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मुंबई की सरकारी जमीन पर नई नीति, 30 साल की Lease पर मिलेगा प्लॉट
महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी हाउसिंग सोसायटियों को सरकारी जमीन आवंटित करने पर करीब 16 साल से चली आ रही रोक हटाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था में सरकारी भूखंडों का आवंटन पुरानी Lottery System के बजाय Transparent Auction के जरिए किया जाएगा। मुंबई और उपनगरों में जमीन के लिए बेस प्राइस बाजार मूल्य का 2.5% और राज्य के अन्य हिस्सों में 5% प्रस्तावित है। जमीन सीधे मालिकाना हक पर देने के बजाय 30 साल की Lease पर आवंटित की जाएगी। हालांकि, नई नीति को मुख्यमंत्री की अंतिम मंजूरी और आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही पूरी तरह लागू किया जाएगा।

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं को सरकारी जमीन आवंटित करने पर वर्ष 2010 से चली आ रही रोक हटाने का फैसला किया है। नई नीति के तहत अब सरकारी जमीन का आवंटन पुरानी लॉटरी व्यवस्था के बजाय पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इससे मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में सरकारी जमीन का इंतजार कर रही हाउसिंग सोसायटियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
2010 में क्यों लगी थी रोक?
सरकारी जमीन को सहकारी हाउसिंग सोसायटियों को आवंटित करने की प्रक्रिया पहले 1999 और 2007 के शासन निर्णयों के तहत होती थी। लेकिन वर्ष 2010 में सामने आए आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले के बाद सरकार ने नई सोसायटियों को सरकारी जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया रोक दी थी। मुंबई के कोलाबा स्थित आदर्श सोसायटी को लेकर जमीन, निर्माण नियमों और सरकारी अधिकारियों तथा प्रभावशाली लोगों को फ्लैट आवंटन से जुड़े गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद सरकारी जमीन के आवंटन की पारदर्शिता पर व्यापक बहस हुई और पुरानी व्यवस्था पर रोक लग गई।
अब क्या बदलेगा?
नई प्रस्तावित नीति में सरकारी जमीन लॉटरी से नहीं बल्कि प्रत्यक्ष नीलामी के जरिए दी जाएगी। जिला कलेक्टर उपलब्ध सरकारी भूखंडों की सूची तैयार करेंगे। इसके बाद सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर इच्छुक सहकारी हाउसिंग सोसायटियों से तकनीकी और वित्तीय बोलियां मंगाई जाएंगी। जिस पात्र सोसायटी की बोली सबसे अधिक होगी, उसे संबंधित भूखंड आवंटित किया जाएगा। इससे सरकार का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
मुंबई में जमीन के लिए कितना बेस प्राइस होगा?
नई नीति के अनुसार मुंबई शहर और उसके उपनगरों में सरकारी जमीन के लिए बेस प्राइस जमीन के बाजार मूल्य का 2.5% रखा जाएगा। महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में यह आधार दर बाजार मूल्य का 5% होगी। इसके बाद नीलामी में पात्र सोसायटियां अपनी वित्तीय बोली प्रस्तुत कर सकेंगी। यह व्यवस्था मुंबई जैसे महंगे रियल एस्टेट बाजार में खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकारी जमीन की कीमत और उपलब्धता दोनों ही हाउसिंग प्रोजेक्ट की लागत को प्रभावित करते हैं।
अब जमीन सीधे मालिकाना हक पर नहीं मिलेगी
नई नीति में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार के अनुसार सरकारी जमीन अब सीधे ownership basis पर आवंटित नहीं की जाएगी। इसके बजाय जमीन 30 साल की लीज पर दी जाएगी। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार जमीन को Occupancy Class-I में बदलने की पात्रता मिल सकती है, जिससे आगे चलकर वह प्रभावी रूप से फ्रीहोल्ड जैसी स्थिति में आ सकती है।
अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण
नई नीति में केवल सामान्य श्रेणी की हाउसिंग सोसायटियों को ही जमीन देने के बजाय अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण का प्रस्ताव रखा गया है।
40% भूखंड सामान्य श्रेणी की सोसायटियों के लिए
15% राज्य सरकार, स्थानीय निकाय और सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों की सोसायटियों के लिए
10% SC, ST और NT वर्गों के लिए
10% लेखक, कलाकार, खिलाड़ी और पत्रकारों के लिए
5% दिव्यांग व्यक्तियों, EWS तथा स्वतंत्रता सेनानियों/उनके उत्तराधिकारियों के लिए
5% केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए
5% वर्तमान या पूर्व सशस्त्र बल कर्मियों के लिए
5% वर्तमान या पूर्व सांसदों और विधायकों के लिए प्रस्तावित है।
हाउसिंग सोसायटियों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन सहकारी हाउसिंग सोसायटियों पर पड़ सकता है जो लंबे समय से सरकारी जमीन पर आवासीय परियोजना शुरू करने का इंतजार कर रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी सोसायटियां उपलब्ध सरकारी भूखंडों के लिए नीलामी में हिस्सा ले सकेंगी। हालांकि, सिर्फ सोसायटी का आवेदन करना पर्याप्त नहीं होगा—उसे नीति में निर्धारित पात्रता, आरक्षण और तकनीकी-आर्थिक शर्तों को पूरा करना होगा और नीलामी में सफल होना होगा। इसलिए इसे सरकारी जमीन का मुफ्त या सीधे आवंटन समझना सही नहीं होगा। यह मूल रूप से प्रतिस्पर्धी auction-based allotment system होगा।
सरकार ने यह नीति क्यों बनाई?
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के अनुसार, नई नीति तैयार करने में हाईकोर्ट में लंबित संजय गांधी सहकारी गृहनिर्माण संस्था, कोल्हापुर से जुड़े मामले और 25 नवंबर 2024 के सुप्रीम कोर्ट के अवलोकनों को ध्यान में रखा गया है। सरकार का उद्देश्य पुरानी व्यवस्था से जुड़े विवादों को दूर करते हुए सरकारी जमीन के आवंटन में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और स्पष्ट नियम लाना है।
क्या यह नीति तुरंत लागू हो गई है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्व मंत्री ने नई नीति के मसौदे को मंजूरी दी है और इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाना है। इसलिए विस्तृत नियम, आवेदन प्रक्रिया, उपलब्ध भूखंडों की सूची और नीलामी की तारीखें आधिकारिक अधिसूचना के बाद स्पष्ट होंगी।
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला मुंबई समेत पूरे राज्य में सरकारी जमीन और किफायती आवास से जुड़े क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 16 साल से रुकी सरकारी जमीन आवंटन प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने, लॉटरी की जगह नीलामी लागू करने और 30 साल की लीज व्यवस्था लाने से सरकार पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, हाउसिंग सोसायटियों के लिए असली तस्वीर तब साफ होगी जब अंतिम नीति, पात्रता नियम, भूखंडों की सूची और नीलामी की शर्तें आधिकारिक रूप से जारी होंगी।
