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1960 के नियम खत्म, महाराष्ट्र में नए पुलिस थानों के लिए A, B, C श्रेणी लागू
महाराष्ट्र में पुलिस व्यवस्था को बदलती जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। अब नए पुलिस थानों में पुलिसकर्मियों की संख्या सिर्फ आबादी के आधार पर तय नहीं होगी, बल्कि पिछले तीन वर्षों में दर्ज अपराध, जनसंख्या और क्षेत्र की पुलिसिंग जरूरत भी अहम भूमिका निभाएगी। 1960 से चले आ रहे पुराने मानकों की जगह नए A, B और C श्रेणी आधारित नियम लागू होंगे।

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नए पुलिस थानों की स्थापना और वहां पुलिसकर्मियों की संख्या तय करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी क्षेत्र में पुलिस बल की जरूरत केवल आबादी के आधार पर तय नहीं होगी, बल्कि अपराध की स्थिति, जनसंख्या और इलाके में पुलिसिंग की जरूरत को भी प्रमुख आधार बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि बदलते समय और अपराध के नए स्वरूपों को देखते हुए पुराने नियमों में बदलाव जरूरी हो गया था। महाराष्ट्र में पुलिस थानों के लिए पुलिसकर्मियों की संख्या तय करने का पुराना ढांचा वर्ष 1960 से चला आ रहा था। सरकार के अनुसार, पिछले कई दशकों में राज्य की आबादी में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके साथ ही औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और अपराध के स्वरूप में भी बड़े बदलाव हुए हैं। खास तौर पर साइबर अपराध में बढ़ोतरी ने पुलिस व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। ऐसे में पुराने मानकों के आधार पर पुलिस बल तय करना पर्याप्त नहीं माना गया। नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस क्षेत्र में अपराध का दबाव अधिक है, वहां आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध हो।
नए पुलिस स्टेशनों को A, B और C श्रेणी
बृहन्मुंबई पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र को छोड़कर राज्य में प्रस्तावित नए पुलिस स्टेशनों को अब A, B और C श्रेणी में बांटा जाएगा। पुलिस स्टेशन की श्रेणी के आधार पर वहां आवश्यक पुलिसकर्मियों की संख्या तय की जाएगी। इस व्यवस्था में अधिक अपराध और अधिक पुलिसिंग जरूरत वाले क्षेत्रों को उसी के अनुरूप ज्यादा मानव संसाधन उपलब्ध कराने का प्रावधान होगा। इससे पुलिस बल को क्षेत्र की वास्तविक जरूरत के अनुसार व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। नए पुलिस स्टेशन की स्थापना के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानकों में से एक पिछले तीन वर्षों में प्रस्तावित पुलिस स्टेशन क्षेत्र में दर्ज अपराधों का रिकॉर्ड होगा। यानी किसी नए थाने का प्रस्ताव केवल इस आधार पर स्वीकार नहीं किया जाएगा कि इलाके की आबादी बढ़ गई है। संबंधित क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों के दौरान दर्ज अपराधों की संख्या और प्रकृति को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसके अलावा नए पुलिस स्टेशन के प्रस्ताव को निर्धारित सात से आठ शर्तों में से आवश्यक मानकों को पूरा करना होगा। इन शर्तों को पूरा करने के बाद ही नए थाने की स्थापना और उसके लिए आवश्यक पुलिस बल पर विचार किया जाएगा।
मुंबई के लिए अलग व्यवस्था
नए नियमों में बृहन्मुंबई पुलिस आयुक्तालय को अलग रखा गया है। मुंबई की आबादी, शहरी घनत्व, अपराध का स्वरूप और पुलिसिंग की विशेष जरूरतों को देखते हुए यहां पुलिस स्टेशन और पुलिस बल के लिए अलग फॉर्मूला लागू किया जाएगा। मुंबई जैसे महानगर में सामान्य ग्रामीण या अन्य शहरी क्षेत्रों के मानकों को सीधे लागू करना उचित नहीं माना गया है। नए ढांचे में गडचिरोली और गोंदिया जिलों को A, B और C श्रेणी के सामान्य वर्गीकरण से बाहर रखा गया है। इन जिलों की विशेष भौगोलिक और सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए इनके लिए अलग दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामान्य अपराध और आबादी आधारित मानकों के बजाय इन क्षेत्रों की विशिष्ट पुलिसिंग आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जा सके। पुलिस स्टेशन और पुलिस बल से जुड़े नियमों में यह बदलाव बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद किया गया है। अदालत ने राज्य सरकार से वर्ष 2023 में बनाए गए मानकों पर दोबारा विचार करने और पुलिस थानों की स्थापना तथा उनके लिए आवश्यक पुलिस बल को लेकर एक व्यापक नीति तैयार करने को कहा था। इसके बाद राज्य सरकार ने नए प्रस्ताव पर काम किया और संशोधित प्रस्ताव अक्टूबर 2025 में प्रस्तुत किया गया।
नए नियमों का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पुलिस बल का निर्धारण अब केवल एक पुराने तय मानक पर निर्भर नहीं रहेगा। अपराध का स्तर, आबादी और क्षेत्र की पुलिसिंग जरूरत जैसे कारकों को शामिल करने से पुलिस संसाधनों को अधिक जरूरत वाले क्षेत्रों में केंद्रित किया जा सकेगा। साइबर अपराध, आर्थिक अपराध और तेजी से बदलते अपराध के तरीकों के बीच पुलिस विभाग के लिए पर्याप्त और उपयुक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो गया है।
