणी लेबनान में कहां हुआ हमला?
रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली हमलों में दक्षिणी लेबनान के अंसार और देइर अल-जहरानी इलाकों को निशाना बनाया गया। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अंसार में एक घर पर हुए हमले में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें तीन बच्चे शामिल थे। एक अन्य हमले में देइर अल-जहरानी में चार लोगों की मौत और 17 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। स्थानीय अधिकारियों और बचावकर्मियों ने प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान चलाया। नागरिक इलाकों में हुई मौतों ने युद्धविराम की प्रभावशीलता और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इजरायल ने हमले को बताया जवाबी कार्रवाई
इजरायली सेना का कहना है कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े सैन्य ढांचे और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। इजरायल के अनुसार, इससे पहले हिजबुल्लाह की कार्रवाई में उसके तीन सैनिक घायल हुए थे और इसके जवाब में हवाई हमले किए गए। इजरायल का दावा है कि लक्षित इलाकों में हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियां जारी थीं। इजरायली सेना ने यह भी दावा किया है कि हमले में हिजबुल्लाह का एक वरिष्ठ कमांडर मारा गया। हालांकि, इस दावे और हमले से जुड़े अन्य सैन्य विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हुई है।
लेबनान ने हमलों की निंदा की
लेबनानी सरकार ने इजरायली हमलों की कड़ी निंदा की है। प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने नागरिकों की मौत पर चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्र में स्थिरता और शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाती है। राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने भी हमलों को जारी बातचीत और स्थिरता के प्रयासों के लिए नुकसानदायक बताया है। लेबनानी पक्ष का कहना है कि नागरिकों को निशाना बनाया जाना स्वीकार्य नहीं है। खास तौर पर बच्चों और महिलाओं की मौत ने हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।
हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया भी सामने आई
हिजबुल्लाह ने भी हमलों की निंदा की है और चेतावनी दी है कि इस तरह के हमले जारी नहीं रह सकते। संगठन ने इजरायल पर युद्धविराम को कमजोर करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, इजरायल लगातार यह तर्क दे रहा है कि दक्षिणी लेबनान से उसके खिलाफ सैन्य गतिविधियां होने पर वह जवाबी कार्रवाई करेगा। यही टकराव इस समय सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक ओर युद्धविराम और राजनीतिक समाधान की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
जून के समझौते के बाद भी क्यों नहीं थमा तनाव?
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जून में एक युद्धविराम और राजनीतिक ढांचे पर सहमति बनी थी। इसके तहत दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, हिजबुल्लाह के हथियारबंद ढांचे को खत्म करने और चरणबद्ध तरीके से इजरायली सेना की वापसी की दिशा में आगे बढ़ने की बात थी। लेकिन समझौते की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है। इजरायल का कहना है कि दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटाने की प्रक्रिया हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण से जुड़ी है। वहीं हिजबुल्लाह इजरायली वापसी से पहले अपने हथियार छोड़ने की मांग को स्वीकार नहीं कर रहा है। इस गतिरोध के कारण युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है।
अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण
लेबनान और इजरायल के बीच समझौते में अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वॉशिंगटन दोनों पक्षों के बीच समझौते को लागू कराने और दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा व्यवस्था को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इजरायल की ओर से हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण को लेकर सख्त रुख और हिजबुल्लाह की हथियार छोड़ने से इनकार की स्थिति ने समझौते को मुश्किल बना दिया है। अमेरिका ने भी इजरायल की दक्षिणी लेबनान में लंबे समय तक मौजूदगी को लेकर चिंता जताई है।
मध्य-पूर्व के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
लेबनान में बढ़ता तनाव केवल इजरायल और हिजबुल्लाह तक सीमित नहीं है। यह पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। गाजा में युद्धविराम और शांति प्रयासों के बीच दक्षिणी लेबनान में हिंसा बढ़ना क्षेत्रीय तनाव को फिर व्यापक संघर्ष की ओर ले जा सकता है।
इसी बीच गाजा युद्धविराम को लेकर काहिरा में बातचीत भी जारी है। हमास का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को मिस्र पहुंचा है, जहां गाजा में युद्धविराम और अमेरिकी नेतृत्व वाली शांति योजना को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा हो रही है। ऐसे समय में लेबनान में हिंसा बढ़ना क्षेत्रीय शांति प्रयासों के लिए नई चुनौती बन सकता है।
क्या फिर बड़े युद्ध का खतरा है?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि क्षेत्र दोबारा व्यापक युद्ध की ओर बढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम को गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। जून के युद्धविराम के बाद इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत होना बताता है कि जमीनी तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
यदि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला बढ़ता है, तो दक्षिणी लेबनान के साथ-साथ इजरायल के उत्तरी हिस्सों में भी सुरक्षा स्थिति बिगड़ सकती है। इससे बड़े पैमाने पर नागरिक विस्थापन और मानवीय संकट का खतरा बढ़ सकता है। अरब लीग ने भी चेताया है कि दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमले शांति प्रयासों को पटरी से उतार सकते हैं और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा पैदा कर सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती युद्धविराम को बनाए रखना और दोनों पक्षों को दोबारा बड़े सैन्य टकराव से रोकना है। दक्षिणी लेबनान में हुई ताजा मौतों ने यह साफ कर दिया है कि मध्य-पूर्व में शांति की कोशिशों के बावजूद क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा अभी टला नहीं है।
