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LPG को लेकर सरकार का मास्टर प्लान, घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर
केंद्र सरकार ने देश में LPG की घरेलू उपलब्धता मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 21 रिफाइनरियों और कंपनियों के लिए LPG उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं, ताकि वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में घरेलू बाजार में रसोई गैस की कमी न हो। नई व्यवस्था के तहत उत्पादन, भंडारण और परिवहन क्षमता को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का यह फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा और करोड़ों LPG उपभोक्ताओं के लिए नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नई दिल्ली: रसोई गैस यानी LPG की घरेलू उपलब्धता मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पहली बार देश की सरकारी और निजी रिफाइनरियों तथा अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए सुविधा-वार LPG उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं। 13 अगस्त के सरकारी आदेश के मुताबिक, 21 रिफाइनरियों और कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन तक LPG उत्पादन की क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था खास तौर पर उस समय लागू होगी जब देश में LPG की आपूर्ति पर दबाव हो।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का यह फैसला पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुए ऊर्जा आपूर्ति संकट के बाद आया है। भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और देश के LPG आयात का करीब 90 फीसदी हिस्सा ऐसे मार्ग से आता है जो Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान भारत की रसोई गैस आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार अब घरेलू उत्पादन को एक स्थायी सुरक्षा कवच के रूप में विकसित करना चाहती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधित होने पर घरेलू बाजार में LPG की कमी या राशनिंग जैसी स्थिति न बने।
21 कंपनियों को मिला उत्पादन लक्ष्य
सरकारी आदेश के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की 18 रिफाइनरियों को मिलाकर कुल 31,470 टन प्रतिदिन का उत्पादन लक्ष्य दिया गया है। इसके अलावा निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों और अपस्ट्रीम उत्पादकों को भी निर्धारित लक्ष्य दिए गए हैं। इस सूची में Reliance Industries को सबसे बड़ा लक्ष्य दिया गया है। जामनगर स्थित उसकी domestic-tariff-area refinery के लिए प्रतिदिन 18,000 टन LPG उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं Nayara Energy की Vadinar refinery के लिए 4,480 टन प्रतिदिन का लक्ष्य है। ONGC और GAIL जैसे अपस्ट्रीम उत्पादकों और प्रोसेसरों को मिलाकर 6,460 टन प्रतिदिन का लक्ष्य दिया गया है।
भारत की LPG जरूरत कितनी है?
भारत में LPG की खपत लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब 33.2 मिलियन टन LPG की खपत हुई, यानी औसतन लगभग 91,000 टन प्रतिदिन। इसी अवधि में घरेलू उत्पादन करीब 13.1 मिलियन टन रहा, जबकि लगभग 21.3 मिलियन टन LPG का आयात किया गया। यानी भारत अपनी कुल LPG जरूरत का 64 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरा कर रहा था। यही भारी आयात निर्भरता सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता है। वैश्विक संकट, समुद्री मार्गों में व्यवधान या अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी का सीधा असर भारत की LPG आपूर्ति और लागत पर पड़ सकता है।
Reliance को सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्यों?
