crime

श्रद्धा केस में 4 साल बाद भी इंसाफ अधूरा, अवशेषों के अंतिम संस्कार का इंतजार l

द्धा वाल्कर हत्याकांड को चार साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ ट्रायल अब तक पूरा नहीं हुआ है। जांच के दौरान बरामद श्रद्धा के अवशेष अभी भी केस प्रॉपर्टी के तौर पर सुरक्षित हैं। परिवार का कहना है कि अवशेष अदालत और पुलिस के कब्जे में होने के कारण श्रद्धा का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। श्रद्धा के भाई श्रीजे विकास वाल्कर ने ट्रायल जल्द पूरा करने और अवशेष परिवार को सौंपने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल ट्रायल पूरा करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है।

Kashish Rai19 अग. 2026, 10:02 AM IST
खबर शेयर करें:
श्रद्धा केस में 4 साल बाद भी इंसाफ अधूरा, अवशेषों के अंतिम संस्कार का इंतजार l

श्रद्धा वाल्कर हत्याकांड को चार साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन इस बहुचर्चित मामले में इंसाफ का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। मई 2022 में दिल्ली के महरौली इलाके में श्रद्धा वाल्कर की उसके लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें महरौली के जंगलों में अलग-अलग जगहों पर ठिकाने लगाया गया।


मामले का खुलासा नवंबर 2022 में हुआ, जिसके बाद पुलिस ने आफताब को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान श्रद्धा के कुछ अवशेष बरामद किए गए। डीएनए जांच के जरिए इन अवशेषों की पहचान श्रद्धा के रूप में की गई। लेकिन मामला अदालत में लंबित होने के कारण ये अवशेष अभी भी केस प्रॉपर्टी के तौर पर सुरक्षित रखे गए हैं। परिवार लंबे समय से चाहता है कि अवशेष उन्हें सौंपे जाएं, ताकि श्रद्धा का अंतिम संस्कार किया जा सके।

पिता के बाद भाई संभाल रहा इंसाफ की लड़ाई

श्रद्धा के पिता विकास वाल्कर ने बेटी की मौत के बाद लंबे समय तक इंसाफ की लड़ाई लड़ी। बेटी के अंतिम संस्कार की इच्छा उनके साथ ही रह गई और फरवरी 2025 में उनका निधन हो गया। अब श्रद्धा के भाई श्रीजे विकास वाल्कर परिवार की ओर से कानूनी लड़ाई आगे बढ़ा रहे हैं। श्रीजे का कहना है कि परिवार के लिए यह बेहद पीड़ादायक है कि श्रद्धा के अवशेष वर्षों से केस प्रॉपर्टी के तौर पर रखे हुए हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान जब इन अवशेषों को सबूत के तौर पर पेश किया जाता है, तो परिवार के लिए वह पल बेहद भावुक और मुश्किल होता है। परिवार चाहता है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत जब संभव हो, श्रद्धा के अवशेष उन्हें सौंपे जाएं और अंतिम संस्कार किया जा सके।

चार्जशीट के बाद शुरू हुआ ट्रायल

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जनवरी 2023 में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद मई 2023 में आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए। जून 2023 से दिल्ली की साकेत कोर्ट में मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। शुरुआत में उम्मीद थी कि मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में होने के कारण अपेक्षाकृत तेजी से पूरा होगा, लेकिन तीन साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद ट्रायल अभी समाप्त नहीं हुआ है। मामले में अभियोजन पक्ष के कई गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन अभी भी महत्वपूर्ण गवाहियों और जिरह की प्रक्रिया बाकी है। केस में जांच अधिकारियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों समेत कई अहम गवाहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इनके बयान और जिरह पूरी होने के बाद ही मुकदमा आगे के चरण में पहुंच सकेगा।

सुनवाई में देरी बनी बड़ी चुनौती

मामले की सुनवाई में देरी को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। बाद में ट्रायल को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए रोजाना सुनवाई की दिशा में कदम उठाए गए। अदालत ने भी मामले को जल्द आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सुनवाई की तारीखों के बीच अलग-अलग कारणों से कार्यवाही प्रभावित होती रही है। जुलाई 2026 में भी आफताब की IGNOU की परीक्षा के कारण एक सुनवाई टल गई थी। आफताब जेल में रहते हुए MA Sociology की पढ़ाई कर रहा है। इसके अलावा मामले में बचाव पक्ष और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़े कारणों से भी कई बार सुनवाई प्रभावित हुई है।

भाई ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार

ट्रायल में हो रही देरी और श्रद्धा के अवशेषों को लेकर श्रीजे विकास वाल्कर ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने अदालत से ट्रायल को जल्द पूरा कराने के लिए निर्देश देने और परिवार को श्रद्धा के अवशेष सौंपने की मांग की। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल पूरा करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय करने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह भी देखा कि ट्रायल अब नियमित रूप से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में फिलहाल अलग से डेडलाइन तय करने का आदेश नहीं दिया गया।

फैसला आने के बाद भी खत्म नहीं होगी कानूनी लड़ाई

श्रद्धा केस में अभी ट्रायल कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है। पहले अभियोजन और बचाव पक्ष की कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी, जिसके बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी। इसके बाद भी यदि किसी पक्ष को फैसले से आपत्ति होती है, तो हाईकोर्ट और आगे सुप्रीम कोर्ट में अपील की कानूनी संभावना बनी रहेगी। यानी श्रद्धा के परिवार के लिए इंसाफ का रास्ता अभी लंबा हो सकता है। एक तरफ परिवार अदालत से मामले के जल्द निपटारे की उम्मीद कर रहा है, तो दूसरी तरफ वह श्रद्धा के अवशेषों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का इंतजार भी कर रहा है। चार साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इस मामले का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। अब परिवार की उम्मीद अदालत की आगे की सुनवाई और उस फैसले पर टिकी है, जो श्रद्धा के लिए इंसाफ की दिशा में अंतिम कदम साबित हो सके।