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छात्राओं के लिए महाराष्ट्र सरकार का बड़ा प्लान, हर महीने ₹2,000 पॉकेट मनी देने का प्रस्ताव

महाराष्ट्र सरकार उच्च शिक्षा हासिल कर रही छात्राओं को हर महीने ₹2,000 पॉकेट मनी देने की योजना पर विचार कर रही है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने इसकी जानकारी दी। योजना को ‘कमाओ और सीखो’ की तर्ज पर तैयार करने और इसके लिए CSR फंड का इस्तेमाल करने पर विचार हो रहा है।

Vindhya Dubey21 अग. 2026, 09:57 AM IST
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छात्राओं के लिए महाराष्ट्र सरकार का बड़ा प्लान, हर महीने ₹2,000 पॉकेट मनी देने का प्रस्ताव

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार उच्च शिक्षा हासिल कर रही छात्राओं के लिए एक नई आर्थिक सहायता योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत राज्य की छात्राओं को हर महीने ₹2,000 पॉकेट मनी देने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य आर्थिक कारणों से छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित न हो और उन्हें पढ़ाई के दौरान होने वाले छोटे-मोटे खर्चों के लिए आर्थिक सहायता मिल सके। इस प्रस्ताव की जानकारी महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को मंत्रालय में छात्रों के साथ संवाद के दौरान दी। मंत्री ने बताया कि विभाग उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं के लिए ‘कमाओ और सीखो’ योजना की तर्ज पर मासिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही पात्र छात्राओं को हर महीने ₹2,000 की राशि पॉकेट मनी के रूप में दी जा सकती है। इस सहायता का उद्देश्य छात्राओं को अपनी रोजमर्रा की छोटी जरूरतों और शिक्षा से जुड़े खर्चों में मदद करना है। सरकार का मानना है कि कई छात्राएं आर्थिक परिस्थितियों के कारण उच्च शिक्षा जारी रखने में कठिनाई महसूस करती हैं। ऐसे में नियमित आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल सकती है।


प्रस्तावित योजना का दायरा काफी बड़ा बताया जा रहा है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, योजना लागू होने पर महाराष्ट्र की लगभग 12 लाख छात्राओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। सरकार इसे उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है। योजना के जरिए छात्राओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा।

CSR फंड से जुटाई जा सकती है राशि

इस योजना के लिए सरकार कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड का इस्तेमाल करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग विश्वविद्यालयों और बड़े कॉलेजों के साथ बातचीत कर रहा है। CSR के माध्यम से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल छात्राओं को आर्थिक सहायता देने में किया जा सकता है। हालांकि, फंडिंग का अंतिम मॉडल और राशि वितरण की व्यवस्था अभी तय नहीं हुई है। मंत्री चंद्रकांत पाटील ने बताया कि प्रस्तावित योजना का आधार ‘कमाओ और सीखो’ योजना हो सकता है। इस योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। नई प्रस्तावित पहल में छात्राओं को सीधे मासिक आर्थिक सहायता देने का विचार है। सरकार का मानना है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं को उच्च शिक्षा जारी रखने में अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। महाराष्ट्र सरकार उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। मंत्री के अनुसार, आर्थिक सहायता मिलने से अधिक छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए आगे आ सकती हैं और अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हैं। सरकार का लक्ष्य यह भी है कि केवल आर्थिक समस्याओं के कारण कोई छात्रा अपनी उच्च शिक्षा बीच में न छोड़े। ₹2,000 की मासिक सहायता इसी दिशा में प्रस्तावित एक कदम है।

अभी योजना को अंतिम मंजूरी नहीं

हालांकि, ₹2,000 की पॉकेट मनी देने की योजना अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है। फिलहाल सरकार इसके प्रस्ताव, फंडिंग और क्रियान्वयन के तरीकों पर चर्चा कर रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि योजना के लिए कौन-कौन सी छात्राएं पात्र होंगी, आय सीमा क्या होगी, किस कक्षा या पाठ्यक्रम में पढ़ने वाली छात्राओं को लाभ मिलेगा और राशि सीधे बैंक खाते में दी जाएगी या किसी अन्य माध्यम से। इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय सरकार की मंजूरी और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। 19 अगस्त को मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री चंद्रकांत पाटील ने छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याओं एवं शिक्षा से जुड़ी जरूरतों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, खालसा कॉलेज के प्राचार्य तथा रुईया कॉलेज और सिद्धार्थ कॉलेज के विद्यार्थी भी मौजूद थे। सरकार की ओर से प्रस्तावित यह योजना यदि लागू होती है, तो महाराष्ट्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही बड़ी संख्या में छात्राओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल सकती है। हालांकि, योजना की अंतिम मंजूरी, पात्रता और लागू होने की तारीख का अभी इंतजार है।