सरकार द्वारा Reliance Industries की जामनगर refinery को सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य दिया गया है। इसका कारण कंपनी की विशाल refining क्षमता और LPG उत्पादन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। जामनगर परिसर में Reliance की दो प्रमुख refinery सुविधाएं हैं, लेकिन नए आदेश में 18,000 टन प्रतिदिन का लक्ष्य उसके domestic-tariff-area refinery के लिए निर्धारित किया गया है। Export-oriented refinery के लिए इस आदेश में अलग उत्पादन लक्ष्य नहीं दिया गया है।
संकट के समय सरकार ने पहले भी बढ़ाया था उत्पादन
यह फैसला अचानक नहीं आया है। पश्चिम एशिया में आपूर्ति संकट के दौरान सरकार पहले ही तेल कंपनियों को LPG उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दे चुकी थी। उस समय कुछ ऐसे hydrocarbon streams को LPG उत्पादन की ओर मोड़ा गया था जिनका इस्तेमाल सामान्य परिस्थितियों में पेट्रोकेमिकल उत्पादन में किया जाता है। संकट के दौरान घरेलू LPG उत्पादन एक समय करीब 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में सुधार होने पर आपातकालीन उपायों को धीरे-धीरे वापस लिया गया। अब सरकार ने इसी अनुभव से सीख लेते हुए एक स्थायी ढांचा तैयार किया है, ताकि अगली बार संकट आने पर अचानक फैसले लेने की जरूरत कम हो।
सिर्फ उत्पादन नहीं, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट पर भी जोर
नई नीति में केवल LPG उत्पादन बढ़ाने की बात नहीं है। रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों को LPG के भंडारण, निकासी और परिवहन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा बनाए रखने को भी कहा गया है। कंपनियों को तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य उपायों के जरिए LPG उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें कुछ मामलों में naphtha-to-LPG conversion और fluid catalytic cracking units में आवश्यक तकनीकी सुधार शामिल हैं। इसका मकसद केवल संकट के दौरान उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि देश के पास पर्याप्त LPG buffer उपलब्ध कराना है।
हर छह महीने में होगी समीक्षा
सरकार ने उत्पादन लक्ष्य को स्थायी और अपरिवर्तनीय संख्या नहीं बनाया है। आदेश के अनुसार उत्पादन कार्यक्रम की समीक्षा हर छह महीने में की जाएगी। समीक्षा 1 जनवरी और 1 जुलाई को होगी। इस दौरान नई रिफाइनरियों, अपस्ट्रीम उत्पादन, तकनीकी सुधारों और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को ध्यान में रखते हुए लक्ष्यों में बदलाव किया जा सकता है।
सरकार को मिला उत्पादन बढ़ाने का अधिकार
नई व्यवस्था के तहत सरकार जरूरत पड़ने पर तेल रिफाइनरियों, तेल विपणन कंपनियों और अपस्ट्रीम उत्पादकों को एक निश्चित मात्रा और निश्चित अवधि के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश भी दे सकती है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त LPG उपलब्धता बनाए रखना, अलग-अलग क्षेत्रों में समान वितरण सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर आपूर्ति उपलब्ध कराना है।
आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG की उपलब्धता को सुरक्षित करना है। अगर भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण LPG आयात प्रभावित होता है, तो घरेलू उत्पादन बढ़ाकर उस कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि LPG की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। घरेलू LPG की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों, सरकारी सब्सिडी, तेल कंपनियों की लागत और अन्य आर्थिक कारकों का भी प्रभाव रहता है।
LPG आयात पर निर्भरता कम करना बड़ी चुनौती
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि LPG की घरेलू मांग और घरेलू उत्पादन के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। वित्त वर्ष 2025-26 में जहां खपत करीब 33.2 मिलियन टन थी, वहीं घरेलू उत्पादन सिर्फ 13.1 मिलियन टन रहा। इसलिए नए उत्पादन लक्ष्य के बावजूद भारत को निकट भविष्य में LPG आयात पर पूरी तरह निर्भरता खत्म करना मुश्किल होगा। लेकिन सरकार की नई व्यवस्था संकट के समय आयात में आने वाली बाधाओं से निपटने के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच जरूर तैयार कर सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
सरकार का यह कदम भारत की energy security यानी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में तनाव और Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर अनिश्चितता ने यह दिखा दिया है कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता किसी भी देश के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। नई व्यवस्था के जरिए सरकार घरेलू LPG उत्पादन, स्टोरेज और परिवहन क्षमता को मजबूत करना चाहती है। इससे भविष्य में वैश्विक संकट के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर, LPG उत्पादन के लिए पहली बार कंपनी और सुविधा-वार लक्ष्य तय करना भारत की ऊर्जा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव है। यह फैसला तत्काल LPG की कीमत घटाने से ज्यादा भविष्य में आपूर्ति सुरक्षा मजबूत करने पर केंद्रित है। यदि घरेलू उत्पादन क्षमता और infrastructure को लगातार बढ़ाया जाता है, तो भारत आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय LPG आपूर्ति में होने वाले झटकों से बेहतर तरीके से निपट सकेगा।
